ओडिशा: तलछुआ थाने में महिला से मारपीट, सिंदूर पोंछने के आरोप में IIC संध्यारानी जेना निलंबित
सारांश
मुख्य बातें
ओडिशा के केंद्रपाड़ा जिले में तलछुआ मरीन पुलिस स्टेशन की प्रभारी अधिकारी (IIC) संध्यारानी जेना को 28 मई 2026 को निलंबित कर दिया गया। आरोप है कि उन्होंने एक विवाहित महिला और उसके बेटे के साथ थाने के भीतर मारपीट की और महिला के माथे से सिंदूर पोंछ दिया — एक कृत्य जिसे हिंदू परंपरा में गहरा अपमान माना जाता है। ओडिशा के पुलिस महानिदेशक वाई.बी. खुरानिया ने सीसीटीवी फुटेज की जांच के बाद यह निलंबन आदेश जारी किया।
घटनाक्रम: क्या हुआ थाने में
पीड़िता अन्नपूर्णा मंडल के अनुसार, वह सोमवार शाम लगभग 6 बजे अपने बेटे के साथ घरेलू विवाद की शिकायत दर्ज कराने तलछुआ मरीन पुलिस स्टेशन पहुँची थीं। शिकायत सुनने के बजाय IIC संध्यारानी जेना ने कथित तौर पर महिला को गालियाँ दीं, बाल पकड़कर मारा और कपड़े फाड़ने की कोशिश की। इसके अलावा, उनके माथे से सिंदूर पोंछ दिया गया।
महिला के बेटे को कथित तौर पर थाने के टॉयलेट में ले जाकर एक कॉन्स्टेबल के साथ मिलकर लात-घूंसों और डंडों से पीटा गया। उसका गला दबाकर धमकी दी गई कि यदि किसी को बताया तो माँ-बेटे दोनों को जान से मार दिया जाएगा। पीड़ितों से खाली कागजों पर हस्ताक्षर भी कराए गए और उन्हें रात लगभग 11:40 बजे छोड़ा गया।
शिकायत और चिकित्सीय जाँच
अगले दिन अन्नपूर्णा मंडल ने राजनगर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में उपचार कराया। इसके बाद उन्होंने सब-डिविजनल पुलिस अधिकारी (SDPO) सुखंत पात्रा के समक्ष औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। शिकायत मिलते ही केंद्रपाड़ा एसपी ने बुधवार को थाने का दौरा किया और सीसीटीवी फुटेज खंगाली।
निलंबन और विभागीय कार्रवाई
सीसीटीवी फुटेज की जांच के आधार पर पुलिस महानिदेशक वाई.बी. खुरानिया ने IIC संध्यारानी जेना को 'गंभीर कदाचार और कर्तव्य में लापरवाही' के आरोप में निलंबित कर दिया। आदेश के अनुसार, उनके विरुद्ध विभागीय जाँच की जाएगी और उन्हें केंद्रीय रेंज आईजी के अधीन रखा जाएगा।
आरोपी अधिकारी का पक्ष
निलंबित IIC संध्यारानी जेना ने सभी आरोपों को गलत बताया है। उनका कहना है कि थाने में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज ही सच्चाई सामने लाएगी। उल्लेखनीय है कि यही फुटेज उनके निलंबन का आधार बनी है — यह विरोधाभास जाँच में अहम साबित होगा।
आगे क्या होगा
गौरतलब है कि यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब पुलिस हिरासत में महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार की घटनाएँ राष्ट्रीय स्तर पर बहस का विषय बनी हुई हैं। विभागीय जाँच के नतीजे और सीसीटीवी फुटेज का विश्लेषण इस मामले की दिशा तय करेंगे। संबंधित कॉन्स्टेबल के खिलाफ भी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता।