राष्ट्रपति मुर्मु ने स्कोप्जे में गोसे डेलचेव की समाधि पर अर्पित की पुष्पांजलि, उत्तर मैसेडोनिया से द्विपक्षीय संबंध मजबूत करने का संकल्प
सारांश
मुख्य बातें
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 22 जुलाई 2025 को उत्तर मैसेडोनिया की राजधानी स्कोप्जे स्थित चर्च ऑफ सेंट स्पास में क्रांतिकारी नेता और राष्ट्रीय नायक गोसे डेलचेव की समाधि पर पुष्पांजलि अर्पित की। यह भारत के किसी राष्ट्रपति की उत्तर मैसेडोनिया की पहली आधिकारिक राजकीय यात्रा है। इस दौरान उन्होंने उत्तर मैसेडोनिया की राष्ट्रपति गोर्डाना सिल्यानोव्स्का-दावकोवा के साथ व्यापक द्विपक्षीय वार्ता भी की।
गोसे डेलचेव को श्रद्धांजलि
चर्च ऑफ सेंट स्पास उत्तर मैसेडोनिया की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत का प्रतीक है, जहाँ गोसे डेलचेव की समाधि स्थित है। डेलचेव को उत्तर मैसेडोनिया में एक क्रांतिकारी नेता, स्वतंत्रता सेनानी और राष्ट्रीय नायक के रूप में सम्मान दिया जाता है। राष्ट्रपति मुर्मु का यह कदम भारत की ओर से मेज़बान देश की राष्ट्रीय भावनाओं और ऐतिहासिक पहचान के प्रति गहरे सम्मान का प्रतीक माना जा रहा है।
विला वोड्नो में शिखर वार्ता
पुष्पांजलि कार्यक्रम से पहले राष्ट्रपति मुर्मु और राष्ट्रपति सिल्यानोव्स्का-दावकोवा ने स्कोप्जे के विला वोड्नो में मुलाकात की। बैठक से पूर्व राष्ट्रपति मुर्मु का भव्य स्वागत किया गया और उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर दिया गया। दोनों नेताओं ने अर्थव्यवस्था, शिक्षा, विज्ञान, संस्कृति, पर्यटन, स्वास्थ्य सेवा और डिजिटल बदलाव जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर विस्तृत चर्चा की।
दोनों राष्ट्राध्यक्षों ने आपसी हित से जुड़े क्षेत्रीय एवं वैश्विक मुद्दों पर भी विचारों का आदान-प्रदान किया और भारत-उत्तर मैसेडोनिया संबंधों को और सुदृढ़ करने की प्रतिबद्धता दोहराई।
दावकोवा ने बताया 'महत्वपूर्ण कदम'
उत्तर मैसेडोनिया की राष्ट्रपति सिल्यानोव्स्का-दावकोवा ने राष्ट्रपति मुर्मु की इस यात्रा को दोनों देशों के बीच सहयोग बढ़ाने की दिशा में एक 'महत्वपूर्ण कदम' बताया। उन्होंने कहा, "भारत की पहली राष्ट्रपति के रूप में हमारे देश की आधिकारिक यात्रा पर आईं द्रौपदी मुर्मु का स्वागत करना मेरे लिए सम्मान की बात है। हमने मैसेडोनिया-भारत संबंधों पर चर्चा की, जिसमें अर्थव्यवस्था, शिक्षा, विज्ञान, संस्कृति, पर्यटन, स्वास्थ्य सेवा और डिजिटल बदलाव के क्षेत्रों में सहयोग की संभावनाओं पर विशेष ध्यान दिया गया।"
दावकोवा ने यह भी रेखांकित किया कि संत मदर टेरेसा की साझा मानवीय विरासत और गुटनिरपेक्ष आंदोलन का साझा अनुभव दोनों देशों के संबंधों के नए दौर के लिए एक मजबूत आधार प्रदान करता है।
तीन देशों की यात्रा का दूसरा पड़ाव
राष्ट्रपति मुर्मु की उत्तर मैसेडोनिया यात्रा उनके तीन देशों के दौरे का दूसरा चरण है। इससे पहले उन्होंने मोल्दोवा की यात्रा सफलतापूर्वक पूरी की थी। यह यात्रा ऐसे समय में हो रही है जब भारत यूरोप के छोटे और उभरते देशों के साथ अपने राजनयिक और आर्थिक संबंधों को व्यापक रूप देने की दिशा में सक्रिय है। गौरतलब है कि भारत के किसी राष्ट्रपति की यह उत्तर मैसेडोनिया की पहली राजकीय यात्रा है, जो दोनों देशों के रिश्तों में एक नए अध्याय की शुरुआत मानी जा रही है।