पुणे पुलिस कमिश्नर का सुप्रिया सुले को डेटा से जवाब, NCRB में शहर 18वें स्थान पर
सारांश
मुख्य बातें
पुणे पुलिस आयुक्त अमितेश कुमार ने 2 जून 2026 को एक 9 पन्नों का विस्तृत पत्र जारी करते हुए राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (शरद पवार गुट) की सांसद सुप्रिया सुले के उस बयान का बिंदुवार खंडन किया, जिसमें उन्होंने पुणे को 'अपराधियों की राजधानी' कहा था। आधिकारिक आँकड़ों के हवाले से कमिश्नर ने दावा किया कि 1 जनवरी से 27 मई 2026 के बीच शहर में अपराध की प्रमुख श्रेणियों में उल्लेखनीय गिरावट दर्ज की गई है।
विवाद की पृष्ठभूमि
यह राजनीतिक टकराव पुणे में हाल ही में हुई अवैध शराब त्रासदी के बाद सामने आया, जिसमें 21 लोगों की मौत हो गई थी। इस घटना के बाद सांसद सुले ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में पुलिस प्रशासन पर तीखा हमला बोला और पुलिस कमिश्नर को अनिवार्य छुट्टी पर भेजने की माँग की। यह ऐसे समय में आया है जब मई महीने में 10 दिनों के भीतर पाँच बड़ी आपराधिक घटनाएँ सामने आने से शहर में असुरक्षा की भावना बढ़ी थी।
कमिश्नर के आँकड़े: क्या कहता है डेटा
कमिश्नर अमितेश कुमार ने 1 जनवरी से 27 मई 2026 के बीच के आँकड़े पेश करते हुए बताया कि चेन स्नैचिंग में 56%, वाहनों में तोड़फोड़ में 50% से अधिक, लूट में 36%, वाहन चोरी में 28%, हत्या के प्रयास में 27%, सेंधमारी में 14% और हत्या में 10.5% की कमी आई है।
उन्होंने यह भी बताया कि हाल ही में दर्ज हत्या की 10 घटनाओं में से 6 घरेलू विवादों से जुड़ी थीं, जो सुनियोजित आपराधिक गतिविधि की बजाय पारिवारिक संघर्ष की ओर इशारा करती हैं।
NCRB रैंकिंग और कड़ी कार्रवाई
राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) की रैंकिंग का हवाला देते हुए कमिश्नर ने बताया कि संज्ञेय अपराधों के मामले में भारत के 19 प्रमुख महानगरों में पुणे 18वें स्थान पर है, जो इसे देश के सबसे सुरक्षित शहरों में शामिल करता है।
संगठित अपराध पर नकेल कसने के लिए पुलिस ने 200 मामलों में 1,000 से अधिक अपराधियों के खिलाफ महाराष्ट्र संगठित अपराध नियंत्रण अधिनियम (MCOCA) के तहत कार्रवाई की। लगभग 250 व्यक्तियों पर महाराष्ट्र खतरनाक गतिविधियाँ निवारण अधिनियम (MPDA) लगाया गया और 500 अपराधियों को शहर की सीमा से बाहर (तड़ीपार) किया गया। इसके अलावा पिछले दो वर्षों में ₹20 करोड़ की नशीली दवाएँ जब्त की गईं और 2024 में ₹3,700 करोड़ के एक अंतरराष्ट्रीय ड्रग रैकेट का भंडाफोड़ किया गया।
सोशल मीडिया और अफवाहों पर चेतावनी
कमिश्नर ने अपने पत्र में लिखा, 'हम हमेशा रचनात्मक आलोचना का स्वागत करते हैं। हालाँकि, सोशल मीडिया पर गलत आँकड़े प्रसारित करने से नागरिकों के बीच अविश्वास का माहौल पैदा होता है, जिसका फायदा असामाजिक तत्व उठाते हैं। इससे शहर की बदनामी होती है और पुलिस बल का मनोबल गिरता है।'
उन्होंने बकरी ईद से पहले 'लॉकडाउन' की अफवाहों को भी खारिज किया और स्पष्ट किया कि रात 10 बजे के बाद पाबंदियाँ केवल अस्थायी स्टॉलों और सड़क किनारे के विक्रेताओं पर लागू होती हैं — लाइसेंस प्राप्त प्रतिष्ठान इससे अप्रभावित हैं।
आगे की राह
कमिश्नर ने सभी नागरिकों और जनप्रतिनिधियों से अपील की कि पुणे की 'आईटी और शिक्षा केंद्र' की पहचान को बनाए रखने के लिए पुलिस बल का मार्गदर्शन करें और उसका समर्थन करें। गौरतलब है कि मई में बढ़ी घटनाओं के बाद गश्त तुरंत बढ़ाई गई थी। अब यह देखना होगा कि सुले और विपक्ष इन आँकड़ों को स्वीकार करते हैं या स्वतंत्र सत्यापन की माँग जारी रखते हैं।