छऊ गुरु पंडित श्यामा चरण पति की छठी पुण्यतिथि: पद्मश्री से सम्मानित झारखंड के महान नृत्य-साधक
सारांश
मुख्य बातें
छऊ नृत्य के अग्रणी कलाकार और गुरु पंडित श्यामा चरण पति की छठी पुण्यतिथि गुरुवार, 28 अक्टूबर 2026 को पूरे देश में उनके चाहने वालों और शिष्यों द्वारा श्रद्धापूर्वक मनाई जा रही है। झारखंड की सरायकेला-खरसावां परंपरा के इस महान नर्तक ने छऊ नृत्य को अंतरराष्ट्रीय मंचों तक पहुँचाने में जो भूमिका निभाई, वह भारतीय शास्त्रीय कला के इतिहास में अमिट है।
कौन थे पंडित श्यामा चरण पति
पंडित श्यामा चरण पति का जन्म वर्ष 1940 में झारखंड के सरायकेला-खरसावां जिले के ईचा गाँव में एक सामान्य ब्राह्मण परिवार में हुआ था। तीन भाइयों में सबसे छोटे श्यामा चरण को बचपन से ही शास्त्रीय नृत्य के प्रति गहरी रुचि थी। उन्होंने गुरु बन बिहारी आचार्य के सान्निध्य में छऊ के साथ-साथ जमशेदपुर में कथक और भरतनाट्यम का भी गहन प्रशिक्षण प्राप्त किया।
छऊ नृत्य को अंतरराष्ट्रीय पहचान दिलाई
छऊ एक अर्ध-शास्त्रीय नृत्य शैली है, जिसकी जड़ें मार्शल आर्ट्स, लोक और जनजातीय परंपराओं में हैं। यह नृत्य रूप मुख्यतः झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिशा में प्रचलित है। पंडित श्यामा चरण पति ने सरायकेला छऊ के प्रमुख नर्तक के रूप में इस कला को अंतरराष्ट्रीय मंचों तक ले जाने में अभूतपूर्व योगदान दिया। वे भारतीय सांस्कृतिक संबंध परिषद (ICCR) की छऊ नृत्य मंडली से जुड़े रहे और देश-विदेश में इस विधा का प्रतिनिधित्व किया।
गौरतलब है कि सरायकेला छऊ अपनी मुखौटा-आधारित प्रस्तुति शैली के लिए विश्वभर में जानी जाती है, जो इसे अन्य नृत्य रूपों से विशिष्ट बनाती है। पंडित पति ने इस परंपरा को न केवल जीवंत रखा, बल्कि नई पीढ़ी तक सफलतापूर्वक हस्तांतरित भी किया।
संस्थाओं में अहम भूमिका
पंडित श्यामा चरण पति केवल मंच के कलाकार नहीं थे — वे एक संस्था-निर्माता भी थे। उन्होंने केंद्रीय विश्वविद्यालय, झारखंड की गवर्निंग बॉडी के सदस्य के रूप में कार्य किया और कला शिक्षा को संस्थागत रूप देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह ऐसे समय में आया जब छऊ को औपचारिक अकादमिक ढाँचे में स्थान दिलाना आसान नहीं था।
पद्मश्री और विरासत
छऊ नृत्य को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर प्रतिष्ठित कराने के उनके अथक प्रयासों के लिए भारत सरकार ने वर्ष 2006 में उन्हें देश के प्रतिष्ठित नागरिक सम्मान पद्मश्री से अलंकृत किया। 29 अक्टूबर 2020 को 80 वर्ष की आयु में रांची के एक अस्पताल में उनका निधन हो गया।
उनके दो बच्चे हैं — सुस्मिता पति और देवाशीष पति। उनकी पुत्री सुस्मिता पति अपने पिता की विरासत को आगे बढ़ाते हुए स्वयं एक कुशल छऊ नृत्यांगना के रूप में सक्रिय हैं।
आगे की राह और स्मृति
पंडित श्यामा चरण पति का जाना भारतीय शास्त्रीय नृत्य जगत के लिए एक अपूरणीय क्षति थी, लेकिन उनके शिष्य और पुत्री सुस्मिता इस परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं। उनकी पुण्यतिथि पर देशभर के कला-प्रेमी और उनके शिष्य उन्हें नमन करते हैं — एक ऐसे गुरु को, जिन्होंने एक क्षेत्रीय नृत्य विधा को वैश्विक मंच पर गौरव दिलाया।