पाकिस्तान में 125 साल पुराना हिंदू मंदिर तोड़ा गया, जगतगुरु परमहंस आचार्य ने दी कड़ी चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
पाकिस्तान में 125 वर्ष से अधिक पुराने हिंदू मंदिर को तोड़े जाने की घटना पर अयोध्या के著名 संत जगतगुरु परमहंस आचार्य ने तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। तपस्वी छावनी के पीठाधीश्वर ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि यदि यह मंदिर पुनर्निर्मित नहीं किया गया, तो पाकिस्तान का अस्तित्व संकट में पड़ जाएगा। यह घटना पाकिस्तान में हिंदू अल्पसंख्यकों पर हो रहे कथित अत्याचारों की श्रृंखला में एक और कड़ी मानी जा रही है।
मंदिर विध्वंस पर जगतगुरु की प्रतिक्रिया
जगतगुरु परमहंस आचार्य ने 3 सितंबर को कहा, 'जब कुछ कारणों से भारत के हिस्से अलग हुए, तो पाकिस्तान और बांग्लादेश ने खुद को इस्लामिक देश घोषित कर दिया और वहाँ शरिया कानून लागू किया गया। इसके उलट, भारत की इंसानियत और दरियादिली के कारण, बँटवारे के बावजूद यहाँ अल्पसंख्यकों को बराबर या उससे भी ज़्यादा अधिकार दिए गए।'
उन्होंने आगे चेतावनी भरे लहजे में कहा, 'पाकिस्तान में लगातार हो रही बर्बरता को देखते हुए — जहाँ हिंदुओं को निशाना बनाया जा रहा है, हिंदू आस्था को कुचला जा रहा है और मंदिरों को तोड़ा जा रहा है — अगर यह मंदिर फिर से नहीं बनाया गया, तो पाकिस्तान दुनिया के नक्शे से मिट जाएगा। यह भारत की ओर से पाकिस्तान को चेतावनी है। जितना जल्दी हो, जो मंदिर तोड़ा है उसे बनवा दिया जाए।'
पाकिस्तान में हिंदू अल्पसंख्यकों की स्थिति
गौरतलब है कि पाकिस्तान में हिंदू अल्पसंख्यकों पर अत्याचार की घटनाएँ कोई नई बात नहीं हैं। मानवाधिकार संगठनों की रिपोर्टों के अनुसार, वहाँ धार्मिक स्थलों को क्षति पहुँचाने, जबरन धर्मांतरण और हिंदू परिवारों के उत्पीड़न की घटनाएँ समय-समय पर सामने आती रही हैं। यह ऐसे समय में आया है जब भारत-पाकिस्तान के बीच कूटनीतिक तनाव पहले से ही बना हुआ है।
आलोचकों का कहना है कि पाकिस्तान में अल्पसंख्यक समुदाय — विशेषकर हिंदू और सिख — संस्थागत भेदभाव का सामना करते हैं, जिसे अंतरराष्ट्रीय मंचों पर बार-बार उठाया गया है।
राम मंदिर प्रशासन पर संतोष
इसी बातचीत में जगतगुरु परमहंस आचार्य ने राम मंदिर में हुए प्रशासनिक बदलाव पर प्रसन्नता भी जताई। उन्होंने कहा, 'यह बहुत अच्छी खबर है कि भारतीय वायु सेना के पूर्व वरिष्ठ अधिकारी जितेंद्र मिश्रा को मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्री राम लल्ला मंदिर का पहला सीईओ नियुक्त किया गया है। लंबे समय से हमारी भी यही इच्छा थी कि भारतीय सशस्त्र बलों का कोई अधिकारी राम मंदिर में कोई पद संभाले।'
मंदिर में हाल ही में सामने आई वित्तीय अनियमितताओं पर उन्होंने कहा, 'इन्हें दूर करने के लिए जो सकारात्मक कदम उठाए गए हैं, वे बहुत अच्छे हैं।' यह टिप्पणी हाल ही में चर्चा में आई चढ़ावा चोरी की घटना के संदर्भ में मानी जा रही है।
आगे क्या
जगतगुरु परमहंस आचार्य की यह चेतावनी धार्मिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बन गई है। भारत सरकार की ओर से इस विशेष मंदिर विध्वंस पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया अभी तक सामने नहीं आई है। अंतरराष्ट्रीय धार्मिक स्वतंत्रता पर नज़र रखने वाले संगठनों से इस घटना पर अपनी रिपोर्ट जारी करने की उम्मीद है।