पुणे के 38,970 किसानों का ₹345.25 करोड़ का कर्ज माफ, फडणवीस ने खरीफ ऋण का भी रास्ता खोला
सारांश
मुख्य बातें
पुण्यश्लोक अहिल्यादेवी होलकर किसान कर्जमाफी योजना 2026 के अंतर्गत पुणे जिले के 38,970 पात्र किसानों को ₹345 करोड़ 25 लाख 5 हजार 594 रुपए की ऋण राहत मिली है। 8 अगस्त 2026 को मुंबई स्थित सह्याद्री अतिथिगृह में आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आधार प्रमाणीकरण पूर्ण कर चुके किसानों के बैंक खातों में यह राशि ऑनलाइन माध्यम से सीधे हस्तांतरित की। कर्जमाफी के तत्काल बाद बैंकों को खरीफ फसल ऋण उपलब्ध कराने के निर्देश भी दे दिए गए हैं।
योजना का विवरण और राशि हस्तांतरण
पुणे जिले के इन किसानों पर बकाया कुल ₹345 करोड़ 25 लाख 5 हजार 594 रुपए की राशि सीधे संबंधित बैंकों को हस्तांतरित की गई, जिससे पात्र किसानों के ऋण खाते शून्य हो गए। यह हस्तांतरण ऑनलाइन प्रणाली के ज़रिए किया गया, जिससे पारदर्शिता सुनिश्चित हुई।
राज्य सरकार के निर्देशानुसार, जिन किसानों का आधार प्रमाणीकरण अभी तक पूरा नहीं हुआ है, वे संबंधित व्यवस्था से संपर्क कर यह प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं। प्रमाणीकरण पूर्ण होते ही उनके ऋण खातों में भी पात्रता के अनुसार राशि हस्तांतरित की जाएगी।
खरीफ ऋण का रास्ता साफ
कर्जमाफी का लाभ मिलने के बाद अब पात्र किसान नए सिरे से खरीफ फसल ऋण ले सकेंगे। सरकार ने बैंकों को निर्देश दिए हैं कि कर्जमाफी के तुरंत बाद इन किसानों को खरीफ सीजन के लिए आवश्यक ऋण उपलब्ध कराया जाए। यह कदम किसानों को न केवल पुराने बोझ से मुक्ति दिलाता है, बल्कि आगामी फसल चक्र के लिए आर्थिक आधार भी प्रदान करता है।
राज्यव्यापी आँकड़े
पुणे जिले के अलावा, पूरे महाराष्ट्र में इस योजना के तहत आधार प्रमाणीकरण पूर्ण कर चुके लगभग 6 लाख 22 हजार पात्र किसानों के ऋण खातों में ₹5,028 करोड़ की राशि हस्तांतरित की गई है। यह आँकड़ा दर्शाता है कि यह योजना महाराष्ट्र के कृषि क्षेत्र में व्यापक राहत का माध्यम बन रही है।
कार्यक्रम में उपस्थित प्रमुख अधिकारी
इस अवसर पर उपमुख्यमंत्री सुनेत्रा अजित पवार, सहकारिता मंत्री बाबासाहेब पाटील, कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे, जल संसाधन मंत्री गिरीश महाजन, पर्यावरण मंत्री पंकजा मुंडे, पर्यटन मंत्री शंभूराज देसाई, वस्त्रोद्योग मंत्री संजय सावकारे, राज्यमंत्री मेघना बोर्डीकर, मुख्य सचिव राजेश अग्रवाल, अपर मुख्य सचिव लोकेश चंद्रा, प्रधान सचिव डॉ. श्रीकर परदेशी, सहकारिता विभाग के प्रधान सचिव प्रवीण दराडे और सहकारिता आयुक्त दीपक तावड़े उपस्थित थे।
इसके अतिरिक्त, सभी पालकमंत्री, जिलाधिकारी और सहकारी संस्थाओं के रजिस्ट्रार वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से कार्यक्रम से जुड़े। यह व्यापक सहभागिता योजना के क्रियान्वयन में राज्य सरकार की प्राथमिकता को रेखांकित करती है।