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मराठी डेडलाइन विवाद: CM फडणवीस ने दिया एक साल, संजय निरुपम बोले — 'भक्ति की भाषा से बढ़े मराठी'

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मराठी डेडलाइन विवाद: CM फडणवीस ने दिया एक साल, संजय निरुपम बोले — 'भक्ति की भाषा से बढ़े मराठी'

सारांश

एक महीने की कड़ी डेडलाइन और हजारों नोटिसों से उपजे डर के बाद CM फडणवीस ने एक साल का समय दिया — शिवसेना के संजय निरुपम ने इसे सही दिशा बताया, लेकिन पुराना जीआर वापस लेने और नोटिस रद्द करने की मांग भी रख दी।

मुख्य बातें

मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने ऑटो-टैक्सी चालकों को मराठी सीखने के लिए एक वर्ष की समयसीमा दी।
शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने फैसले का स्वागत किया और भाषा को 'भक्ति' से बढ़ावा देने पर जोर दिया।
करीब ढाई से तीन हजार ऑटो चालकों को पहले नोटिस दिए जा चुके हैं; निरुपम ने इन्हें वापस लेने की मांग की।
12 अगस्त का पुराना जीआर वापस लेकर नया सरकारी आदेश जारी करने की माँग की गई।
अभी करीब 10 से 15 प्रतिशत चालकों ने मराठी नहीं सीखी है।
निरुपम ने विपक्ष पर मुद्दे को उत्तर प्रदेश चुनाव से जोड़कर राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया।

मुंबई में ऑटो-टैक्सी चालकों को मराठी भाषा सीखने के लिए एक वर्ष की समयसीमा देने के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के फैसले का शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने 27 अगस्त को खुलकर स्वागत किया। उन्होंने इसे चालकों के हित में एक संतुलित कदम बताया और कहा कि भाषा को सख्ती नहीं, बल्कि प्रेम और सम्मान के साथ बढ़ावा दिया जाना चाहिए।

विवाद की जड़: 12 अगस्त का जीआर

यह पूरा मामला 12 अगस्त को जारी एक सरकारी आदेश (जीआर) से शुरू हुआ, जिसमें ऑटो-टैक्सी चालकों को मराठी सीखने के लिए केवल एक महीने की समयसीमा दी गई थी। निरुपम के अनुसार, इस आदेश का हवाला देकर कुछ आरटीओ अधिकारियों ने चालकों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी — नोटिस जारी किए गए और लाइसेंस, बैज तथा परमिट जब्त किए गए। इससे चालकों में भय का वातावरण बन गया।

निरुपम ने बताया कि उनकी परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक से हाल ही में मुलाकात हुई थी, जिसमें उन्होंने एक महीने की समयसीमा पर आपत्ति दर्ज कराई थी। अनुमान है कि इस दौरान करीब ढाई से तीन हजार ऑटो चालकों को नोटिस दिए जा चुके हैं।

नई घोषणा और प्रशासनिक मांग

निरुपम ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री की नई घोषणा को कानूनी रूप देने के लिए 12 अगस्त का पुराना जीआर वापस लेकर एक नया सरकारी आदेश जारी करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि नया जीआर आने के बाद पहले जारी किए गए सभी नोटिस भी वापस लिए जाने चाहिए। उनका यह भी सुझाव था कि यदि एक वर्ष बाद भी किसी चालक को कठिनाई हो, तो अतिरिक्त समय देने पर विचार किया जा सकता है।

शिवसेना की भाषा-नीति और बाला साहेब की विरासत

निरुपम ने रेखांकित किया कि शिवसेना की स्थापना के समय से यह सिद्धांत रहा है कि महाराष्ट्र में रहने वाले हर व्यक्ति को मराठी भाषा, संस्कृति और मराठी अस्मिता का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने शिवसेना प्रमुख बाला साहेब ठाकरे की इस विरासत का उल्लेख किया और एकनाथ शिंदे के बयान का हवाला देते हुए कहा कि मराठी को 'सख्ती की भाषा नहीं, बल्कि भक्ति की भाषा' के रूप में आगे बढ़ाया जाए।

उन्होंने यह भी कहा कि अभी करीब 10 से 15 प्रतिशत ऑटो-टैक्सी चालक ऐसे हैं जिन्होंने अब तक मराठी नहीं सीखी है, और उन्हें एक वर्ष का समय मिलना उचित है।

राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप

निरुपम ने विपक्ष पर इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया। उन्होंने विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के नेताओं पर निशाना साधा, जो मुंबई में रहने वाले उत्तर भारतीय ऑटो और टैक्सी चालकों का मुद्दा उठा रहे हैं। उनका कहना था कि उत्तर प्रदेश के चुनाव को ध्यान में रखते हुए मुंबई में रहने वाले उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों को भड़काने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।

आगे की राह

परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने मोटर व्हीकल एक्ट के प्रावधानों के तहत भाषा-सम्मान सुनिश्चित करने की बात कही है। अब सरकार पर यह दबाव है कि वह पुराना जीआर वापस लेकर नया आदेश जारी करे, ताकि हजारों चालकों को राहत मिल सके। निरुपम के अनुसार, भाषा-नीति का उद्देश्य किसी को दंडित करना नहीं, बल्कि सहयोग और सम्मान की भावना से मराठी को आगे बढ़ाना है।

संपादकीय दृष्टिकोण

न कि सुविचारित नीति का। फडणवीस का एक साल का कदम राहत तो देता है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या भाषा-सीखने की कोई ठोस, सरकार-समर्थित व्यवस्था बनेगी — या यह डेडलाइन भी अगले साल एक और विवाद की नींव बनेगी। उत्तर प्रदेश चुनाव के संदर्भ में मुंबई के प्रवासी मजदूरों को 'भड़काने' का आरोप बताता है कि भाषा की यह लड़ाई कब और कैसे चुनावी हथियार बन जाती है।
RashtraPress
28 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मराठी भाषा सीखने की डेडलाइन का विवाद क्या है?
महाराष्ट्र सरकार ने 12 अगस्त को एक जीआर जारी कर ऑटो-टैक्सी चालकों को मराठी सीखने के लिए एक महीने की समयसीमा दी थी। इसके बाद कुछ आरटीओ अधिकारियों ने चालकों को नोटिस देकर लाइसेंस और परमिट जब्त करने की कार्रवाई शुरू कर दी, जिससे चालकों में भय का माहौल बन गया।
CM फडणवीस ने नया क्या फैसला लिया है?
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने ऑटो-टैक्सी चालकों को मराठी सीखने के लिए एक महीने की जगह एक पूरे वर्ष की समयसीमा देने की घोषणा की है। यह फैसला पुराने जीआर की कड़ी समयसीमा के विरोध के बाद आया है।
संजय निरुपम ने क्या मांग रखी है?
शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने मांग की है कि 12 अगस्त का पुराना जीआर वापस लेकर नया सरकारी आदेश जारी किया जाए। साथ ही, ढाई से तीन हजार चालकों को दिए गए नोटिस भी वापस लिए जाएं।
कितने ऑटो-टैक्सी चालकों ने अभी तक मराठी नहीं सीखी है?
निरुपम के अनुसार, अभी करीब 10 से 15 प्रतिशत ऑटो-टैक्सी चालक ऐसे हैं जिन्होंने मराठी भाषा नहीं सीखी है। इन्हीं चालकों को अब एक वर्ष का समय दिया गया है।
क्या इस मुद्दे पर राजनीति भी हो रही है?
हाँ, निरुपम ने विपक्ष पर इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया है। उन्होंने कहा कि उत्तर प्रदेश के चुनाव को देखते हुए मुंबई के उत्तर भारतीय चालकों को भड़काने की कोशिश की जा रही है, जो उचित नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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