राष्ट्रीय हैंडलूम दिवस पर ओडिशा के राज्यपाल कम्भमपति की अपील — हफ्ते में एक बार हैंडलूम पहनें, बुनकरों को बचाएं
सारांश
मुख्य बातें
ओडिशा के राज्यपाल हरि बाबू कम्भमपति ने 7 अगस्त 2026 को भुवनेश्वर के आईडीसीओ प्रदर्शनी ग्राउंड में आयोजित 12वें राज्य-स्तरीय राष्ट्रीय हैंडलूम दिवस समारोह में ओडिशा के नागरिकों से आग्रह किया कि वे सप्ताह में कम से कम एक बार हैंडलूम वस्त्र पहनकर राज्य के हजारों बुनकर परिवारों की आजीविका को सहारा दें। उन्होंने हैंडलूम को केवल पारंपरिक उत्सवों तक सीमित न रखते हुए इसे दैनिक जीवन का अभिन्न अंग बनाने का आह्वान किया।
राज्यपाल का संदेश और अपील
राज्यपाल कम्भमपति ने सरकारी अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों, शिक्षकों, पेशेवरों और युवाओं से ओडिशा के हैंडलूम उत्पादों को प्राथमिकता देकर समाज में अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा, 'इस तरह का एक छोटा सा व्यक्तिगत संकल्प राज्य भर के हमारे हजारों बुनकर परिवारों की मदद के लिए एक शक्तिशाली आंदोलन बन सकता है।'
उन्होंने रेखांकित किया कि हाथ से बुने प्रत्येक वस्त्र में कौशल, लगन, पारिवारिक परंपरा और मानवीय रचनात्मकता की अनूठी कहानी समाहित होती है — जो मशीन-निर्मित उत्पादों में कभी नहीं मिलती।
हैंडलूम खरीद का व्यापक सामाजिक प्रभाव
राज्यपाल ने स्पष्ट किया कि जब कोई नागरिक हैंडलूम उत्पाद खरीदता है, तो वह केवल एक कपड़ा नहीं, बल्कि एक परिवार की आजीविका, ग्रामीण रोजगार, महिला सशक्तिकरण, पारंपरिक ज्ञान का संरक्षण और स्थानीय अर्थव्यवस्था की मजबूती — इन सबको एक साथ समर्थन देता है। यह ऐसे समय में आया है जब देश भर में हस्तशिल्प और हैंडलूम क्षेत्र मशीन-निर्मित और आयातित वस्त्रों की प्रतिस्पर्धा से जूझ रहा है।
ओडिशा की हैंडलूम विरासत
कम्भमपति ने ओडिशा की बुनाई परंपरा को कलिंग की प्राचीन समुद्री विरासत से जोड़ते हुए कहा कि यह राज्य की सांस्कृतिक पहचान की आत्मा है। उन्होंने विश्व स्तर पर पहचाने जाने वाले ओडिशा के प्रमुख हैंडलूम उत्पादों का उल्लेख किया — संबलपुरी बंधा, ओडिशा इकत, बोमकाई, खंडुआ, कोटपाड, हबासपुरी, बेरहामपुर पट्टा और गोपालपुर टसर — जिन्होंने अपने अनूठे डिजाइन और बेजोड़ कारीगरी से अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्थान बनाया है।
गौरतलब है कि राष्ट्रीय हैंडलूम दिवस हर वर्ष 7 अगस्त को मनाया जाता है, जो 1905 के स्वदेशी आंदोलन की स्मृति में है — जब हाथ से बुने वस्त्र आत्मनिर्भरता और राष्ट्रीय गौरव के प्रतीक बने थे।
इस वर्ष की थीम और क्षेत्र को मजबूत करने की पहल
इस वर्ष की थीम 'हर किसी की जिंदगी में हथकरघा का एक हिस्सा' के अनुरूप राज्यपाल ने हैंडलूम को कपड़ों, गृह-सज्जा सामग्री और अन्य उत्पादों के माध्यम से रोजमर्रा की जिंदगी में शामिल करने पर बल दिया। उन्होंने डिजाइन में नवाचार, डिजिटल मार्केटिंग, पर्यटन से जुड़ाव, संस्थागत सहयोग और प्रौद्योगिकी-आधारित उत्पाद ट्रेसिबिलिटी के जरिए इस क्षेत्र को सुदृढ़ करने के प्रयासों की सराहना की।
नई परियोजनाओं का शुभारंभ
समारोह के दौरान 'कुसुम — खोए हुए फैब्रिक का पुनरुद्धार' और 'करुणा सिल्क' पर वृत्तचित्र प्रदर्शित किए गए। जगतसिंहपुर में कास्ता हैंडलूम भवन तथा जाजपुर के सुकिंदा में ओएमबीएडीसी के अंतर्गत तसर सिल्क पार्क फेज-I और तसर फैसिलिटी सेंटर की आधारशिला रखी गई। इसके अतिरिक्त, खोर्धा के राउतपाड़ा में फैब्रिक कैलेंडरिंग यूनिट का वर्चुअल उद्घाटन किया गया। राज्यपाल ने स्टेट हैंडलूम अवॉर्ड विजेताओं को बधाई देते हुए बुनकरों को अमूल्य सांस्कृतिक धरोहर का संरक्षक बताया।
राज्यपाल के इस आह्वान के साथ उम्मीद जताई जा रही है कि ओडिशा का हथकरघा क्षेत्र वैश्विक मंच पर राज्य की पहचान, सृजनशीलता और उत्कृष्टता का प्रतीक बना रहेगा।