6 अक्टूबर 2026
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ओवैसी का आरोप: गोशामहल में 'फॉर्म-7' से 122 मुस्लिम वोटरों के नाम हटाने की साजिश

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ओवैसी का आरोप: गोशामहल में 'फॉर्म-7' से 122 मुस्लिम वोटरों के नाम हटाने की साजिश

सारांश

हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने गोशामहल विधानसभा क्षेत्र में 'फॉर्म-7' के ज़रिए एकमुश्त 122 मुस्लिम वोटरों के नाम हटाने की सुनियोजित कोशिश का आरोप लगाया है। उन्होंने तेलंगाना CEO को शिकायत सौंपी और ECI से 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम' की धारा 31 के तहत कार्रवाई की माँग की।

मुख्य बातें

AIMIM अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी ने 6 अक्टूबर 2026 को तेलंगाना CEO सी.
सुदर्शन रेड्डी को औपचारिक शिकायत पत्र सौंपा।
पोलिंग स्टेशन नंबर 28 पर एक ही व्यक्ति — थुडुमु जनार्दन — ने 122 'फॉर्म-7' आवेदन जमा किए; ओवैसी ने उसे BJP समर्थक बताया।
जिन सभी 122 वोटरों को निशाना बनाया गया, वे मुसलमान हैं और 2022 व 2026 की वोटर लिस्ट में दर्ज थे।
दोनों BLO ने संदिग्ध फॉर्म अस्वीकार किए; ओवैसी ने उनकी ईमानदारी की सराहना की।
ओवैसी ने ECI से 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950' की धारा 31 के तहत दोषियों पर सख्त कार्रवाई की माँग की।
ओवैसी ने SIR को 'पिछले दरवाजे से NRC' बताया और CEC चयन में न्यायपालिका की भागीदारी बहाल करने की माँग दोहराई।

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के अध्यक्ष और हैदराबाद के सांसद असदुद्दीन ओवैसी ने 6 अक्टूबर 2026 को आरोप लगाया कि तेलंगाना के गोशामहल विधानसभा क्षेत्र में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान के दौरान 'फॉर्म-7' का व्यापक दुरुपयोग करते हुए बड़े पैमाने पर मुस्लिम मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से हटाने की सुनियोजित कोशिश की जा रही है। ओवैसी ने तेलंगाना के मुख्य चुनाव अधिकारी (CEO) सी. सुदर्शन रेड्डी को औपचारिक शिकायत पत्र सौंपते हुए तत्काल कार्रवाई की माँग की।

मुख्य आरोप: 122 आवेदन एक ही व्यक्ति ने किए

ओवैसी ने सीईओ को सौंपे पत्र में बताया कि पोलिंग स्टेशन नंबर 28 पर थुडुमु जनार्दन नामक व्यक्ति ने एकमुश्त 122 'फॉर्म-7' आवेदन जमा किए। उनके अनुसार, इन फॉर्मों में जिन वोटरों के नाम हटाने की माँग की गई थी, वे पहले से मुद्रित (pre-printed) थे, जबकि आवेदक ने अपना नाम और संपर्क नंबर स्वयं भरा था। ओवैसी ने दावा किया, 'जाँच में सामने आया कि यह आवेदक भारतीय जनता पार्टी (BJP) का समर्थक है।'

पोलिंग स्टेशन नंबर 173 पर भी करीब 30 'फॉर्म-7' आवेदन ऐसे पाए गए जिनमें आवेदक का नाम ही नहीं था, जबकि लक्षित मतदाताओं के नाम दर्ज थे। ओवैसी ने कहा कि दोनों बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) ने इन फॉर्मों को अस्वीकार कर दिया और उनकी ईमानदारी की सराहना की।

जिन 122 वोटरों को निशाना बनाया गया, वे सभी मुसलमान

ओवैसी ने AIMIM मुख्यालय दारुस्सलाम में मीडिया को बताया कि जिन 122 वोटरों के नाम हटाने के लिए आवेदन किए गए, वे सभी 2022 और 2026 की वोटर लिस्ट तथा हाल ही में जारी ड्राफ्ट रोल में भी दर्ज थे। उनमें से कुछ को नोटिस मिले थे और वे सुनवाई में उपस्थित भी हुए थे। उन्होंने सवाल उठाया, 'ये सभी 122 वोटर मुसलमान हैं। 'फॉर्म-7' के लिए आवेदन कौन कर रहा है? मुसलमानों के प्रति यह नफरत क्यों है?'

चुनाव आयोग से सख्त कार्रवाई की माँग

ओवैसी ने सीईओ से अपील की कि 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950' की धारा 31 के तहत गलत 'फॉर्म-7' दाखिल करने वालों के विरुद्ध आपराधिक कार्रवाई हो। उन्होंने भारत के चुनाव आयोग (ECI) से भी माँग की कि वह किसी एक समुदाय को निशाना बनाने की इस कथित कोशिश पर सख्त रुख अपनाए।

उन्होंने आगाह किया कि जहाँ BLO की सतर्कता के कारण गोशामहल में इन प्रयासों को नाकाम किया जा सका, वहीं तेलंगाना के अन्य हिस्सों में इसी तरह का दुरुपयोग बिना किसी की नज़र में आए हो सकता है।

SIR को 'पिछले दरवाजे से NRC' बताया

ओवैसी ने दोहराया कि चल रहा विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) अभियान मूलतः गलत है। उन्होंने कहा, 'यह पिछले दरवाजे से लाया गया NRC है।' यह ऐसे समय में आया है जब देशभर में INDIA गठबंधन के नेताओं ने भी SIR को लेकर चिंता जताई है और दिल्ली में ECI कार्यालय तक विरोध मार्च निकाला।

हालाँकि ओवैसी ने स्पष्ट किया कि वे INDIA गठबंधन के उस मार्च में शामिल नहीं हुए, क्योंकि उनकी पार्टी उस गठबंधन का हिस्सा नहीं है।

मुख्य चुनाव आयुक्त चयन प्रक्रिया पर भी उठाए सवाल

ओवैसी ने इस अवसर पर मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) की नियुक्ति प्रक्रिया को भी निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि मौजूदा प्रक्रिया पूरी तरह कार्यपालिका के पक्ष में झुकी हुई है और इसे बदलने की ज़रूरत है। उन्होंने पुरानी तीन-सदस्यीय पैनल व्यवस्था — जिसमें प्रधानमंत्री, विपक्ष के नेता और भारत के मुख्य न्यायाधीश शामिल थे — को बहाल करने की माँग दोहराई।

गौरतलब है कि यह पहली बार नहीं है जब SIR के दौरान मतदाता सूची में हेरफेर के आरोप सामने आए हैं; विपक्षी दलों ने इस मुद्दे को राष्ट्रीय स्तर पर उठाया है। आने वाले दिनों में ECI की प्रतिक्रिया और धारा 31 के तहत संभावित कार्रवाई पर सबकी नज़रें टिकी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

चाहे कोई भी राजनीतिक पक्ष हो। असली सवाल यह है कि ECI उन राज्यों में 'फॉर्म-7' के दुरुपयोग की पहचान कैसे करेगा जहाँ BLO उतने सतर्क नहीं हैं — और क्या धारा 31 का प्रयोग सिर्फ कागज़ों तक रहेगा या वास्तविक निवारक बनेगा। मुख्य चुनाव आयुक्त की नियुक्ति प्रक्रिया पर ओवैसी की टिप्पणी भी उतनी ही महत्त्वपूर्ण है, क्योंकि यह मुद्दा अब केवल एक पार्टी का नहीं, बल्कि संस्थागत विश्वसनीयता का है।
RashtraPress
6 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

'फॉर्म-7' क्या होता है और इसका दुरुपयोग कैसे हो सकता है?
'फॉर्म-7' वह आधिकारिक दस्तावेज़ है जिसके ज़रिए कोई भी व्यक्ति किसी मतदाता का नाम वोटर लिस्ट से हटाने के लिए आपत्ति दर्ज करा सकता है। ओवैसी के अनुसार, गोशामहल में इसे बड़े पैमाने पर इस्तेमाल कर सामूहिक रूप से मुस्लिम मतदाताओं के नाम हटाने की कोशिश की गई।
ओवैसी ने किस विशेष घटना का हवाला देते हुए शिकायत की?
ओवैसी ने बताया कि पोलिंग स्टेशन नंबर 28 पर थुडुमु जनार्दन ने एकमुश्त 122 'फॉर्म-7' आवेदन जमा किए, जिनमें सभी लक्षित मतदाता मुस्लिम समुदाय के थे। इसके अलावा पोलिंग स्टेशन नंबर 173 पर करीब 30 ऐसे फॉर्म मिले जिनमें आवेदक का नाम ही नहीं था।
ओवैसी ने ECI से क्या माँग की है?
ओवैसी ने भारत के चुनाव आयोग (ECI) और तेलंगाना के CEO से 'जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950' की धारा 31 के तहत गलत आवेदन दाखिल करने वाले व्यक्तियों पर आपराधिक कार्रवाई करने की माँग की है।
SIR को ओवैसी 'पिछले दरवाजे से NRC' क्यों कह रहे हैं?
ओवैसी का आरोप है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की प्रक्रिया का इस्तेमाल अप्रत्यक्ष रूप से अल्पसंख्यक मतदाताओं की पहचान और उन्हें सूची से बाहर करने के लिए किया जा सकता है, जो राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (NRC) जैसे प्रभाव उत्पन्न करता है।
क्या अन्य विपक्षी दल भी इस मुद्दे पर आवाज़ उठा रहे हैं?
हाँ, INDIA गठबंधन के सांसदों ने SIR को लेकर दिल्ली में ECI कार्यालय तक विरोध मार्च निकाला। हालाँकि ओवैसी ने स्पष्ट किया कि वे उस मार्च में शामिल नहीं हुए, क्योंकि AIMIM उस गठबंधन का हिस्सा नहीं है।
राष्ट्र प्रेस
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