ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ: लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई बोले — आतंकियों का कोई ठिकाना अब सुरक्षित नहीं

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ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ: लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई बोले — आतंकियों का कोई ठिकाना अब सुरक्षित नहीं

सारांश

ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर भारतीय सेना ने साफ़ कहा — यह अभियान एक अंत नहीं, एक नई शुरुआत थी। 9 सटीक प्रहारों, 65% से अधिक स्वदेशी हथियारों और तीनों सेनाओं के समन्वय ने इसे वैश्विक 'गोल्ड स्टैंडर्ड' बनाया। संदेश स्पष्ट है — आतंकियों का कोई ठिकाना अब सुरक्षित नहीं।

मुख्य बातें

ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने अभियान की विस्तृत समीक्षा प्रस्तुत की।
कुल 9 स्टैंडऑफ प्रिसीजन स्ट्राइक की गईं — 7 भारतीय थल सेना और 2 भारतीय वायु सेना द्वारा।
65% से अधिक रक्षा उपकरण स्वदेशी; ब्रह्मोस , आकाश और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों ने निर्णायक भूमिका निभाई।
तीनों सेनाओं — थल, वायु और नौसेना — का एकीकृत संयुक्त अभियान; साझा खुफिया और वास्तविक समय निर्णय क्षमता।
पाकिस्तान के सभी जवाबी हमले भारत की वायु रक्षा संरचना के कारण विफल हुए।
सेना ने इसे भविष्य के बहु-एजेंसी अभियानों के लिए आदर्श मॉडल घोषित किया।

भारतीय सेना ने ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ पर स्पष्ट संदेश दिया है कि यह अभियान भारत की सामरिक यात्रा का एक निर्णायक मोड़ था। लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई ने बताया कि नई दिल्ली से संचालित इस अभियान में नियंत्रण रेखा तथा पाकिस्तान के साथ लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा के पार स्थित आतंकवादी ढाँचों को निशाना बनाया गया — और अब आतंकियों का कोई भी ठिकाना सुरक्षित नहीं बचा है।

अभियान की रणनीतिक पृष्ठभूमि

सेना के अनुसार ऑपरेशन सिंदूर को अत्यंत सोच-समझकर और स्पष्ट रणनीतिक दृष्टि के साथ शुरू किया गया था। लेफ्टिनेंट जनरल घई ने बताया कि हमले का समय पूरी तरह सटीक था और इस अभियान ने पूर्ण आश्चर्य उत्पन्न किया। पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर तथा पाकिस्तान के भीतर स्थापित आतंकवादी ठिकानों को भारी क्षति पहुँचाई गई। इसके साथ ही पाकिस्तान द्वारा भारत के सैन्य ढाँचे और ठिकानों को निशाना बनाने के सभी प्रयास एक सुविचारित और मज़बूत वायु रक्षा संरचना के कारण विफल हो गए।

स्वदेशी रक्षा क्षमता का प्रदर्शन

इस अभियान ने भारत की आत्मनिर्भर रक्षा क्षमता को वैश्विक मंच पर प्रदर्शित किया। उपयोग किए गए हथियार प्रणालियों, गोला-बारूद, रॉकेट, मिसाइलों, सेंसर और इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियों का बड़ा हिस्सा भारत में ही विकसित और निर्मित था। ब्रह्मोस, आकाश, उन्नत निगरानी एवं लक्ष्यीकरण प्रणालियों के साथ स्वदेशी गोला-बारूद और स्पेयर पार्ट्स ने निर्णायक भूमिका निभाई। लेफ्टिनेंट जनरल घई ने कहा,

संपादकीय दृष्टिकोण

सहायक क्षति और नागरिक प्रभाव के स्वतंत्र सत्यापन का अभाव इस आख्यान को एकपक्षीय बनाता है। असली परीक्षा यह होगी कि क्या यह 'आदर्श मॉडल' दीर्घकालिक आतंकवाद-रोधी नीति में बदल पाता है या केवल एक सफल अभियान की स्मृति बनकर रह जाता है।
RashtraPress
13 मई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ऑपरेशन सिंदूर क्या था और इसे क्यों चलाया गया?
ऑपरेशन सिंदूर भारतीय सेना का एक बहु-आयामी सैन्य अभियान था, जिसमें नियंत्रण रेखा और पाकिस्तान के साथ लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा के पार स्थित आतंकवादी ढाँचों को निशाना बनाया गया। इसका उद्देश्य आतंकवादी तंत्र को नष्ट करना, दुश्मन की योजना क्षमता को बाधित करना और भविष्य की आक्रामकता को रोकना था।
ऑपरेशन सिंदूर में कितनी स्ट्राइक की गईं?
लेफ्टिनेंट जनरल राजीव घई के अनुसार कुल 9 स्टैंडऑफ प्रिसीजन स्ट्राइक की गईं — 7 भारतीय थल सेना द्वारा और 2 भारतीय वायु सेना द्वारा। सभी स्ट्राइक अत्यंत सटीकता और समन्वय के साथ अंजाम दी गईं।
ऑपरेशन सिंदूर में किन स्वदेशी हथियारों का उपयोग हुआ?
इस अभियान में ब्रह्मोस मिसाइल, आकाश वायु रक्षा प्रणाली, उन्नत निगरानी एवं लक्ष्यीकरण प्रणालियाँ, इलेक्ट्रॉनिक युद्ध प्रणालियाँ और स्वदेशी गोला-बारूद का उपयोग किया गया। सेना के अनुसार भारत के 65% से अधिक रक्षा उपकरण अब देश में ही निर्मित हो रहे हैं।
ऑपरेशन सिंदूर को 'गोल्ड स्टैंडर्ड' क्यों कहा जा रहा है?
लेफ्टिनेंट जनरल घई के अनुसार इस अभियान में सरकार, खुफिया एजेंसियों, साइबर इकाइयों, अर्धसैनिक बलों और तीनों सेनाओं ने मिलकर कार्य किया, जिससे यह अभियान सैन्य और रणनीतिक दोनों दृष्टियों से वैश्विक स्तर पर एक आदर्श उदाहरण बन गया। इसे भविष्य के बहु-एजेंसी अभियानों का मॉडल माना जा रहा है।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत की आतंकवाद नीति क्या है?
सेना के अनुसार ऑपरेशन सिंदूर एक अंत नहीं बल्कि शुरुआत थी। भारत की आतंकवाद के विरुद्ध लड़ाई जारी रहेगी और देश अपनी संप्रभुता तथा नागरिकों की सुरक्षा दृढ़ता, पेशेवर क्षमता और रणनीतिक संयम के साथ करता रहेगा।
राष्ट्र प्रेस
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