ई-20 पेट्रोल पर पंजाब विधानसभा का बड़ा फैसला, केंद्र से अनिवार्य लागू करने पर रोक की माँग
सारांश
मुख्य बातें
पंजाब विधानसभा ने 4 अगस्त 2026 को एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पारित कर केंद्र सरकार से अपील की कि वह उन वाहनों पर ई-20 पेट्रोल के अनिवार्य उपयोग को तत्काल स्थगित करे, जिन्हें मूल रूप से इस ईंधन के लिए डिज़ाइन या प्रमाणित नहीं किया गया था। वित्त मंत्री हरपाल सिंह चीमा द्वारा पेश किए गए इस प्रस्ताव में कहा गया कि कम्पैटिबिलिटी, उपभोक्ता सुरक्षा और राज्यों की चिंताओं का पूर्ण समाधान होने तक यह रोक जारी रहनी चाहिए।
प्रस्ताव की मुख्य माँगें
विधानसभा ने स्पष्ट किया कि ई-20 पेट्रोल — जिसमें 20% एथेनॉल का मिश्रण होता है — को अनिवार्य करने का निर्णय मूल रूप से तय 2030 की समय-सीमा से पाँच वर्ष पहले ही लागू कर दिया गया। सदन का तर्क था कि इससे वाहन निर्माताओं, नागरिकों और किसानों को इस बदलाव के लिए पर्याप्त तैयारी का अवसर नहीं मिला।
प्रस्ताव में यह भी कहा गया कि ग्राहकों को किसी भी ईंधन के उपयोग के लिए तब तक बाध्य नहीं किया जाना चाहिए, जब तक कि स्वतंत्र वैज्ञानिक मूल्यांकन के ज़रिए माइलेज, इंजन की आयु, रखरखाव की आवश्यकताओं और कुल लागत पर उसके प्रभाव को पूरी तरह पारदर्शी न बना दिया जाए।
वाहनों और उपभोक्ताओं पर संभावित असर
सदन ने रेखांकित किया कि देशभर में — और विशेष रूप से पंजाब में — लाखों वाहन ई-20 कम्पैटिबल इंजन मानक लागू होने से पहले ही निर्मित हो चुके हैं। अनिवार्य उपयोग से उत्पन्न होने वाली चिंताओं में शामिल हैं:
इंजन की कम्पैटिबिलिटी संबंधी समस्याएँ, फ्यूल सिस्टम के पुर्जों का तेज़ी से घिसाव, माइलेज और ईंधन दक्षता में गिरावट, रखरखाव खर्च में वृद्धि, वारंटी विवाद और वाहनों की पुनर्विक्रय मूल्य में कमी।
प्रस्ताव में कहा गया, "इसके कारण सबसे ज़्यादा आर्थिक बोझ मध्यमवर्गीय परिवारों, किसानों, ट्रांसपोर्टरों, छोटे कारोबारियों, कर्मचारियों, छात्रों और रोज़ाना यात्रा करने वालों पर पड़ेगा।"
कृषि और खाद्य सुरक्षा की चिंता
सदन ने राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा में पंजाब के अहम योगदान और राज्य की पर्यावरण व भूजल संबंधी चुनौतियों का उल्लेख करते हुए कहा कि "पंजाब को ऐसी नीतियाँ लागू करने से पहले सार्थक बातचीत का पूरा अधिकार है, जिनका दूरगामी आर्थिक और पर्यावरणीय असर हो सकता है।"
यह भी कहा गया कि परिचालन और परिवहन लागत बढ़ने से खेती की लागत और आवश्यक वस्तुओं की ढुलाई का खर्च बढ़ सकता है, जिसका बोझ अंततः आम नागरिकों पर पड़ेगा।
राष्ट्रीय लक्ष्यों से सहमति, लागू करने के तरीके पर आपत्ति
विधानसभा ने स्पष्ट किया कि वह कच्चे तेल पर निर्भरता घटाने, ऊर्जा सुरक्षा को मज़बूत करने और पर्यावरण अनुकूल ईंधन को बढ़ावा देने जैसे राष्ट्रीय लक्ष्यों से सहमत है। हालाँकि, सदन का आग्रह था कि ऐसी नीतियाँ पारदर्शी और वैज्ञानिक पद्धति से लागू की जाएँ और नागरिकों तथा राज्य सरकारों के प्रति संवेदनशीलता बरती जाए।
यह प्रस्ताव ऐसे समय में आया है जब देशभर में एथेनॉल सम्मिश्रण कार्यक्रम को लेकर राज्यों और उपभोक्ता संगठनों की ओर से सवाल उठ रहे हैं। अब केंद्र सरकार की प्रतिक्रिया पर सभी की निगाहें टिकी हैं।