ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ: लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई बोले — आतंकियों का कोई ठिकाना अब सुरक्षित नहीं
सारांश
मुख्य बातें
भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर स्पष्ट संदेश दिया है कि यह अभियान भारत की सामरिक यात्रा का एक निर्णायक मोड़ था। लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने बताया कि नई दिल्ली से संचालित इस अभियान में नियंत्रण रेखा तथा पाकिस्तान के साथ लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा के पार स्थित आतंकवादी ढाँचों को निशाना बनाया गया — और अब आतंकियों का कोई भी ठिकाना सुरक्षित नहीं बचा है।
अभियान की रणनीतिक पृष्ठभूमि
सेना के अनुसार ऑपरेशन सिंदूर को अत्यंत सोच-समझकर और स्पष्ट रणनीतिक दृष्टि के साथ शुरू किया गया था। लेफ्टिनेंट जनरल घई ने बताया कि हमले का समय पूरी तरह सटीक था और इस अभियान ने पूर्ण आश्चर्य उत्पन्न किया। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर तथा पाकिस्तान के भीतर स्थापित आतंकवादी ठिकानों को भारी क्षति पहुँचाई गई। इसके साथ ही पाकिस्तान द्वारा भारत के सैन्य ढाँचे और ठिकानों को निशाना बनाने के सभी प्रयास एक सुविचारित और मज़बूत वायु रक्षा संरचना के कारण विफल हो गए।
स्वदेशी रक्षा क्षमता का प्रदर्शन
इस अभियान ने भारत की आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित किया। उपयोग किए गए हथियार प्रणालियों, गोला-बारूद, रॉकेट, मिसाइलों, सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों का बड़ा हिस्सा भारत में ही विकसित और निर्मित था। ब्रह्मोस, आकाश, उन्नत निगरानी एवं लक्ष्यीकरण प्रणालियों के साथ स्वदेशी गोला-बारूद और स्पेयर पार्ट्स ने निर्णायक भूमिका निभाई। लेफ्टिनेंट जनरल घई ने कहा,