25 अक्टूबर 2026
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मन की बात के 139वें एपिसोड में PM मोदी ने की टिहरी गढ़वाल की हेवल नदी पुनर्जीवन की तारीफ

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मन की बात के 139वें एपिसोड में PM मोदी ने की टिहरी गढ़वाल की हेवल नदी पुनर्जीवन की तारीफ

सारांश

मन की बात के 139वें एपिसोड में PM मोदी ने टिहरी गढ़वाल की हेवल नदी को नया जीवन देने वाले सामुदायिक अभियान की सराहना की। 2019-20 में IFS अधिकारी धर्म सिंह मीणा के नेतृत्व में शुरू यह परियोजना अब दर्जनों जल-स्रोतों को पुनर्जीवित कर चुकी है।

मुख्य बातें

PM नरेंद्र मोदी ने 25 अक्टूबर 2026 को मन की बात के 139वें एपिसोड में हेवल नदी पुनर्जीवन का उल्लेख किया।
हेवल नदी उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल में 8,000 फीट से अधिक ऊँचाई पर स्थित है।
IFS अधिकारी धर्म सिंह मीणा के नेतृत्व में 2019-20 में 'हेवल नदी पुनर्जीवन' परियोजना शुरू हुई।
वर्षा-जल संरक्षण संरचनाएँ, भूजल-पुनर्भरण और बड़े पैमाने पर पौधरोपण इस अभियान के मुख्य घटक रहे।
अभियान के परिणामस्वरूप हेवल में जल-प्रवाह बहाल हुआ और दर्जनों प्राकृतिक जल-स्रोत पुनर्जीवित हुए।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 25 अक्टूबर 2026 को प्रसारित मन की बात कार्यक्रम के 139वें एपिसोड में उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले की हेवल नदी को पुनर्जीवित करने के सामुदायिक प्रयास को विशेष रूप से सराहा। मोदी ने कहा कि स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों ने मिलकर इस नदी को 'नया जीवन' देने का कार्य किया है — जो सामूहिक संकल्प और पर्यावरण चेतना का एक प्रेरक उदाहरण है।

हेवल नदी: भौगोलिक परिचय

हेवल नदी उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले में नरेंद्र नगर वन प्रभाग के अंतर्गत आती है। यह नदी सुरकंडा देवी और नागदेवता मंदिर के निकट के वनों से 'खुरेत गाड़' के रूप में उद्गमित होती है और लगभग 8,000 फीट से अधिक की ऊँचाई पर स्थित है। ऋषिकेश के समीप होने के कारण इसका तटीय क्षेत्र इको-टूरिज्म और साहसिक खेलों के लिए भी खासा लोकप्रिय है।

संकट की शुरुआत और पुनर्जीवन अभियान

रिपोर्टों के अनुसार, कुछ वर्ष पूर्व हेवल नदी में जलस्तर लगातार घटने लगा था और आसपास के प्राकृतिक जल-स्रोत भी सूखते जा रहे थे। इस संकट के जवाब में भारतीय वन सेवा (IFS) के अधिकारी धर्म सिंह मीणा के नेतृत्व में वन विभाग और स्थानीय ग्रामीणों ने 2019-20 में 'हेवल नदी पुनर्जीवन' परियोजना शुरू की। इसे लैंडस्केप-बेस्ड रेस्टोरेशन मॉडल के अंतर्गत क्रियान्वित किया गया।

परियोजना की कार्यप्रणाली

इस अभियान के तहत पहाड़ी ढलानों पर विशेष संरचनाएँ और गड्ढे तैयार किए गए ताकि वर्षा जल बहने की बजाय भूमि में अवशोषित हो सके। साथ ही बड़े पैमाने पर पौधरोपण किया गया, जिससे वनाच्छादन पुनः बढ़े और भूजल-पुनर्भरण की प्रक्रिया स्वाभाविक रूप से मज़बूत हो। यह ऐसे समय में आया है जब हिमालयी नदियों के जल-संकट को लेकर वैज्ञानिक और नीति-निर्माता दोनों चिंतित हैं।

उपलब्धियाँ और व्यापक असर

वर्तमान में हेवल नदी में जल-प्रवाह पुनः स्थापित हो चुका है और दर्जनों प्राकृतिक जल-स्रोतों को भी इस पहल से नया जीवन मिला है। रत्तापानी और नीलकंठ रोड जैसे क्षेत्रों में लक्जरी रिवरसाइड कैंपिंग, इको-टूरिज्म और एडवेंचर गतिविधियाँ भी फल-फूल रही हैं, जिससे स्थानीय आजीविका को प्रत्यक्ष लाभ हुआ है। गौरतलब है कि यह पहल ग्राम-स्तरीय सहभागिता और सरकारी विशेषज्ञता के समन्वय का एक सफल नमूना मानी जा रही है।

आगे की राह

प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्रीय मंच पर इस प्रयास का उल्लेख किए जाने से देश के अन्य जल-संकटग्रस्त क्षेत्रों में भी इस मॉडल को अपनाने की प्रेरणा मिल सकती है। विशेषज्ञों का मानना है कि समुदाय-नेतृत्व वाले जलागम-प्रबंधन को यदि नीतिगत समर्थन और वित्तीय संसाधन मिलें, तो हिमालयी क्षेत्र की कई छोटी नदियाँ पुनर्जीवित हो सकती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि जमीन पर काम करने वाले वन अधिकारियों और ग्रामीणों की साझेदारी में है। मन की बात में इस पहल का उल्लेख सराहनीय है, लेकिन असली प्रश्न यह है कि क्या इस लैंडस्केप-बेस्ड मॉडल को उत्तराखंड की अन्य सूखती नदियों — जैसे कोसी, गोला या रामगंगा — तक व्यवस्थित रूप से विस्तारित किया जाएगा। एकल सफलता की राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा तभी सार्थक होगी, जब उसके पीछे नीतिगत प्रतिबद्धता और बजटीय आवंटन भी हो।
RashtraPress
25 अक्टूबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

हेवल नदी पुनर्जीवन परियोजना क्या है?
यह उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल में 2019-20 में शुरू की गई एक लैंडस्केप-बेस्ड रेस्टोरेशन परियोजना है, जिसे IFS अधिकारी धर्म सिंह मीणा के नेतृत्व में वन विभाग और ग्रामीणों ने मिलकर क्रियान्वित किया। इसके तहत वर्षा-जल संरक्षण, भूजल-पुनर्भरण और पौधरोपण के माध्यम से नदी का जलस्तर बहाल किया गया।
PM मोदी ने मन की बात में हेवल नदी का जिक्र क्यों किया?
प्रधानमंत्री मोदी ने 25 अक्टूबर 2026 को मन की बात के 139वें एपिसोड में इसे सामुदायिक पर्यावरण चेतना के प्रेरक उदाहरण के रूप में प्रस्तुत किया। उन्होंने इस पहल को स्थानीय प्रशासन और ग्रामीणों के संयुक्त प्रयास की सफलता का प्रमाण बताया।
हेवल नदी कहाँ स्थित है और इसका क्या महत्व है?
हेवल नदी उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल जिले में नरेंद्र नगर वन प्रभाग के अंतर्गत है और सुरकंडा देवी व नागदेवता मंदिर के पास के वनों से निकलती है। यह लगभग 8,000 फीट से अधिक की ऊँचाई पर है और ऋषिकेश के समीप होने के कारण इको-टूरिज्म के लिए भी महत्वपूर्ण है।
इस परियोजना से क्या परिणाम मिले?
परियोजना के परिणामस्वरूप हेवल नदी में जल-प्रवाह पुनः बहाल हुआ और दर्जनों प्राकृतिक जल-स्रोतों का पुनर्जीवन संभव हुआ। रत्तापानी और नीलकंठ रोड क्षेत्रों में इको-टूरिज्म और साहसिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिला है।
हेवल नदी का पुनर्जीवन मॉडल अन्य नदियों के लिए कैसे उपयोगी हो सकता है?
इस परियोजना में अपनाया गया लैंडस्केप-बेस्ड रेस्टोरेशन मॉडल — जिसमें सामुदायिक भागीदारी, वर्षा-जल संरक्षण और पौधरोपण का संयोजन है — को हिमालयी क्षेत्र की अन्य जल-संकटग्रस्त नदियों पर भी लागू किया जा सकता है। विशेषज्ञों के अनुसार यदि इसे नीतिगत समर्थन मिले तो यह एक प्रतिलिपि-योग्य प्रारूप बन सकता है।
राष्ट्र प्रेस
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