30 अगस्त 2026
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पास्टर अंकुर नरूला के खिलाफ ईडी ने कोर्ट में सीलबंद रिपोर्ट दाखिल की, 6 अक्टूबर को अगली सुनवाई

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पास्टर अंकुर नरूला के खिलाफ ईडी ने कोर्ट में सीलबंद रिपोर्ट दाखिल की, 6 अक्टूबर को अगली सुनवाई

सारांश

जालंधर के पास्टर अंकुर नरूला की मुश्किलें बढ़ी हैं — ईडी ने अदालत में सीलबंद रिपोर्ट दाखिल की, सीबीआई भी जाँच में है। FCRA उल्लंघन, पर्यटक वीज़ा पर धार्मिक गतिविधि और बिना जीएसटी बिक्री के आरोपों के बीच 6 अक्टूबर को अगली सुनवाई अहम होगी।

मुख्य बातें

प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पास्टर अंकुर नरूला के खिलाफ 30 अगस्त को अदालत में सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट दाखिल की।
नरूला पर विदेशी अधिनियम, 1946 के उल्लंघन, FCRA के बिना विदेशी चंदा लेने और बिना जीएसटी बिक्री के आरोप हैं।
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) भी स्वतंत्र रूप से जाँच कर रही है और अदालत को सीलबंद रिपोर्ट सौंपेगी।
अदालत ने किसी भी पक्ष को इस चरण में मीडिया से मामले की जानकारी साझा करने से रोका है।
इस मामले में अगली सुनवाई 6 अक्टूबर को निर्धारित है।
नरूला जालंधर के खाम्बरा गाँव में 'चर्च ऑफ साइन्स एंड वंडर्स' चलाते हैं, जिसकी स्थापना 2008 में हुई थी।

जालंधर के पास्टर अंकुर नरूला की कानूनी मुश्किलें और गहरी हो सकती हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 30 अगस्त 2026 को नरूला के खिलाफ अदालत में एक सीलबंद लिफाफे में अपनी जाँच रिपोर्ट दाखिल की है। नरूला पर चंगाई सभाओं में कथित तौर पर चमत्कार के नाम पर लोगों को गुमराह करने समेत कई गंभीर आरोप हैं।

मुख्य आरोप

नरूला पर लगे आरोपों की सूची लंबी है। कथित तौर पर उन पर विदेशी मिशनरियों को पर्यटक वीज़ा पर भारत बुलाकर धार्मिक गतिविधियाँ करवाने का आरोप है, जिसे विदेशी अधिनियम, 1946 का उल्लंघन माना गया है। इसके अतिरिक्त, उनकी संस्था पर बिना एफसीआरए (FCRA) पंजीकरण के विदेशी चंदा प्राप्त करने का आरोप भी है।

जाँच एजेंसियों के अनुसार, अभिषेक तेल और घड़ियों जैसी वस्तुओं की बिक्री बिना जीएसटी (GST) बिलों के की गई। इन्हीं कथित अनियमितताओं से मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका उत्पन्न हुई, जिसके बाद ईडी ने मामले की जाँच शुरू की।

सीबीआई भी जाँच में शामिल

केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) भी इस मामले में स्वतंत्र रूप से जाँच कर रही है। अदालत ने सीबीआई को भी नरूला पर लगे आरोपों की जाँच कर सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। गौरतलब है कि अदालत ने स्पष्ट आदेश दिया है कि इस चरण में कोई भी पक्ष मामले की जानकारी मीडिया को नहीं देगा।

अदालती प्रक्रिया और अगली सुनवाई

इस मामले में अगली सुनवाई 6 अक्टूबर को निर्धारित है। दोनों केंद्रीय जाँच एजेंसियों — ईडी और सीबीआई — की सीलबंद रिपोर्टें अदालत के समक्ष होंगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।

कौन हैं अंकुर नरूला

नरूला जालंधर-नकोदर रोड पर स्थित खाम्बरा गाँव में पेंटेकोस्टल चर्च के अंतर्गत 'चर्च ऑफ साइन्स एंड वंडर्स' नामक चर्च चलाते हैं। हिंदू खत्री परिवार में जन्मे नरूला ने अपने परिवार का मार्बल और टाइल्स का व्यवसाय छोड़कर ईसाई धर्म अपनाया था। उन्होंने 2008 में खाम्बरा गाँव में इस चर्च की स्थापना की थी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो संवेदनशील साक्ष्यों की उपस्थिति का संकेत हो सकता है। धार्मिक संस्थाओं पर FCRA और जीएसटी अनुपालन को लेकर यह मामला एक व्यापक प्रवृत्ति का हिस्सा है, जिसमें जाँच एजेंसियाँ गैर-लाभकारी और धार्मिक निकायों की वित्तीय पारदर्शिता पर सवाल उठा रही हैं। 6 अक्टूबर की सुनवाई तय करेगी कि यह मामला औपचारिक अभियोजन की दिशा में आगे बढ़ता है या नहीं।
RashtraPress
30 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पास्टर अंकुर नरूला पर क्या-क्या आरोप हैं?
नरूला पर चंगाई सभाओं में चमत्कार के नाम पर लोगों को कथित तौर पर गुमराह करने, पर्यटक वीज़ा पर विदेशी मिशनरियों से धार्मिक गतिविधियाँ करवाने (विदेशी अधिनियम, 1946 का उल्लंघन), बिना FCRA पंजीकरण के विदेशी चंदा लेने और बिना जीएसटी बिलों के वस्तुओं की बिक्री करने के आरोप हैं। इन्हीं आरोपों के आधार पर मनी लॉन्ड्रिंग की जाँच शुरू हुई।
ईडी ने कोर्ट में सीलबंद रिपोर्ट क्यों दाखिल की?
प्रवर्तन निदेशालय ने अदालत के निर्देश पर नरूला के खिलाफ जाँच रिपोर्ट सीलबंद लिफाफे में दाखिल की है। अदालत ने यह भी आदेश दिया है कि इस चरण में कोई भी पक्ष मामले की जानकारी मीडिया को नहीं देगा, जो संवेदनशील जाँच प्रक्रिया की गोपनीयता बनाए रखने के लिए किया जाता है।
क्या सीबीआई भी इस मामले में जाँच कर रही है?
हाँ, केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) भी इस मामले में स्वतंत्र जाँच कर रही है। अदालत ने सीबीआई को भी नरूला पर लगे आरोपों की जाँच कर सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है।
इस मामले में अगली सुनवाई कब होगी?
इस मामले में अगली सुनवाई 6 अक्टूबर को निर्धारित है। उस सुनवाई में ईडी और सीबीआई दोनों की सीलबंद रिपोर्टें अदालत के समक्ष होंगी।
अंकुर नरूला कौन हैं और उनका चर्च कहाँ है?
अंकुर नरूला जालंधर-नकोदर रोड पर खाम्बरा गाँव में पेंटेकोस्टल चर्च के अंतर्गत 'चर्च ऑफ साइन्स एंड वंडर्स' चलाते हैं। हिंदू खत्री परिवार में जन्मे नरूला ने परिवार का मार्बल-टाइल्स व्यवसाय छोड़कर ईसाई धर्म अपनाया और 2008 में इस चर्च की स्थापना की।
राष्ट्र प्रेस
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