वंदे मातरम विवाद: पवन कुमार बंसल बोले — '90 साल बाद भाजपा ने नाकामियाँ छिपाने को उठाया मुद्दा'
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पवन कुमार बंसल ने 21 अगस्त 2026 को चंडीगढ़ में वंदे मातरम विवाद और 'वन डे, वन यूनिवर्सिटी' नीति को लेकर केंद्र सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने आरोप लगाया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) ने 90 वर्षों से चली आ रही परंपरा को तोड़कर जानबूझकर विवाद खड़ा किया है — और यह सब अपनी नाकामियों से जनता का ध्यान हटाने की कोशिश है।
वंदे मातरम पर बंसल का तर्क
बंसल ने कहा कि वंदे मातरम के पहले दो छंद 1936 में कांग्रेस वर्किंग कमेटी के निर्णय के बाद से गाए जाते रहे हैं। उनके अनुसार, अटल बिहारी वाजपेयी सहित भाजपा के तमाम मुख्यमंत्रियों, राज्यपालों और प्रधानमंत्रियों ने भी इसी परंपरा का पालन किया। उन्होंने कहा, 'अब भाजपा ने 90 सालों के बाद इसे उठाकर एक विवाद पैदा करने की कोशिश की। ये अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए लोगों का ध्यान भटकाना चाहते हैं।'
बंसल ने ऐतिहासिक संदर्भ देते हुए बताया कि वंदे मातरम को बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने लगभग 1872-75 के बीच अपनी पुस्तक 'आनंदमठ' में लिखा था। इसे पहली बार 28 दिसंबर 1896 को भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के कलकत्ता (अब कोलकाता) अधिवेशन में सार्वजनिक रूप से गाया गया था। उन्होंने स्पष्ट किया कि पहले दो छंदों में किसी धर्म विशेष का उल्लेख नहीं है, जबकि बाद के चार छंद धार्मिक प्रतीकों से जुड़े हैं — इसीलिए धर्मनिरपेक्षता की भावना के तहत केवल दो छंद गाने की परंपरा बनी।
संसद में विधेयक पारित होने पर सवाल
बंसल ने राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि यह विधेयक संसद में हंगामे के बीच पारित कराया गया, ताकि जनता का ध्यान असली मुद्दों से हटाया जा सके। उनके अनुसार, जंतर-मंतर पर हुए हालात के बाद सरकार बैकफुट पर थी और इन विवादों के ज़रिए ध्यान बँटाने की कोशिश की जा रही है।
'वन डे, वन यूनिवर्सिटी' पर कांग्रेस की आपत्ति
कांग्रेस नेता ने 'वन डे, वन यूनिवर्सिटी' नीति को विश्वविद्यालयों में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) की विचारधारा थोपने का प्रयास बताया। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थानों को दलगत राजनीति से दूर रखा जाना चाहिए। बंसल ने तर्क दिया कि भाजपा के पास अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) जैसा छात्र संगठन है, जबकि कांग्रेस के पास नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) है — इन्हीं मंचों के ज़रिए युवाओं तक पहुँचना चाहिए, न कि विश्वविद्यालय के बुनियादी ढाँचे का दुरुपयोग करके।
उन्होंने पंजाब यूनिवर्सिटी का उदाहरण देते हुए कहा कि वहाँ भी इसी तरह की स्थिति देखी जा रही है। उनके अनुसार, सरकार विश्वविद्यालयों के ऑडिटोरियम और अन्य संसाधनों का उपयोग पार्टी विचारधारा के प्रचार के लिए कर रही है, जो सीधे-सीधे दुरुपयोग है।
कांग्रेस का रुख स्पष्ट
बंसल ने साफ किया कि कांग्रेस 1936 से चली आ रही परंपरा के अनुसार वंदे मातरम के पहले दो छंद गाती रहेगी। उन्होंने कहा कि यह निर्णय इसलिए लिया गया था ताकि किसी धर्म विशेष की भावनाओं को ठेस न पहुँचे और देश की धर्मनिरपेक्ष छवि बनी रहे। आलोचकों का कहना है कि यह विवाद ऐसे समय में उठाया गया है जब सरकार कई मोर्चों पर दबाव में है।