पीएलआई योजनाओं से ₹2.40 लाख करोड़ का निवेश, 14.15 लाख से अधिक रोज़गार सृजित: संसद में सरकार का खुलासा
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार की प्रोडक्शन लिंक्ड इन्सेंटिव (PLI) योजनाओं ने 31 मार्च 2026 तक 14 प्रमुख क्षेत्रों में ₹2.40 लाख करोड़ से अधिक का निवेश आकर्षित किया है और 14.15 लाख से अधिक प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोज़गार के अवसर पैदा किए हैं। इसके साथ ही इन योजनाओं के ज़रिए ₹15.2 लाख करोड़ मूल्य का निर्यात भी संभव हुआ है। यह जानकारी 21 जुलाई 2026 को लोकसभा में एक लिखित उत्तर के माध्यम से सामने आई।
संसद में क्या बताया सरकार ने
वाणिज्य एवं उद्योग राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने लोकसभा में लिखित उत्तर में स्पष्ट किया कि PLI योजनाएँ ₹1.91 लाख करोड़ के स्वीकृत वित्तीय परिव्यय के साथ शुरू की गई थीं। उन्होंने बताया कि उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) इन योजनाओं के समन्वय और निगरानी की नोडल एजेंसी है, जबकि क्रियान्वयन की ज़िम्मेदारी संबंधित मंत्रालयों के पास है।
निर्यात में तीन वर्षों में तेज़ उछाल
सरकार के आँकड़ों के अनुसार, PLI कार्यक्रम के तहत निर्यात में पिछले तीन वर्षों में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज हुई है। वित्त वर्ष 2023-24 में ₹4 लाख करोड़ का निर्यात, वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़कर ₹6.5 लाख करोड़ और वित्त वर्ष 2025-26 में ₹15.2 लाख करोड़ तक पहुँच गया। यह वृद्धि वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं (Global Value Chains) में भारत की बढ़ती भागीदारी को रेखांकित करती है।
क्षेत्रवार निवेश का चित्र
उच्च दक्षता वाले सोलर फोटोवोल्टिक (PV) मॉड्यूल क्षेत्र ने सर्वाधिक ₹64,873 करोड़ का संचयी निवेश आकर्षित किया। इसके बाद फार्मास्यूटिकल्स में ₹45,158 करोड़ और ऑटोमोबाइल एवं ऑटो कंपोनेंट्स क्षेत्र में ₹44,326 करोड़ का निवेश दर्ज हुआ।
स्पेशियलिटी स्टील क्षेत्र में ₹23,896 करोड़ और बड़े पैमाने पर इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण क्षेत्र में ₹20,580 करोड़ का निवेश आया। गौरतलब है कि ये आँकड़े नीतिगत प्रोत्साहन और औद्योगिक प्रतिक्रिया दोनों के बीच सकारात्मक सहसंबंध का संकेत देते हैं।
मोबाइल फोन उत्पादन में आत्मनिर्भरता
PLI कार्यक्रम के सबसे दृश्यमान परिणामों में से एक मोबाइल फोन विनिर्माण क्षेत्र में आई क्रांति है। सरकारी आँकड़ों के अनुसार, योजना शुरू होने के बाद से मोबाइल फोन उत्पादन लगभग 2.4 गुना बढ़ गया है। वर्तमान में भारत में बिकने वाले करीब 99.2 प्रतिशत मोबाइल फोन देश में ही निर्मित हो रहे हैं, और मोबाइल फोन के आयात में लगभग 77 प्रतिशत की गिरावट आई है।
निगरानी और समीक्षा तंत्र
सरकार ने बताया कि PLI योजनाओं के क्रियान्वयन की समय-समय पर समीक्षा कैबिनेट सचिव की अध्यक्षता वाले एम्पावर्ड ग्रुप ऑफ सेक्रेटरीज (EGOS) और संबंधित मंत्रालयों द्वारा की जाती है। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में पुनर्संरेखण की माँग तेज़ हो रही है और भारत 'China Plus One' रणनीति का लाभ उठाने की स्थिति में है। आने वाले वर्षों में PLI के नतीजे भारत की विनिर्माण महत्वाकांक्षाओं की असली कसौटी बनेंगे।