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पायधुनी यौन उत्पीड़न कांड: वारिस पठान की माँग — दरिंदे को फाँसी दो, फास्ट ट्रैक कोर्ट में हो सुनवाई

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पायधुनी यौन उत्पीड़न कांड: वारिस पठान की माँग — दरिंदे को फाँसी दो, फास्ट ट्रैक कोर्ट में हो सुनवाई

सारांश

मुंबई के पायधुनी में सात-आठ साल की मासूम बच्ची के साथ कथित दुष्कर्म की घटना ने AIMIM नेता वारिस पठान को आहत किया — उन्होंने दोषी को 'दरिंदा' बताते हुए फाँसी, फास्ट ट्रैक कोर्ट और स्पेशल प्रॉसिक्यूटर की माँग की। साथ ही राम मंदिर चढ़ावा विवाद को धार्मिक रंग देने पर भी सवाल उठाए।

मुख्य बातें

AIMIM नेता वारिस पठान ने मुंबई के पायधुनी में सात-आठ वर्षीय बच्ची के साथ कथित यौन उत्पीड़न की घटना पर गहरा दुख जताया।
पठान ने माँग की कि मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में हो और दोषी को फाँसी की सजा दी जाए।
सरकार से स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर नियुक्त करने की अपील की गई।
पुलिस प्रशासन ने भरोसा दिलाया कि मामले में पूरी गंभीरता से कार्रवाई जारी है; बच्ची का इलाज चल रहा है।
राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले को धार्मिक रंग देने पर पठान ने मंत्री नितेश राणे के बयान को खारिज किया और निष्पक्ष जाँच की माँग की।

ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) के नेता वारिस पठान ने मुंबई के पायधुनी इलाके में एक मासूम बच्ची के साथ कथित यौन उत्पीड़न की घटना पर गहरी पीड़ा जताते हुए 13 जुलाई को माँग की कि इस मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में हो और दोषी को अदालत फाँसी की सजा सुनाए। उन्होंने सरकार से स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर नियुक्त करने और पीड़िता को त्वरित न्याय दिलाने की अपील की।

मुख्य घटनाक्रम

पायधुनी में सात-आठ वर्षीय एक बच्ची के साथ कथित दुष्कर्म की इस घटना को वारिस पठान ने 'बेहद दुर्भाग्यपूर्ण, दर्दनाक और दिल दहला देने वाला' करार दिया। उन्होंने कहा कि इस अपराध को अंजाम देने वाला व्यक्ति नहीं, दरिंदा है। पठान ने स्पष्ट किया कि वे कानून और संविधान में पूरा विश्वास रखते हैं, किंतु ऐसी घटनाएँ इंसान को भीतर तक झकझोर देती हैं।

वारिस पठान की माँगें

पठान ने तीन सूत्री माँग रखी — पहली, मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में हो; दूसरी, सरकार स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर नियुक्त करे; तीसरी, पीड़िता को जल्द से जल्द न्याय मिले। उनका तर्क था कि ऐसे मामलों में त्वरित और कठोर सजा से समाज में यह संदेश जाएगा कि महिलाओं और बच्चियों के खिलाफ अपराध करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।

पीड़िता की स्थिति और प्रशासन का रुख

पठान ने बताया कि उनकी वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों, अस्पताल प्रशासन और डॉक्टरों से बातचीत हुई है। बच्ची का इलाज जारी है और पुलिस प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि मामले में पूरी गंभीरता से कार्रवाई की जा रही है। उन्होंने प्रशासन से ऐसे असामाजिक तत्वों पर निरंतर निगरानी और एहतियाती कदम उठाने की भी माँग की।

राम मंदिर चढ़ावा विवाद और नितेश राणे पर पलटवार

इसी प्रेस वार्ता में पठान ने राम मंदिर चढ़ावा चोरी के आरोपों और इस मामले में महाराष्ट्र सरकार के मंत्री नितेश राणे द्वारा विपक्ष को 'औरंगजेब के वंशज' बताए जाने वाले बयान पर भी तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा कि यदि कथित गड़बड़ी में किसी मुस्लिम की भूमिका नहीं बताई जा रही, तो इस मामले को धार्मिक रंग देने का कोई औचित्य नहीं है। पठान के अनुसार, प्रारंभिक जाँच रिपोर्ट में कथित तौर पर ऐसे साक्ष्य सामने आए हैं जो चढ़ावे के धन में गड़बड़ी की ओर इशारा करते हैं, और इसकी निष्पक्ष जाँच होनी चाहिए।

आगे क्या

पठान ने पीड़ित बच्ची के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करते हुए उसके परिवार को इस कठिन समय में हिम्मत और धैर्य मिलने की प्रार्थना की। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब देशभर में बाल यौन उत्पीड़न के मामलों में त्वरित न्याय को लेकर माँगें लगातार तेज़ हो रही हैं। अब देखना होगा कि महाराष्ट्र सरकार फास्ट ट्रैक सुनवाई की माँग पर क्या कदम उठाती है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह ध्यान देने योग्य है कि भारत में पहले से ही पॉक्सो अधिनियम के तहत बाल यौन उत्पीड़न के गंभीर मामलों में फास्ट ट्रैक कोर्ट का प्रावधान है — सवाल माँग का नहीं, क्रियान्वयन का है। राम मंदिर चढ़ावा विवाद को एक ही प्रेस वार्ता में उठाना राजनीतिक संदेश की रणनीति को दर्शाता है, जो मुख्यधारा की कवरेज में अक्सर अनदेखा रह जाता है। मुख्यधारा की मीडिया 'फाँसी दो' की सुर्खी तक सीमित रहती है, जबकि असली जवाबदेही यह है कि पायधुनी जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में बाल सुरक्षा तंत्र कितना प्रभावी है।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पायधुनी यौन उत्पीड़न कांड क्या है?
मुंबई के पायधुनी इलाके में एक सात-आठ वर्षीय मासूम बच्ची के साथ कथित दुष्कर्म की घटना सामने आई है। पुलिस ने मामला दर्ज कर जाँच शुरू कर दी है और बच्ची का इलाज जारी है।
वारिस पठान ने इस मामले में क्या माँगें रखी हैं?
AIMIM नेता वारिस पठान ने माँग की है कि मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में हो, स्पेशल पब्लिक प्रॉसिक्यूटर नियुक्त किया जाए और अदालत दोषी को फाँसी की सजा दे। उन्होंने प्रशासन से असामाजिक तत्वों पर निरंतर निगरानी की भी अपील की।
फास्ट ट्रैक कोर्ट में सुनवाई क्यों ज़रूरी है?
बाल यौन उत्पीड़न के मामलों में त्वरित न्याय सुनिश्चित करने और समाज में अपराधियों के प्रति कड़ा संदेश देने के लिए फास्ट ट्रैक कोर्ट को प्रभावी माना जाता है। भारत में पॉक्सो अधिनियम के तहत ऐसे मामलों के लिए विशेष अदालतों का प्रावधान पहले से मौजूद है।
राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर वारिस पठान ने क्या कहा?
पठान ने कहा कि यदि चढ़ावे में कथित गड़बड़ी में किसी मुस्लिम की भूमिका नहीं बताई जा रही, तो इसे धार्मिक रंग देना उचित नहीं है। उन्होंने मंत्री नितेश राणे के 'औरंगजेब के वंशज' वाले बयान को खारिज करते हुए मामले की निष्पक्ष जाँच की माँग की।
पायधुनी कांड में पीड़िता की अभी क्या स्थिति है?
वारिस पठान के अनुसार बच्ची का इलाज जारी है और पुलिस प्रशासन ने भरोसा दिलाया है कि मामले में पूरी गंभीरता से कार्रवाई की जा रही है। पठान ने पीड़िता के शीघ्र स्वस्थ होने और उसके परिवार को धैर्य मिलने की कामना की है।
राष्ट्र प्रेस
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