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एनएचआरसी ने दर्ज किया मामला: कश्मीरी शॉल विक्रेताओं और छात्रों पर हमलों की जांच होगी

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एनएचआरसी ने दर्ज किया मामला: कश्मीरी शॉल विक्रेताओं और छात्रों पर हमलों की जांच होगी

सारांश

एनएचआरसी ने जेकेएसए की शिकायत पर कश्मीरी शॉल विक्रेताओं और छात्रों के साथ हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, दिल्ली समेत 6 राज्यों में हुई कथित हिंसा और भेदभाव का मामला दर्ज किया। आयोग अब राज्य सरकारों से रिपोर्ट तलब करेगा और जवाबदेही तय करने की प्रक्रिया शुरू होगी।

मुख्य बातें

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने 13 जून को जेकेएसए की शिकायत पर कश्मीरी शॉल विक्रेताओं और छात्रों पर हमलों का मामला औपचारिक रूप से दर्ज किया।
शिकायत में हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड, दिल्ली, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में कथित उत्पीड़न की घटनाओं का उल्लेख है।
जेकेएसए के नेशनल कन्वीनर नासिर खुएहामी ने यह शिकायत वर्ष 2025 की शुरुआत में दर्ज कराई थी।
एनएचआरसी संबंधित राज्य सरकारों को नोटिस जारी कर एफआईआर की स्थिति, गिरफ्तारियों और सुरक्षा उपायों की विस्तृत रिपोर्ट माँगेगा।
जेकेएसए ने आयोग से शिकायतों पर कार्रवाई में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय करने का भी आग्रह किया है।

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने जम्मू-कश्मीर स्टूडेंट्स एसोसिएशन (जेकेएसए) की शिकायत पर कार्रवाई करते हुए देश के विभिन्न राज्यों में कश्मीरी शॉल विक्रेताओं और छात्रों के साथ कथित बदसलूकी, भेदभाव और शारीरिक हमलों का मामला औपचारिक रूप से दर्ज कर लिया है। आयोग ने शनिवार, 13 जून को इस मामले का संज्ञान लिया और संबंधित राज्य सरकारों से विस्तृत रिपोर्ट तलब करने की प्रक्रिया शुरू की।

शिकायत की पृष्ठभूमि

यह शिकायत जेकेएसए के नेशनल कन्वीनर नासिर खुएहामी ने इस वर्ष की शुरुआत में दर्ज कराई थी। शिकायत में हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड, दिल्ली, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में सामने आई घटनाओं का उल्लेख था। कथित तौर पर इन राज्यों में कश्मीरी शॉल विक्रेताओं पर हमले किए गए, उन्हें धमकाया गया, उनके व्यापार में बाधा डाली गई और कुछ मामलों में उन्हें उन इलाकों को छोड़ने पर मजबूर किया गया जहाँ वे दशकों से शांतिपूर्वक काम कर रहे थे।

इसके अलावा, कई कश्मीरी छात्रों ने रहने की जगह न मिलने, सांप्रदायिक आधार पर निशाना बनाए जाने, डराने-धमकाने और शारीरिक उत्पीड़न की घटनाओं की जानकारी दी। यह ऐसे समय में आया है जब विभिन्न राज्यों में जेकेएसए द्वारा बार-बार प्रशासन और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के समक्ष मामला उठाने के बावजूद प्रभावित लोग डर और अनिश्चितता के माहौल में जीने को मजबूर थे।

एनएचआरसी की कार्रवाई

आयोग ने शिकायत स्वीकार करते हुए पहले इसे डायरी नंबर दिया था, जिससे मामले के औपचारिक रूप से रिकॉर्ड में दर्ज होने की पुष्टि हुई। अब मामले का पंजीकरण होने के बाद एनएचआरसी संबंधित राज्य सरकारों को नोटिस जारी करेगा और प्रशासन तथा पुलिस अधिकारियों से विस्तृत रिपोर्ट माँगेगा।

इन रिपोर्टों में दर्ज एफआईआर की स्थिति, गिरफ्तारियाँ, आरोपियों के विरुद्ध की गई कार्रवाई, ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए अपनाए गए उपाय और प्रभावित राज्यों में कश्मीरी नागरिकों की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों का विवरण शामिल होने की उम्मीद है।

जेकेएसए की माँगें

जेकेएसए ने आयोग से आग्रह किया है कि इन घटनाओं की गहन जाँच की जाए और जम्मू-कश्मीर के बाहर रहने व काम करने वाले कश्मीरी नागरिकों की सुरक्षा, सम्मान, आजीविका और संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए ठोस उपाय सुझाए जाएँ। एसोसिएशन ने यह भी माँग की है कि जिन मामलों में शिकायतों पर कार्रवाई करने में लापरवाही हुई, उनमें जवाबदेही तय की जाए।

एसोसिएशन का स्पष्ट कहना है कि कश्मीरी भारत के समान नागरिक हैं और उन्हें संविधान के तहत गारंटीकृत सभी अधिकार और सुरक्षा पाने का पूरा हक है। एसोसिएशन के अनुसार, पहचान, क्षेत्र, धर्म या पहनावे के आधार पर किसी भी नागरिक के विरुद्ध हिंसा, भेदभाव या सामाजिक बहिष्कार एक लोकतांत्रिक और संवैधानिक समाज में स्वीकार्य नहीं है।

आगे क्या होगा

गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है जब देश के विभिन्न हिस्सों में कश्मीरी व्यापारियों और छात्रों के उत्पीड़न की खबरें सामने आई हों। एनएचआरसी में मामले के औपचारिक पंजीकरण के बाद अब यह देखना होगा कि संबंधित राज्य सरकारें आयोग के नोटिस पर क्या जवाब देती हैं और पीड़ितों को न्याय दिलाने की दिशा में क्या ठोस कदम उठाए जाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि संबंधित राज्य सरकारें नोटिस का जवाब देने में कितनी गंभीरता दिखाती हैं — अतीत में ऐसे मामलों में राज्यों की प्रतिक्रिया अक्सर औपचारिकता तक सीमित रही है। कश्मीरी व्यापारियों और छात्रों का उत्पीड़न कोई नई घटना नहीं है; यह एक दीर्घकालिक प्रवृत्ति है जो राष्ट्रीय एकता और संवैधानिक मूल्यों पर सीधा प्रश्नचिह्न लगाती है। आलोचकों का कहना है कि जब तक दोषियों के विरुद्ध ठोस आपराधिक कार्रवाई नहीं होती और राज्य पुलिस की जवाबदेही तय नहीं होती, तब तक आयोग की सिफारिशें महज कागज़ी कवायद बनकर रह जाती हैं।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

एनएचआरसी ने कश्मीरी शॉल विक्रेताओं के मामले में क्या कार्रवाई की है?
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने जेकेएसए की शिकायत पर कश्मीरी शॉल विक्रेताओं और छात्रों के साथ कथित हिंसा और भेदभाव का मामला 13 जून को औपचारिक रूप से दर्ज किया। आयोग अब संबंधित राज्य सरकारों को नोटिस जारी कर विस्तृत रिपोर्ट माँगेगा।
जेकेएसए की शिकायत में किन राज्यों का उल्लेख है?
शिकायत में हिमाचल प्रदेश, हरियाणा, उत्तराखंड, दिल्ली, महाराष्ट्र और उत्तर प्रदेश में हुई कथित घटनाओं का उल्लेख है। इन राज्यों में कश्मीरी व्यापारियों को धमकाने, उनका व्यापार बंद कराने और कुछ मामलों में इलाका छोड़ने पर मजबूर करने की बात कही गई है।
एनएचआरसी राज्य सरकारों से क्या जानकारी माँगेगा?
आयोग राज्य प्रशासन और पुलिस से दर्ज एफआईआर की स्थिति, की गई गिरफ्तारियाँ, आरोपियों के विरुद्ध कार्रवाई, भविष्य में ऐसी घटनाएँ रोकने के उपाय और कश्मीरी नागरिकों की सुरक्षा के लिए उठाए गए कदमों का विवरण माँगेगा।
जेकेएसए ने एनएचआरसी से क्या माँगें रखी हैं?
जेकेएसए ने आयोग से माँग की है कि घटनाओं की गहन जाँच हो, कश्मीरी नागरिकों के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा के लिए ठोस उपाय सुझाए जाएँ और शिकायतों पर कार्रवाई में लापरवाही बरतने वाले अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाए।
क्या इससे पहले भी कश्मीरी व्यापारियों के उत्पीड़न के मामले सामने आए हैं?
हाँ, जेकेएसए के अनुसार यह घटनाएँ बार-बार होती रही हैं और एसोसिएशन विभिन्न राज्य प्रशासनों के समक्ष पहले भी यह मुद्दा उठा चुकी है। बावजूद इसके, कई प्रभावित व्यापारियों को अपना कारोबार बंद कर घर लौटने पर मजबूर होना पड़ा।
राष्ट्र प्रेस
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