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राष्ट्रपति मुर्मु ने चिसीनाउ में स्टीफन द ग्रेट स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की, मोल्दोवा में किसी भारतीय राष्ट्रपति का पहला दौरा

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राष्ट्रपति मुर्मु ने चिसीनाउ में स्टीफन द ग्रेट स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की, मोल्दोवा में किसी भारतीय राष्ट्रपति का पहला दौरा

सारांश

किसी भारतीय राष्ट्रपति की मोल्दोवा की पहली राजकीय यात्रा में द्रौपदी मुर्मु ने स्टीफन द ग्रेट स्मारक पर श्रद्धांजलि दी, राष्ट्रपति मैया सैंडू से द्विपक्षीय वार्ता की और बिजनेस फोरम में भारत की निवेश-अनुकूल छवि पेश की — पूर्वी यूरोप में भारत की कूटनीतिक पहुँच का विस्तार।

मुख्य बातें

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 20 जुलाई 2026 को चिसीनाउ में स्टीफन सेल मारे सी स्फांट स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की।
यह किसी भारतीय राष्ट्रपति की मोल्दोवा की पहली राजकीय यात्रा है।
राष्ट्रपति मुर्मु ने मोल्दोवा की राष्ट्रपति मैया सैंडू से चिसीनाउ राष्ट्रपति भवन में द्विपक्षीय वार्ता की।
भारत-मोल्दोवा बिजनेस फोरम को संबोधित करते हुए मुर्मु ने व्यापार और निवेश के नए अवसरों पर जोर दिया।
यह दौरा मोल्दोवा, नॉर्थ मैसेडोनिया और रोमानिया की त्रि-देशीय यात्रा का पहला पड़ाव है।
हवाई अड्डे पर मोल्दोवा के उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री मिहाई पोपशोई ने स्वागत किया।

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 20 जुलाई 2026 को मोल्दोवा की राजधानी चिसीनाउ में ऐतिहासिक 'स्टीफन सेल मारे सी स्फांट' स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की। यह किसी भारतीय राष्ट्रपति की मोल्दोवा की पहली राजकीय यात्रा है, जो दोनों देशों के बीच कूटनीतिक और आर्थिक संबंधों को नई ऊँचाई देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

स्टीफन सेल मारे: मोल्दोवा के महान रक्षक

स्थानीय सरकार के अनुसार, यह कांस्य प्रतिमा स्टीफन सेल मारे (द ग्रेट) की स्मृति में स्थापित की गई है, जिन्हें मोल्दोवा का सबसे महान शासक माना जाता है। उन्होंने 15वीं शताब्दी में तुर्की के आक्रमण के विरुद्ध देश की सफलतापूर्वक रक्षा की थी। विदेश मंत्रालय (MEA) ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर लिखा, "राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने चिसीनाउ में स्टीफन सेल मारे सी स्फांट स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित की। यह स्मारक देश के इतिहास में उनके अमूल्य योगदान की याद दिलाता है।"

ऐतिहासिक राजकीय यात्रा का पहला पड़ाव

राष्ट्रपति मुर्मु की यह यात्रा मोल्दोवा, नॉर्थ मैसेडोनिया और रोमानिया के त्रि-देशीय राजकीय दौरे का पहला चरण है। चिसीनाउ अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे पर उनका स्वागत मोल्दोवा के उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री मिहाई पोपशोई ने किया। राष्ट्रपति भवन में उन्हें औपचारिक गार्ड ऑफ ऑनर भी प्रदान किया गया। गौरतलब है कि इससे पहले किसी भारतीय राष्ट्राध्यक्ष ने मोल्दोवा की राजकीय यात्रा नहीं की थी।

राष्ट्रपति सैंडू से द्विपक्षीय वार्ता

राष्ट्रपति मुर्मु ने चिसीनाउ राष्ट्रपति भवन में मोल्दोवा की राष्ट्रपति मैया सैंडू से मुलाकात की। दोनों नेताओं ने भारत-मोल्दोवा के आपसी संबंधों की समीक्षा की और सहयोग को और मजबूत बनाने के मार्गों पर विचार-विमर्श किया। इस बैठक में विदेश मंत्रालय के सचिव (पश्चिम) सिबी जॉर्ज सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित रहे।

भारत-मोल्दोवा बिजनेस फोरम: व्यापार के नए द्वार

चिसीनाउ में आयोजित भारत-मोल्दोवा बिजनेस फोरम को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि भारत साझा समृद्धि और टिकाऊ आर्थिक विकास के लिए भरोसेमंद अंतरराष्ट्रीय साझेदारियों को अत्यंत महत्वपूर्ण मानता है। उन्होंने कहा, "भारत, मोल्दोवा की कंपनियों के लिए व्यापार और कारोबार के अच्छे अवसर देता है। हम पारदर्शी, भरोसेमंद और निवेशकों के लिए अनुकूल कारोबारी माहौल बनाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध हैं।" राष्ट्रपति के साथ आया भारतीय व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल इस प्रतिबद्धता का व्यावहारिक प्रमाण है।

आगे की राह: गहरे होते संबंध

राष्ट्रपति मुर्मु ने स्पष्ट किया कि यह यात्रा राजनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और लोगों के आपसी संबंधों को हर क्षेत्र में गहरा करने की भारत की व्यापक रणनीति का हिस्सा है। यह ऐसे समय में आया है जब भारत अपनी 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति से आगे बढ़कर पूर्वी यूरोप के देशों के साथ भी सक्रिय कूटनीतिक संबंध स्थापित कर रहा है। इस दौरे के बाद नॉर्थ मैसेडोनिया और रोमानिया की यात्राएँ भी प्रस्तावित हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो परंपरागत 'नेबरहुड फर्स्ट' से आगे की सोच दर्शाती है। हालाँकि मोल्दोवा एक छोटी अर्थव्यवस्था है, EU-एकीकरण की राह पर चल रहे इस देश के साथ संबंध भारत को यूरोपीय बाज़ार में एक नया प्रवेशद्वार दे सकते हैं। बिजनेस फोरम में व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल की उपस्थिति यह स्पष्ट करती है कि यह यात्रा केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि व्यावसायिक इरादों से भरी है। असली कसौटी यह होगी कि क्या इस दौरे के बाद ठोस निवेश समझौते और व्यापार समझौते सामने आते हैं।
RashtraPress
21 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु की मोल्दोवा यात्रा क्यों ऐतिहासिक है?
यह किसी भारतीय राष्ट्रपति की मोल्दोवा की पहली राजकीय यात्रा है। इससे पहले कोई भी भारतीय राष्ट्राध्यक्ष आधिकारिक दौरे पर मोल्दोवा नहीं गए थे, जो इस यात्रा को दोनों देशों के संबंधों में एक नया अध्याय बनाती है।
स्टीफन सेल मारे कौन थे और उनका स्मारक क्यों महत्वपूर्ण है?
स्थानीय सरकार के अनुसार, स्टीफन सेल मारे (द ग्रेट) को मोल्दोवा का सबसे महान शासक माना जाता है, जिन्होंने 15वीं शताब्दी में तुर्की के आक्रमण से देश की सफलतापूर्वक रक्षा की थी। चिसीनाउ में स्थित उनकी कांस्य प्रतिमा मोल्दोवा की राष्ट्रीय पहचान और गौरव का प्रतीक है।
राष्ट्रपति मुर्मु ने मोल्दोवा में किन नेताओं से मुलाकात की?
राष्ट्रपति मुर्मु ने चिसीनाउ राष्ट्रपति भवन में मोल्दोवा की राष्ट्रपति मैया सैंडू से द्विपक्षीय वार्ता की। इसके अलावा, हवाई अड्डे पर मोल्दोवा के उप प्रधानमंत्री एवं विदेश मंत्री मिहाई पोपशोई ने उनका स्वागत किया।
भारत-मोल्दोवा बिजनेस फोरम में क्या हुआ?
चिसीनाउ में आयोजित भारत-मोल्दोवा बिजनेस फोरम में राष्ट्रपति मुर्मु ने भारत को एक पारदर्शी और निवेशकों के लिए अनुकूल कारोबारी गंतव्य के रूप में प्रस्तुत किया। उनके साथ आए भारतीय व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल ने मोल्दोवा की आर्थिक संभावनाओं में रुचि दिखाई।
राष्ट्रपति मुर्मु की यूरोप यात्रा में और कौन-से देश शामिल हैं?
मोल्दोवा इस त्रि-देशीय राजकीय दौरे का पहला पड़ाव है। इसके बाद राष्ट्रपति मुर्मु नॉर्थ मैसेडोनिया और रोमानिया की यात्रा करेंगी।
राष्ट्र प्रेस
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