पश्चिम एशिया तनाव से सोना ₹1,55,437 के हाई पर, चांदी में 2.16% की उछाल — 11 अगस्त कमोडिटी अपडेट
सारांश
मुख्य बातें
अमेरिका और ईरान के बीच गहराते भू-राजनीतिक तनाव के बीच 11 अगस्त, मंगलवार को घरेलू कमोडिटी बाज़ार में सोने और चांदी की कीमतों में तेज उछाल दर्ज की गई। शुरुआती कारोबार में सोने ने 1.5 प्रतिशत से अधिक की बढ़त के साथ ₹2,000 से ज़्यादा की छलांग लगाई, जबकि चांदी 2 प्रतिशत से अधिक यानी ₹5,000 से ज़्यादा चढ़ गई।
सोने का भाव: इंट्रा-डे हाई और मौजूदा स्तर
अक्टूबर डिलीवरी वाला सोना अपने पिछले बंद स्तर ₹1,53,099 प्रति 10 ग्राम से ₹1,600 यानी 1.04 प्रतिशत की बढ़त के साथ ₹1,54,699 पर खुला। सत्र के दौरान इसने ₹2,338 (1.52 प्रतिशत) की तेज़ी के साथ ₹1,55,437 प्रति 10 ग्राम का इंट्रा-डे उच्च स्तर छुआ।
खबर लिखे जाने तक पीली धातु ₹895 (0.58 प्रतिशत) की बढ़त के साथ ₹1,53,994 प्रति 10 ग्राम पर कारोबार करती नज़र आई — दर्शाता है कि शुरुआती तेज़ी के बाद मुनाफावसूली का दबाव भी बना।
चांदी का हाल: तेज़ उछाल, फिर मामूली गिरावट
सितंबर डिलीवरी वाली चांदी पिछले बंद ₹2,36,867 प्रति किलोग्राम से ₹3,132 (1.32 प्रतिशत) की उछाल के साथ ₹2,39,999 पर खुली। दिन के दौरान इसने ₹5,132 (2.16 प्रतिशत) की बढ़त के साथ उच्चतम स्तर छुआ।
हालाँकि बाद में सफेद धातु ₹371 (0.16 प्रतिशत) की मामूली गिरावट के साथ ₹2,36,496 प्रति किलोग्राम पर आ गई, जो बाज़ार की अनिश्चितता को दर्शाता है।
कीमतों में तेज़ी के पीछे के कारण
विश्लेषकों के अनुसार, पश्चिम एशिया में बढ़ते भू-राजनीतिक जोखिम कीमती धातुओं की 'सेफ हेवन' माँग को हवा दे रहे हैं। इसके साथ ही अमेरिकी फेडरल रिज़र्व की उदार मौद्रिक नीति की बढ़ती उम्मीदें और डॉलर इंडेक्स में कमज़ोरी ने सोने की अपील को और मज़बूत किया है।
चांदी को औद्योगिक माँग और निवेशकों की बदलती प्राथमिकताओं से अतिरिक्त सहारा मिल रहा है। गौरतलब है कि मुद्रास्फीति के आँकड़ों और केंद्रीय बैंकों के संकेतों के प्रति बाज़ार की संवेदनशीलता बनी हुई है, जिससे कीमतों में तीव्र उतार-चढ़ाव की संभावना बरकरार है।
व्यापक अर्थव्यवस्था पर असर
सोने की ऊँची कीमतों का असर आभूषण उद्योग और खुदरा माँग पर पड़ रहा है। आलोचकों का कहना है कि यदि कीमतें इन स्तरों पर टिकी रहीं, तो त्योहारी सीज़न में उपभोक्ता माँग प्रभावित हो सकती है। यह ऐसे समय में आया है जब घरेलू बाज़ार पहले से ही वैश्विक अनिश्चितताओं से जूझ रहा है।
आगे क्या देखें
बाज़ार विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की स्थिति, अमेरिकी महँगाई दर के आँकड़े और फेड के नीतिगत संकेत कीमती धातुओं की दिशा तय करने में निर्णायक भूमिका निभाएँगे। इन सभी कारकों के संयोजन से बाज़ार में उठापटक जारी रहने की संभावना है।