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यूपी महिला आयोग सदस्य प्रियंका मौर्य का अखिलेश पर तीखा वार: 'पत्नी के लिए एक शब्द नहीं बोल सके'

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यूपी महिला आयोग सदस्य प्रियंका मौर्य का अखिलेश पर तीखा वार: 'पत्नी के लिए एक शब्द नहीं बोल सके'

सारांश

यूपी राज्य महिला आयोग की सदस्य प्रियंका मौर्य ने अखिलेश यादव को घेरा — सवाल उठाया कि जो नेता मौलाना की आपत्तिजनक टिप्पणी पर अपनी पत्नी के लिए एक शब्द नहीं बोल सका, वह महिला सम्मान की बात करने का अधिकार कैसे रखता है। ₹40,000 के वादे और एनकाउंटर के आरोपों को भी उन्होंने सिरे से खारिज किया।

मुख्य बातें

प्रियंका मौर्य (यूपी राज्य महिला आयोग सदस्य) ने 1 सितंबर को अखिलेश यादव पर कड़ा प्रहार किया।
उन्होंने कहा कि अखिलेश मौलाना की आपत्तिजनक टिप्पणी पर अपनी पत्नी के लिए एक शब्द नहीं बोल सके।
अखिलेश के ₹40,000 देने के वादे को उन्होंने 'असली सम्मान' से भटकाव बताया।
सपा एमएलसी लालबिहारी यादव के 'कुत्ते' वाले बयान की कड़ी निंदा की।
एनकाउंटर के जाति-आधारित आरोपों को खारिज करते हुए कहा — 'केवल अपराधियों का एनकाउंटर हो रहा है।' धार्मिक नेताओं के महिला-विरोधी बयानों पर कहा — 'भारत में संविधान के अनुसार समान अधिकार मिलने चाहिए।'

उत्तर प्रदेश राज्य महिला आयोग की सदस्य प्रियंका मौर्य ने 1 सितंबर को समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने अखिलेश के जाति-आधारित एनकाउंटर के आरोपों, महिलाओं को ₹40,000 देने के चुनावी वादे और एसटीएफ के विरुद्ध उनकी टिप्पणियों को एक-एक कर खारिज किया। प्रियंका मौर्य ने यह भी सवाल उठाया कि जो नेता अपनी पत्नी के सम्मान की रक्षा नहीं कर सका, वह महिलाओं की बात करने का अधिकार कैसे रखता है।

अखिलेश और पत्नी के सम्मान पर सीधा सवाल

प्रियंका मौर्य ने कहा, 'महिलाओं के सम्मान की बात कौन कर रहा है? अखिलेश यादव? जो अपनी पत्नी के लिए एक शब्द भी नहीं बोल सकते, जो अपनी पत्नी के सम्मान के लिए तब खड़े नहीं हो सकते जब कोई मौलाना आकर उनकी पत्नी के बारे में बेतुकी बातें करता है? वे चुपचाप बैठे रहते हैं, जैसे मुंह पर ताला लगा हो।' उन्होंने आगे कहा, '₹40,000 मत दीजिए, लेकिन महिलाओं को सम्मान और बराबरी का अधिकार मिलना चाहिए।'

प्रियंका मौर्य के अनुसार, वर्तमान केंद्र सरकार के कार्यकाल में महिलाओं से सलाह ली जा रही है, उनके अधिकारों पर चर्चा हो रही है और संसद व विधानसभाओं में महिलाओं की समान भागीदारी का मुद्दा सक्रिय रूप से उठाया जा रहा है।

सपा नेता के 'कुत्ते' वाले बयान पर पलटवार

सपा एमएलसी लालबिहारी यादव के उस बयान पर — जिसमें कथित तौर पर कहा गया था कि 'कुत्ते के गले में भी पट्टा बांध दिया जाए तो उसे जिताना होगा' — प्रियंका मौर्य ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, 'क्या उनकी पार्टी के सभी लोग इसी श्रेणी में आते हैं? अगर वे किसी को टिकट देते हैं और जिता भी देते हैं, तो क्या वह जनता का विकास करेगा और महिलाओं को ₹40,000 देगा?' उन्होंने कहा कि जनता सब कुछ परखेगी और सही समय पर जवाब देगी।

एनकाउंटर पर अखिलेश के आरोपों का खंडन

अखिलेश यादव के जाति देखकर एनकाउंटर करने के आरोप पर प्रियंका मौर्य ने कहा कि शिवपाल यादव ने हाल ही में कहा था कि सत्ता में आने पर आज़म खान को गृह मंत्री बनाया जाएगा। उन्होंने तर्क दिया, 'अपराधियों को संरक्षण देने वाले ये सभी लोग समाजवादी पार्टी के ही हैं। जो एनकाउंटर हो रहे हैं, उनका इतिहास देखें — अपराधियों का ही एनकाउंटर किया जा रहा है।'

पीडीए और एसटीएफ पर अखिलेश की 'कन्फ्यूज़न'

अखिलेश यादव के पीडीए (पिछड़े, दलित, अल्पसंख्यक) और एसटीएफ जैसे संक्षिप्त रूपों के नए अर्थ निकालने की प्रवृत्ति पर प्रियंका मौर्य ने कहा, 'वे पूरी तरह कन्फ्यूज़्ड हैं। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष और उनकी पूरी पार्टी बस हर शब्द का फुल फॉर्म बनाने में लगी है।' उन्होंने कहा कि अखिलेश यादव सत्ता के लिए बेताब हैं और उनके दिलो-दिमाग में बस यही है कि सत्ता पाने के लिए जो भी करना पड़े, वे करें।

धार्मिक नेताओं के बयानों पर प्रतिक्रिया

ऑल इंडिया इमाम एसोसिएशन के अध्यक्ष मौलाना साजिद रशीदी और देश के ग्रैंड मुफ्ती शेख अबूबकर अहमद की ओर से महिलाओं को लेकर दिए गए बयानों पर प्रियंका मौर्य ने कहा, 'यह हिंदुस्तान है और यहाँ संविधान के अनुसार महिलाओं और पुरुषों को समान अधिकार मिलने चाहिए। जो लोग इस तरह के बयान दे रहे हैं, उनकी सोच संविधान के विरुद्ध है।' उन्होंने कहा कि भारत में रहने वाले हर व्यक्ति को भारतीय संविधान का सम्मान करना होगा।

प्रियंका मौर्य के इन बयानों से राजनीतिक गलियारों में हलचल मच गई है और आने वाले दिनों में समाजवादी पार्टी की प्रतिक्रिया पर सबकी निगाहें टिकी रहेंगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

उसका स्वतंत्र सत्यापन ज़रूरी है। धार्मिक नेताओं पर की गई टिप्पणियाँ संवैधानिक आलोचना की सीमा लाँघती प्रतीत होती हैं और विवाद को और गहरा कर सकती हैं। असली सवाल यह है कि क्या यह बहस महिलाओं के ठोस मुद्दों — सुरक्षा, रोज़गार, स्वास्थ्य — पर केंद्रित है, या केवल चुनावी मौसम की वाकयुद्ध बन कर रह जाएगी।
RashtraPress
1 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रियंका मौर्य ने अखिलेश यादव पर क्या आरोप लगाए?
यूपी राज्य महिला आयोग की सदस्य प्रियंका मौर्य ने कहा कि अखिलेश यादव एक मौलाना की आपत्तिजनक टिप्पणी पर अपनी पत्नी के सम्मान की रक्षा के लिए एक शब्द भी नहीं बोल सके। उन्होंने अखिलेश के ₹40,000 के वादे और जाति-आधारित एनकाउंटर के आरोपों को भी बेबुनियाद बताया।
अखिलेश यादव के ₹40,000 वाले वादे पर प्रियंका मौर्य ने क्या कहा?
प्रियंका मौर्य ने कहा कि महिलाओं को पैसे नहीं, सम्मान और बराबरी का अधिकार चाहिए। उनके अनुसार ₹40,000 का वादा असली मुद्दों से ध्यान भटकाने की कोशिश है।
सपा एमएलसी लालबिहारी यादव के बयान पर क्या विवाद हुआ?
सपा एमएलसी लालबिहारी यादव ने कथित तौर पर कहा था कि 'कुत्ते के गले में भी पट्टा बांध दिया जाए तो उसे जिताना होगा।' प्रियंका मौर्य ने इस पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए सवाल किया कि क्या सपा के सभी नेता इसी श्रेणी में आते हैं।
यूपी एनकाउंटर पर जाति-भेद के आरोपों पर प्रियंका मौर्य का क्या कहना है?
प्रियंका मौर्य ने अखिलेश यादव के जाति-आधारित एनकाउंटर के आरोपों को खारिज किया। उन्होंने कहा कि शिवपाल यादव खुद आज़म खान को गृह मंत्री बनाने की बात कर चुके हैं, और एनकाउंटर केवल अपराधियों के हुए हैं।
प्रियंका मौर्य ने धार्मिक नेताओं के बयानों पर क्या प्रतिक्रिया दी?
मौलाना साजिद रशीदी और ग्रैंड मुफ्ती शेख अबूबकर अहमद के महिलाओं से जुड़े बयानों पर प्रियंका मौर्य ने कहा कि भारत में संविधान के अनुसार महिला-पुरुष को समान अधिकार मिलने चाहिए और संविधान-विरोधी सोच यहाँ नहीं चलेगी।
राष्ट्र प्रेस
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