नेपाल के राम प्रसाद सुवेदी बने WTO की पर्यावरण और व्यापार समिति के नए चेयरपर्सन
सारांश
Key Takeaways
- राम प्रसाद सुवेदी को WTO की पर्यावरण और व्यापार समिति का चेयरपर्सन नियुक्त किया गया।
- यह निर्णय 11 मार्च को जिनेवा में हुआ।
- सुवेदी का कार्यकाल एक वर्ष का है।
- सीटीई स्थायी मंच है जो व्यापार नीतियों पर चर्चा करता है।
- नेपाल एलडीसी स्टेटस से ग्रेजुएट होने की तैयारी कर रहा है।
नई दिल्ली, १२ मार्च (राष्ट्र प्रेस)। संयुक्त राष्ट्र में नेपाल के स्थायी प्रतिनिधि राम प्रसाद सुवेदी को विश्व व्यापार संगठन की पर्यावरण और व्यापार समिति (सीटीई) का चेयरपर्सन नियुक्त किया गया है। यह निर्णय ११ मार्च को जिनेवा में आयोजित डब्ल्यूटीओ की जनरल काउंसिल की बैठक में लिया गया। नेपाल के विदेश मंत्रालय ने बताया है कि सुवेदी इस महत्वपूर्ण भूमिका को एक वर्ष के लिए निभाएंगे।
नेपाल के विदेश मंत्रालय ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर साझा किया, "हमें यह बताते हुए गर्व हो रहा है कि यूएन में नेपाल के स्थायी प्रतिनिधि राम प्रसाद सुवेदी को ११ मार्च २०२६ को जिनेवा में आयोजित जनरल काउंसिल की मीटिंग से एक साल के टर्म के लिए विश्व व्यापार संगठन की पर्यावरण और व्यापार समिति (सीटीई) का चेयरपर्सन चुना गया है।"
विदेश मंत्रालय ने आगे कहा कि सीटीई एक स्थायी मंच है जो डब्ल्यूटीओ के सदस्यों के बीच पर्यावरण पर व्यापार नीति तथा व्यापार पर पर्यावरण नीतियों के प्रभाव पर चर्चा को सुविधाजनक बनाने के लिए समर्पित है। यह सतत व्यापार और जलवायु संबंधी व्यापारिक उपायों को बढ़ावा देने के लिए भी प्रयासरत है।
यह नेतृत्व का अवसर नेपाल के लिए महत्वपूर्ण है क्योंकि देश एलडीसी स्टेटस से ग्रेजुएट होने की तैयारी कर रहा है और वैश्विक बाजार में अपने व्यापार के बेहतर एकीकरण के लिए सभी डब्ल्यूटीओ सदस्यों के साथ सहयोग कर रहा है।
सीटीई का मुख्य उद्देश्य यह समझना है कि व्यापार नीतियों का पर्यावरण पर क्या प्रभाव पड़ता है और पर्यावरण संबंधी नीतियों का अंतरराष्ट्रीय व्यापार पर क्या असर होता है। यह मंच पर्यावरण के अनुकूल और टिकाऊ व्यापार को बढ़ावा देने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
सीटीई के माध्यम से डब्ल्यूटीओ के सदस्य देश वैश्विक व्यापार और पर्यावरण के बीच संतुलन स्थापित करने के उपायों पर विचार-विमर्श करते हैं। इसमें विशेष रूप से ऐसे नीतिगत कदमों पर चर्चा की जाती है, जो आर्थिक विकास को प्रभावित किए बिना पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा दे सकें।