उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने थेवर को श्रद्धांजलि दी, गांधीग्राम इंस्टीट्यूट के स्वर्ण जयंती व 39वें दीक्षांत समारोह में हुए शामिल
सारांश
मुख्य बातें
उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन ने 30 अक्टूबर 2026 को तमिलनाडु दौरे के दौरान महान स्वतंत्रता सेनानी पासुमपोंग मुथुरामलिंग थेवर की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित की और डिंडीगुल स्थित गांधीग्राम रूरल इंस्टीट्यूट (डीम्ड यूनिवर्सिटी) के स्वर्ण जयंती समारोह एवं 39वें दीक्षांत समारोह में भाग लिया। यह दौरा सामाजिक न्याय, ग्रामीण शिक्षा और राष्ट्रीय विरासत — तीनों विषयों को एक साथ रेखांकित करने वाला रहा।
थेवर स्मारक पर श्रद्धांजलि
उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने रामनाथपुरम जिले के पासुमपोंग में स्थित थेवर थिरुमगन के स्मारक पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। भारत के उपराष्ट्रपति के आधिकारिक एक्स हैंडल पर इस अवसर की जानकारी साझा करते हुए लिखा गया कि यह आयोजन थेवर की जयंती और गुरु पूजा के अवसर पर हुआ।
उपराष्ट्रपति ने कहा, 'पासुमपोंग मुथुरामलिंग थेवर ऐसे व्यक्ति थे, जिन्होंने अपने सिद्धांतों के साथ कभी कोई समझौता नहीं किया। उन्होंने अपने पूरे जीवन में ईमानदारी, सादगी और सम्मानपूर्ण जीवन का पालन किया।' उन्होंने यह भी कहा, 'जब उन्होंने यह घोषणा की कि वे मदुरै मीनाक्षी अम्मन मंदिर में वंचित वर्गों के प्रवेश के संघर्ष का नेतृत्व करेंगे, चाहे कोई भी इसे रोकने की कोशिश करे, तभी यह संघर्ष सफलतापूर्वक संपन्न हो सका।' राधाकृष्णन ने थेवर की विरासत को अमर बताते हुए कहा कि जब तक यह धरती रहेगी, तब तक उनकी ख्याति भी कायम रहेगी।
मानद डॉक्टरेट से सम्मानित हुई विभूतियाँ
गांधीग्राम रूरल इंस्टीट्यूट के 39वें दीक्षांत समारोह में उपराष्ट्रपति ने तीन著名 विभूतियों को मानद डॉक्टरेट (ऑनरिस कॉसा) से विभूषित किया। ये हैं — आध्यात्मिक गुरु और तमिल विद्वान थवथिरु कुंद्रकुडी पोन्नम्बाला आदिगलार, इसरो के पूर्व वरिष्ठ एयरोस्पेस वैज्ञानिक एस. नाम्बी नारायणन और प्रख्यात शिक्षाविद प्रोफेसर एस. एस. एम. सुंदरम।
यह सम्मान इन तीनों को क्रमशः आध्यात्मिकता एवं तमिल विद्वता, विज्ञान और शिक्षा के क्षेत्र में उनके बहुमूल्य योगदान के लिए दिया गया। गौरतलब है कि नाम्बी नारायणन का नाम भारतीय अंतरिक्ष कार्यक्रम के इतिहास में विशेष महत्त्व रखता है।
स्वर्ण जयंती: नई इमारतें, नई परियोजनाएँ
स्वर्ण जयंती समारोह के अवसर पर उपराष्ट्रपति ने दो नई इमारतों का उद्घाटन किया और तीन नई परियोजनाओं की आधारशिला रखी, जिनमें 30 कक्षाओं वाला एक नया शैक्षणिक परिसर भी सम्मिलित है। उन्होंने 'इनक्लूसिविटी ऑफ इंडियाज एजिंग पॉपुलेशन' नामक पुस्तक का विमोचन किया तथा स्वर्ण जयंती के उपलक्ष्य में एक डाक टिकट और पोस्टल कवर भी जारी किया।
समारोह में उपराष्ट्रपति ने मेधावी छात्रों को स्वर्ण पदक प्रदान किए। इस दौरान उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों में तमिलनाडु के राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ अर्लेकर, कुलाधिपति डॉ. के. एम. अन्नामलाई और कुलपति डॉ. एन. पंचनाथन शामिल रहे।
विकसित भारत की नींव विकसित गाँव: राधाकृष्णन
उपराष्ट्रपति ने अपने संबोधन में कहा कि 'विकसित भारत 2047' की शुरुआत विकसित गाँवों से होती है। उन्होंने पिछले 12 वर्षों में ग्रामीण बुनियादी ढाँचे और मूलभूत सुविधाओं में हुई उल्लेखनीय प्रगति का उल्लेख किया।
यह ऐसे समय में आया है जब सरकार ग्रामीण-शहरी विकास के अंतर को पाटने पर लगातार ज़ोर दे रही है। राधाकृष्णन ने ग्रामीण क्षेत्रों के हर नागरिक के लिए बेहतर अवसर और सम्मानजनक जीवन सुनिश्चित करने का आह्वान किया — जो गांधीग्राम इंस्टीट्यूट के संस्थापक दर्शन के अनुरूप भी है।