मराठी डेडलाइन विवाद: CM फडणवीस ने दिया एक साल, संजय निरुपम बोले — 'भक्ति की भाषा से बढ़े मराठी'
सारांश
मुख्य बातें
मुंबई में ऑटो-टैक्सी चालकों को मराठी भाषा सीखने के लिए एक वर्ष की समयसीमा देने के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के फैसले का शिवसेना प्रवक्ता संजय निरुपम ने 27 अगस्त को खुलकर स्वागत किया। उन्होंने इसे चालकों के हित में एक संतुलित कदम बताया और कहा कि भाषा को सख्ती नहीं, बल्कि प्रेम और सम्मान के साथ बढ़ावा दिया जाना चाहिए।
विवाद की जड़: 12 अगस्त का जीआर
यह पूरा मामला 12 अगस्त को जारी एक सरकारी आदेश (जीआर) से शुरू हुआ, जिसमें ऑटो-टैक्सी चालकों को मराठी सीखने के लिए केवल एक महीने की समयसीमा दी गई थी। निरुपम के अनुसार, इस आदेश का हवाला देकर कुछ आरटीओ अधिकारियों ने चालकों के खिलाफ कार्रवाई शुरू कर दी — नोटिस जारी किए गए और लाइसेंस, बैज तथा परमिट जब्त किए गए। इससे चालकों में भय का वातावरण बन गया।
निरुपम ने बताया कि उनकी परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक से हाल ही में मुलाकात हुई थी, जिसमें उन्होंने एक महीने की समयसीमा पर आपत्ति दर्ज कराई थी। अनुमान है कि इस दौरान करीब ढाई से तीन हजार ऑटो चालकों को नोटिस दिए जा चुके हैं।
नई घोषणा और प्रशासनिक मांग
निरुपम ने स्पष्ट किया कि मुख्यमंत्री की नई घोषणा को कानूनी रूप देने के लिए 12 अगस्त का पुराना जीआर वापस लेकर एक नया सरकारी आदेश जारी करना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि नया जीआर आने के बाद पहले जारी किए गए सभी नोटिस भी वापस लिए जाने चाहिए। उनका यह भी सुझाव था कि यदि एक वर्ष बाद भी किसी चालक को कठिनाई हो, तो अतिरिक्त समय देने पर विचार किया जा सकता है।
शिवसेना की भाषा-नीति और बाला साहेब की विरासत
निरुपम ने रेखांकित किया कि शिवसेना की स्थापना के समय से यह सिद्धांत रहा है कि महाराष्ट्र में रहने वाले हर व्यक्ति को मराठी भाषा, संस्कृति और मराठी अस्मिता का सम्मान करना चाहिए। उन्होंने शिवसेना प्रमुख बाला साहेब ठाकरे की इस विरासत का उल्लेख किया और एकनाथ शिंदे के बयान का हवाला देते हुए कहा कि मराठी को 'सख्ती की भाषा नहीं, बल्कि भक्ति की भाषा' के रूप में आगे बढ़ाया जाए।
उन्होंने यह भी कहा कि अभी करीब 10 से 15 प्रतिशत ऑटो-टैक्सी चालक ऐसे हैं जिन्होंने अब तक मराठी नहीं सीखी है, और उन्हें एक वर्ष का समय मिलना उचित है।
राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप
निरुपम ने विपक्ष पर इस मुद्दे को राजनीतिक रंग देने का आरोप लगाया। उन्होंने विशेष रूप से उत्तर प्रदेश के नेताओं पर निशाना साधा, जो मुंबई में रहने वाले उत्तर भारतीय ऑटो और टैक्सी चालकों का मुद्दा उठा रहे हैं। उनका कहना था कि उत्तर प्रदेश के चुनाव को ध्यान में रखते हुए मुंबई में रहने वाले उत्तर प्रदेश और बिहार के लोगों को भड़काने की कोशिश नहीं होनी चाहिए।
आगे की राह
परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने मोटर व्हीकल एक्ट के प्रावधानों के तहत भाषा-सम्मान सुनिश्चित करने की बात कही है। अब सरकार पर यह दबाव है कि वह पुराना जीआर वापस लेकर नया आदेश जारी करे, ताकि हजारों चालकों को राहत मिल सके। निरुपम के अनुसार, भाषा-नीति का उद्देश्य किसी को दंडित करना नहीं, बल्कि सहयोग और सम्मान की भावना से मराठी को आगे बढ़ाना है।