31 जुलाई 2026
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1 लाख मछली पकड़ने वाले जहाजों में लगेंगे ISRO के ट्रांसपोंडर, ₹364 करोड़ की VCSS योजना को मंजूरी

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1 लाख मछली पकड़ने वाले जहाजों में लगेंगे ISRO के ट्रांसपोंडर, ₹364 करोड़ की VCSS योजना को मंजूरी

सारांश

1 लाख मछली पकड़ने वाले जहाजों में ISRO निर्मित ट्रांसपोंडर — यह सिर्फ तकनीक नहीं, बल्कि उन हजारों मछुआरों के लिए जीवनरक्षक कवच है जो हर साल खराब मौसम या सीमा उल्लंघन के कारण खतरे में पड़ जाते हैं। ₹364 करोड़ की VCSS योजना को मंजूरी मिल गई है।

मुख्य बातें

केंद्रीय मत्स्य पालन विभाग ने 31 जुलाई 2026 को ₹364 करोड़ की VCSS योजना को मंजूरी दी।
1 लाख समुद्री मछली पकड़ने वाले जहाजों में इसरो निर्मित ट्रांसपोंडर लगाए जाएंगे।
पात्र मछुआरों को ट्रांसपोंडर निःशुल्क मिलेंगे; लागत केंद्र-राज्य 60:40 अनुपात में साझा होगी।
जियो-फेंसिंग आधारित स्वचालित सीमा-पार अलर्ट से पड़ोसी देशों की सीमा में अनजाने प्रवेश पर रोक लगेगी।
423 फिश लैंडिंग सेंटरों पर अवसंरचना विकास; सर्वाधिक 350 FLC आंध्र प्रदेश में।
'नभमित्र' एप क्षेत्रीय भाषाओं में SOS अलर्ट, मौसम चेतावनी और PFZ एडवाइजरी देगा।

केंद्रीय मत्स्य पालन विभाग ने 31 जुलाई 2026 को प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) के अंतर्गत वेसल कम्युनिकेशन एंड सपोर्ट सिस्टम (VCSS) के राष्ट्रव्यापी क्रियान्वयन को हरी झंडी दे दी है। इस परियोजना के तहत देश के 1 लाख समुद्री मछली पकड़ने वाले जहाजों में ट्रांसपोंडर लगाए जाएंगे, जिसकी कुल लागत ₹364 करोड़ है। यह प्रणाली मछुआरों को खराब मौसम में सुरक्षित रखने के साथ-साथ उन्हें पड़ोसी देशों की समुद्री सीमा में अनजाने में प्रवेश करने से भी रोकेगी।

VCSS क्या है और कैसे काम करेगा

भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) ने VCSS को पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से विकसित किया है। यह प्रणाली समुद्री जहाजों की निगरानी, नियंत्रण और संचार के लिए उपग्रह आधारित नेटवर्क का उपयोग करती है। ट्रांसपोंडर के माध्यम से बचाव दल किसी भी जहाज की सटीक स्थिति तुरंत जान सकेंगे, जो विशेष रूप से चक्रवात या तूफान की स्थिति में जीवनरक्षक साबित हो सकता है।

इस परियोजना में ट्रांसपोंडर लगाने के अतिरिक्त आवश्यक अर्थ स्टेशन और संबंधित संचार अवसंरचना का निर्माण भी शामिल है। साथ ही, क्षेत्रीय भाषाओं में 'नभमित्र' मोबाइल एप्लिकेशन विकसित किया जाएगा, जो मछुआरों को उनकी अपनी भाषा में सेवाएं देगा।

नभमित्र एप की विशेषताएं

इसरो द्वारा निर्मित 'नभमित्र' एप्लिकेशन मछुआरों के लिए एक संपूर्ण डिजिटल सहायक की भूमिका निभाएगा। इसमें शामिल प्रमुख सुविधाएं इस प्रकार हैं — समय-समय पर पोजीशन रिपोर्टिंग, टू-वे मैसेजिंग, इमरजेंसी/SOS अलर्ट, जियो-फेंसिंग पर आधारित स्वचालित सीमा-पार अलर्ट, मौसम और चक्रवात की चेतावनियां, पोटेंशियल फिशिंग जोन (PFZ) एडवाइजरी, नेविगेशन सहायता और ई-टोकन/ट्रिप डिक्लेरेशन सिस्टम

जियो-फेंसिंग आधारित अलर्ट प्रणाली विशेष रूप से महत्वपूर्ण है — यह मछुआरों को किसी पड़ोसी देश की समुद्री सीमा के निकट पहुंचने पर पहले से ही चेतावनी देगी, जिससे अनजाने में सीमा उल्लंघन की घटनाओं में कमी आ सकती है।

लागत साझेदारी और लाभार्थी

योजना के अंतर्गत पात्र मछुआरों को ट्रांसपोंडर निःशुल्क उपलब्ध कराए जाएंगे। वित्त पोषण का ढांचा केंद्र और राज्यों के बीच 60:40 के अनुपात पर आधारित है। केंद्रशासित प्रदेशों को 100 प्रतिशत केंद्रीय सहायता प्रदान की जाएगी।

देशभर में 1,547 अधिसूचित केंद्रों में से 423 फिश लैंडिंग सेंटरों (FLC) पर अवसंरचना विकास की योजना बनाई गई है। इन केंद्रों का चयन जहाजों की संख्या, मछुआरों की निर्भरता, मछली पकड़ने की मात्रा, बाजार और प्रसंस्करण केंद्रों से निकटता तथा तकनीकी-वित्तीय व्यवहार्यता के आधार पर किया जाएगा।

राज्यवार स्थिति

सरकारी आंकड़ों के अनुसार, सर्वाधिक 350 FLC आंध्र प्रदेश में हैं, इसके बाद तमिलनाडु में 301 और केरल में 204 FLC हैं। ये तीनों राज्य भारत के सबसे बड़े समुद्री मत्स्य उत्पादक हैं और इस योजना से सर्वाधिक लाभान्वित होंगे।

आगे की राह

VCSS का राष्ट्रव्यापी क्रियान्वयन भारत के लाखों तटीय मछुआरों की सुरक्षा और आजीविका दोनों को सुदृढ़ करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। यह ऐसे समय में आया है जब समुद्र में मछुआरों की सुरक्षा और पड़ोसी देशों द्वारा उनकी गिरफ्तारी की घटनाएं लंबे समय से चिंता का विषय रही हैं। अब देखना यह होगा कि क्रियान्वयन की गति कितनी तेज रहती है और तटीय राज्य इस अवसंरचना को कितनी जल्दी खड़ा कर पाते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली परीक्षा क्रियान्वयन की होगी — खासकर तब, जब तटीय राज्यों में अवसंरचना विकास की गति ऐतिहासिक रूप से धीमी रही है। जियो-फेंसिंग अलर्ट उन मछुआरों के लिए संभावित रूप से जीवनरक्षक है जो श्रीलंका या पाकिस्तान की नौसेनाओं द्वारा गिरफ्तार किए जाते रहे हैं, लेकिन यह तकनीक तभी काम करेगी जब मछुआरे उपकरण का उपयोग करना सीखें और नेटवर्क कवरेज गहरे समुद्र तक विश्वसनीय हो। 60:40 लागत-साझेदारी मॉडल छोटे राज्यों पर वित्तीय दबाव डाल सकता है, और यह स्पष्ट नहीं है कि क्रियान्वयन की समयसीमा क्या है।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

VCSS ट्रांसपोंडर योजना क्या है और इसे किसने मंजूरी दी?
VCSS (वेसल कम्युनिकेशन एंड सपोर्ट सिस्टम) एक उपग्रह आधारित प्रणाली है जिसे इसरो ने स्वदेशी रूप से विकसित किया है। केंद्रीय मत्स्य पालन विभाग ने 31 जुलाई 2026 को PMMSY के तहत इसके राष्ट्रव्यापी क्रियान्वयन को ₹364 करोड़ की लागत से मंजूरी दी है।
मछुआरों को ट्रांसपोंडर के लिए कितना खर्च करना होगा?
पात्र मछुआरों को ट्रांसपोंडर पूरी तरह निःशुल्क दिए जाएंगे। योजना की लागत केंद्र और राज्यों के बीच 60:40 के अनुपात में साझा होगी, जबकि केंद्रशासित प्रदेशों को 100 प्रतिशत केंद्रीय सहायता मिलेगी।
नभमित्र एप मछुआरों की कैसे मदद करेगा?
इसरो निर्मित 'नभमित्र' एप क्षेत्रीय भाषाओं में उपलब्ध होगा और इसमें SOS अलर्ट, मौसम व चक्रवात चेतावनी, जियो-फेंसिंग आधारित सीमा-पार अलर्ट, पोटेंशियल फिशिंग जोन एडवाइजरी और ट्रिप डिक्लेरेशन सिस्टम जैसी सुविधाएं होंगी।
इस योजना से किन राज्यों को सबसे ज्यादा फायदा होगा?
सरकारी आंकड़ों के अनुसार आंध्र प्रदेश में सर्वाधिक 350 फिश लैंडिंग सेंटर हैं, इसके बाद तमिलनाडु में 301 और केरल में 204 हैं। ये तीनों राज्य इस योजना के प्रमुख लाभार्थी होंगे।
जियो-फेंसिंग अलर्ट से सीमा उल्लंघन कैसे रुकेगा?
जियो-फेंसिंग प्रणाली पड़ोसी देशों की समुद्री सीमा के निकट पहुंचने पर मछुआरों को स्वचालित रूप से अलर्ट भेजती है, जिससे वे समय रहते वापस लौट सकते हैं। यह उन घटनाओं को कम करने में सहायक होगा जिनमें भारतीय मछुआरे अनजाने में पड़ोसी देशों की सीमा में प्रवेश कर गिरफ्तार हो जाते हैं।
राष्ट्र प्रेस
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