एनआईएसआर को समग्र स्वास्थ्य का वैश्विक केंद्र बनाने का संकल्प, प्रतापराव जाधव ने रखा रणनीतिक रोडमैप
सारांश
मुख्य बातें
आयुष मंत्रालय के केंद्रीय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) प्रतापराव जाधव ने 7 अगस्त 2026 को नई दिल्ली में राष्ट्रीय सोवा-रिग्पा संस्थान (एनआईएसआर) की दूसरी शासी निकाय बैठक की अध्यक्षता करते हुए इस संस्थान को समग्र स्वास्थ्य के एक वैश्विक केंद्र के रूप में विकसित करने का स्पष्ट संकल्प व्यक्त किया। उन्होंने भारतीय हिमालयी क्षेत्र (आईएचआर) में वैज्ञानिक अनुसंधान, अकादमिक उत्कृष्टता और संस्थागत विस्तार के माध्यम से सोवा-रिग्पा को सुदृढ़ करने के लिए एक विस्तृत रणनीतिक रोडमैप प्रस्तुत किया।
मुख्य घोषणाएँ और प्राथमिकताएँ
बैठक में मंत्री जाधव ने स्पष्ट किया कि एनआईएसआर का विकास अब केवल बुनियादी ढाँचे तक सीमित नहीं रहेगा। उन्होंने कहा, 'हमारी सर्वोपरि प्रतिबद्धता सोवा-रिग्पा को साक्ष्य-आधारित चिकित्सा विज्ञान प्रणाली के रूप में विश्व के समक्ष स्थापित करना है।' इस लक्ष्य की प्राप्ति के लिए उन्होंने एक स्वतंत्र अनुसंधान परिषद की स्थापना को पहला महत्त्वपूर्ण कदम बताया। साथ ही, अंतरराष्ट्रीय मानकों को अपनाकर सोवा-रिग्पा की पहुँच को उसकी परंपरागत भौगोलिक सीमाओं से परे विस्तारित करने पर बल दिया।
हिमालयी समुदायों से गहरे जुड़ाव का आह्वान
जाधव ने इस बात पर ज़ोर दिया कि एनआईएसआर केवल लद्दाख की संस्था नहीं, बल्कि समूचे भारतीय हिमालयी क्षेत्र की चिकित्सा विरासत का संरक्षक है। उन्होंने दुर्लभ औषधीय पौधों की सतत खेती, जैव-अन्वेषण, कृषि वानिकी और औषधीय जैव विविधता के संरक्षण पर विशेष ध्यान देने का आह्वान किया। उनके अनुसार, स्थानीय समुदायों को इस अमूल्य ज्ञान प्रणाली के संरक्षण और संवर्धन में समान भागीदार बनाया जाना चाहिए।
भोटी पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण
मंत्री ने सोवा-रिग्पा से संबंधित सैकड़ों भोटी भाषा की पांडुलिपियों को व्यवस्थित प्रतिलेखन और अनुवाद के ज़रिये संरक्षित करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने सुझाया कि प्रथम चरण में इन पांडुलिपियों का डिजिटलीकरण किया जाए और तत्पश्चात् अनुवाद कर इन्हें आम जनता व शोधकर्ताओं के लिए सुलभ बनाया जाए। यह कार्य ज्ञान भारतम मिशन अथवा किसी अन्य सक्षम संस्था के सहयोग से, आवश्यकतानुसार संस्कृति मंत्रालय की भागीदारी से भी किया जा सकता है।
आयुष सचिव और संस्थान निदेशक की भूमिका
आयुष मंत्रालय के सचिव वैद्य राजेश कोटेचा ने कहा कि मंत्रालय भारत के पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान को संरक्षित करने और आधुनिक वैज्ञानिक दृष्टिकोणों से आगे बढ़ाने के लिए सशक्त संस्थानों के निर्माण हेतु प्रतिबद्ध है। शासी निकाय ने संस्थान के निदेशक डॉ. पद्म गुरमेट को 2026 में पद्म श्री से सम्मानित किए जाने पर बधाई दी। डॉ. गुरमेट को भारत में प्राचीन सोवा-रिग्पा चिकित्सा पद्धति के पुनरुद्धार, संरक्षण और संस्थागतकरण में उनके अग्रणी योगदान के लिए यह सम्मान प्राप्त हुआ।
सोवा-रिग्पा: एक प्राचीन चिकित्सा परंपरा
सोवा-रिग्पा, जिसका भोटी भाषा में अर्थ है 'चिकित्सा का ज्ञान', विश्व की सबसे प्राचीन पारंपरिक चिकित्सा प्रणालियों में से एक है। भारत सरकार ने इसे आयुष कार्यक्रम के अंतर्गत मान्यता प्रदान की है। आमतौर पर आमची चिकित्सा प्रणाली के रूप में जानी जाने वाली यह पद्धति भारतीय हिमालयी क्षेत्र और कई पड़ोसी देशों में प्रचलित है। सदियों से ट्रांस-हिमालयी क्षेत्र में फली-फूली यह प्रणाली पारंपरिक चिकित्सा ज्ञान का एक समृद्ध भंडार है। आने वाले समय में एनआईएसआर की नीतिगत, शैक्षणिक और अनुसंधान पहलों की सफलता यह तय करेगी कि यह प्राचीन परंपरा वैश्विक स्वास्थ्य मानचित्र पर अपनी जगह बना पाती है या नहीं।