पास्टर अंकुर नरूला के खिलाफ ईडी ने कोर्ट में सीलबंद रिपोर्ट दाखिल की, 6 अक्टूबर को अगली सुनवाई
सारांश
मुख्य बातें
जालंधर के पास्टर अंकुर नरूला की कानूनी मुश्किलें और गहरी हो सकती हैं। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने 30 अगस्त 2026 को नरूला के खिलाफ अदालत में एक सीलबंद लिफाफे में अपनी जाँच रिपोर्ट दाखिल की है। नरूला पर चंगाई सभाओं में कथित तौर पर चमत्कार के नाम पर लोगों को गुमराह करने समेत कई गंभीर आरोप हैं।
मुख्य आरोप
नरूला पर लगे आरोपों की सूची लंबी है। कथित तौर पर उन पर विदेशी मिशनरियों को पर्यटक वीज़ा पर भारत बुलाकर धार्मिक गतिविधियाँ करवाने का आरोप है, जिसे विदेशी अधिनियम, 1946 का उल्लंघन माना गया है। इसके अतिरिक्त, उनकी संस्था पर बिना एफसीआरए (FCRA) पंजीकरण के विदेशी चंदा प्राप्त करने का आरोप भी है।
जाँच एजेंसियों के अनुसार, अभिषेक तेल और घड़ियों जैसी वस्तुओं की बिक्री बिना जीएसटी (GST) बिलों के की गई। इन्हीं कथित अनियमितताओं से मनी लॉन्ड्रिंग की आशंका उत्पन्न हुई, जिसके बाद ईडी ने मामले की जाँच शुरू की।
सीबीआई भी जाँच में शामिल
केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (सीबीआई) भी इस मामले में स्वतंत्र रूप से जाँच कर रही है। अदालत ने सीबीआई को भी नरूला पर लगे आरोपों की जाँच कर सीलबंद लिफाफे में रिपोर्ट सौंपने का निर्देश दिया है। गौरतलब है कि अदालत ने स्पष्ट आदेश दिया है कि इस चरण में कोई भी पक्ष मामले की जानकारी मीडिया को नहीं देगा।
अदालती प्रक्रिया और अगली सुनवाई
इस मामले में अगली सुनवाई 6 अक्टूबर को निर्धारित है। दोनों केंद्रीय जाँच एजेंसियों — ईडी और सीबीआई — की सीलबंद रिपोर्टें अदालत के समक्ष होंगी, जिसके आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।
कौन हैं अंकुर नरूला
नरूला जालंधर-नकोदर रोड पर स्थित खाम्बरा गाँव में पेंटेकोस्टल चर्च के अंतर्गत 'चर्च ऑफ साइन्स एंड वंडर्स' नामक चर्च चलाते हैं। हिंदू खत्री परिवार में जन्मे नरूला ने अपने परिवार का मार्बल और टाइल्स का व्यवसाय छोड़कर ईसाई धर्म अपनाया था। उन्होंने 2008 में खाम्बरा गाँव में इस चर्च की स्थापना की थी।