वंदे मातरम विवाद: कांग्रेस सांसद तारिक अनवर का BJP पर हमला — '1937 की परंपरा न सम्मान, न पालन'
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद तारिक अनवर ने 22 अगस्त को वंदे मातरम विवाद पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) पर तीखा हमला बोला और कहा कि BJP न तो देश की स्थापित परंपराओं का सम्मान करती है और न ही उनका पालन करती है। उन्होंने 1937 में कांग्रेस वर्किंग कमेटी द्वारा पारित उस ऐतिहासिक प्रस्ताव का हवाला दिया, जिसमें गीत के केवल दो निर्विवाद छंद गाने का निर्णय लिया गया था।
1937 का ऐतिहासिक प्रस्ताव
तारिक अनवर ने स्पष्ट किया कि 1937 में कांग्रेस वर्किंग कमेटी ने रवींद्रनाथ टैगोर की सलाह पर एक प्रस्ताव पारित किया था। उन्होंने कहा, 'सरदार पटेल और हमारे स्वतंत्रता संग्राम का नेतृत्व करने वाले सभी प्रमुख नेता मौजूद थे, और उन्होंने मिलकर तय किया कि गीत के दो निर्विवाद छंद गाए जाने चाहिए।' उनके अनुसार यह निर्णय राष्ट्रीय सहमति का प्रतीक था, जिसे आज BJP अनदेखा कर रही है।
स्मृति ईरानी के बयान पर कांग्रेस का पक्ष
पूर्व केंद्रीय मंत्री स्मृति ईरानी के बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए अनवर ने कहा कि कांग्रेस पार्टी का रुख बिल्कुल स्पष्ट है। उन्होंने कहा, 'हम छात्रों के साथ हैं। जिन राज्यों में हम सत्ता में हैं, वहाँ की सरकारों को भी कहा गया है कि छात्रों से बातचीत हो और उनकी चिंताओं पर ध्यान दिया जाए।'
योगी आदित्यनाथ के PDA बयान पर पलटवार
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के PDA वाले बयान पर अनवर ने कहा कि मुख्यमंत्री के पास पाकिस्तान और मुसलमानों के अलावा बात करने को कुछ नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया, 'लगभग 10 साल के कार्यकाल में उन्होंने गरीबी खत्म करने, रोज़गार पैदा करने या उत्तर प्रदेश में विकास लाने के लिए कोई खास काम नहीं किया। आज भी बिहार और उत्तर प्रदेश भारत के गरीब राज्यों में गिने जाते हैं।'
विवाद की पृष्ठभूमि
वंदे मातरम को लेकर यह विवाद नया नहीं है। गीत की धार्मिक संवेदनशीलता को देखते हुए 1937 में ही यह सहमति बनाई गई थी कि केवल पहले दो छंद राष्ट्रीय अवसरों पर गाए जाएँगे। यह ऐसे समय में फिर सुर्खियों में है जब देश में राष्ट्रवाद और धार्मिक पहचान से जुड़े मुद्दों पर राजनीतिक बहस तेज है।
आगे क्या
कांग्रेस और BJP के बीच इस मुद्दे पर वाकयुद्ध जारी रहने के आसार हैं। विपक्ष का रुख है कि ऐतिहासिक सहमति का सम्मान किया जाए, जबकि सत्तारूढ़ दल इसे राष्ट्रीय भावना से जोड़ रहा है। आने वाले दिनों में संसद और सार्वजनिक मंचों पर यह बहस और गहरी हो सकती है।