ओवैसी का आरोप: गोशामहल में 'फॉर्म-7' से 122 मुस्लिम वोटरों के नाम हटाने की साजिश
सारांश
मुख्य बातें
ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने 6 अक्टूबर 2026 को आरोप लगाया कि तेलंगाना के गोशामहल विधानसभा क्षेत्र में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के दौरान 'फॉर्म-7' का व्यापक दुरुपयोग करते हुए बड़े पैमाने पर मुस्लिम मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाने की सुनियोजित कोशिश की जा रही है। ओवैसी ने तेलंगाना के मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) सी. सुदर्शन रेड्डी को औपचारिक शिकायत पत्र सौंपते हुए तत्काल कार्रवाई की माँग की।
मुख्य आरोप: 122 आवेदन एक ही व्यक्ति ने किए
ओवैसी ने सीईओ को सौंपे पत्र में बताया कि पोलिंग स्टेशन नंबर 28 पर थुडुमु जनार्दन नामक व्यक्ति ने एकमुश्त 122 'फॉर्म-7' आवेदन जमा किए। उनके अनुसार, इन फॉर्मों में जिन वोटरों के नाम हटाने की माँग की गई थी, वे पहले से मुद्रित (pre-printed) थे, जबकि आवेदक ने अपना नाम और संपर्क नंबर स्वयं भरा था। ओवैसी ने दावा किया, 'जाँच में सामने आया कि यह आवेदक भारतीय जनता पार्टी (BJP) का समर्थक है।'
पोलिंग स्टेशन नंबर 173 पर भी करीब 30 'फॉर्म-7' आवेदन ऐसे पाए गए जिनमें आवेदक का नाम ही नहीं था, जबकि लक्षित मतदाताओं के नाम दर्ज थे। ओवैसी ने कहा कि दोनों बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) ने इन फॉर्मों को अस्वीकार कर दिया और उनकी ईमानदारी की सराहना की।
जिन 122 वोटरों को निशाना बनाया गया, वे सभी मुसलमान
ओवैसी ने AIMIM मुख्यालय दारुस्सलाम में मीडिया को बताया कि जिन 122 वोटरों के नाम हटाने के लिए आवेदन किए गए, वे सभी 2022 और 2026 की वोटर लिस्ट तथा हाल ही में जारी ड्राफ्ट रोल में भी दर्ज थे। उनमें से कुछ को नोटिस मिले थे और वे सुनवाई में उपस्थित भी हुए थे। उन्होंने सवाल उठाया, 'ये सभी 122 वोटर मुसलमान हैं। 'फॉर्म-7' के लिए आवेदन कौन कर रहा है? मुसलमानों के प्रति यह नफरत क्यों है?'
चुनाव आयोग से सख्त कार्रवाई की माँग
ओवैसी ने सीईओ से अपील की कि 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950' की धारा 31 के तहत गलत 'फॉर्म-7' दाखिल करने वालों के विरुद्ध आपराधिक कार्रवाई हो। उन्होंने भारत के चुनाव आयोग (ECI) से भी माँग की कि वह किसी एक समुदाय को निशाना बनाने की इस कथित कोशिश पर सख्त रुख अपनाए।
उन्होंने आगाह किया कि जहाँ BLO की सतर्कता के कारण गोशामहल में इन प्रयासों को नाकाम किया जा सका, वहीं तेलंगाना के अन्य हिस्सों में इसी तरह का दुरुपयोग बिना किसी की नज़र में आए हो सकता है।
SIR को 'पिछले दरवाजे से NRC' बताया
ओवैसी ने दोहराया कि चल रहा विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान मूलतः गलत है। उन्होंने कहा, 'यह पिछले दरवाजे से लाया गया NRC है।' यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में INDIA गठबंधन के नेताओं ने भी SIR को लेकर चिंता जताई है और दिल्ली में ECI कार्यालय तक विरोध मार्च निकाला।
हालाँकि ओवैसी ने स्पष्ट किया कि वे INDIA गठबंधन के उस मार्च में शामिल नहीं हुए, क्योंकि उनकी पार्टी उस गठबंधन का हिस्सा नहीं है।
मुख्य चुनाव आयुक्त चयन प्रक्रिया पर भी उठाए सवाल
ओवैसी ने इस अवसर पर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) की नियुक्ति प्रक्रिया को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि मौजूदा प्रक्रिया पूरी तरह कार्यपालिका के पक्ष में झुकी हुई है और इसे बदलने की ज़रूरत है। उन्होंने पुरानी तीन-सदस्यीय पैनल व्यवस्था — जिसमें प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश शामिल थे — को बहाल करने की माँग दोहराई।
गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब SIR के दौरान मतदाता सूची में हेरफेर के आरोप सामने आए हैं; विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया है। आने वाले दिनों में ECI की प्रतिक्रिया और धारा 31 के तहत संभावित कार्रवाई पर सबकी नज़रें टिकी रहेंगी।