हल्द्वानी FIR: राहुल गांधी पर UP के चार मंत्रियों का हमला, कपिल देव बोले — 'चाय में भी जाति खोज रहे'
सारांश
मुख्य बातें
लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी के खिलाफ हल्द्वानी में जातिगत टिप्पणी को लेकर दर्ज एफआईआर के बाद उत्तर प्रदेश सरकार के चार वरिष्ठ मंत्रियों ने 31 अगस्त को लखनऊ में कड़ी प्रतिक्रिया दी। दयाशंकर सिंह, जेपीएस राठौड़, कपिल देव अग्रवाल और धर्मपाल प्रजापति ने राहुल गांधी पर गैर-जिम्मेदाराना राजनीति करने का आरोप लगाते हुए उनकी कार्यशैली को विपक्ष के नेता पद के अनुरूप नहीं बताया।
कपिल देव अग्रवाल का तंज — 'चाय में भी जाति'
मंत्री कपिल देव अग्रवाल ने राहुल गांधी को नेता प्रतिपक्ष के रूप में 'बेहद गैर-जिम्मेदार' करार दिया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी जाति और धर्म जैसे संवेदनशील मुद्दों पर अनावश्यक बयानबाजी करते रहते हैं। अग्रवाल ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, 'राहुल गांधी अब चाय में भी जाति तलाश रहे हैं।' उनका सवाल था कि आमतौर पर चाय पीने या बेचने वाले व्यक्ति की जाति पूछने की आवश्यकता ही क्यों होती है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस (कांग्रेस) के पास कोई स्पष्ट राजनीतिक एजेंडा नहीं है और राहुल गांधी ने पार्टी को नुकसान पहुँचाया है।
कांग्रेस और समाजवादी पार्टी के संभावित गठबंधन पर भी अग्रवाल ने तंज कसा। उन्होंने कहा कि यदि भविष्य में दोनों दल साथ आते हैं, तो यह गठबंधन राजनीतिक रूप से नुकसानदेह साबित होगा और जो भी दल राहुल गांधी के साथ जुड़ेगा, उसकी स्थिति भी कमज़ोर होगी।
दयाशंकर सिंह — 'देश-विदेश में भारत की छवि धूमिल'
मंत्री दयाशंकर सिंह ने राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए कहा कि वह न केवल देश के भीतर, बल्कि विदेशों में भी ऐसे बयान और गतिविधियाँ करते हैं जिनसे भारत के सम्मान और स्वाभिमान को ठेस पहुँचती है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी की राजनीतिक कार्यशैली में इस तरह की प्रवृत्ति लगातार देखी जाती रही है।
जेपीएस राठौड़ — कांग्रेस के पुराने रिकॉर्ड का हवाला
मंत्री जेपीएस राठौड़ ने एफआईआर के संदर्भ में कांग्रेस के ऐतिहासिक आचरण का उल्लेख किया। उन्होंने वाराणसी की एक घटना का उदाहरण दिया, जिसमें उनके अनुसार बाबू जगजीवन राम द्वारा संपूर्णानंद की प्रतिमा का अनावरण किए जाने के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने उस प्रतिमा को धोया था। राठौड़ ने कहा कि यदि कांग्रेस भेदभाव के मामलों को मुद्दा बनाना चाहती है, तो उसे पहले अपने कार्यकर्ताओं के व्यवहार पर ध्यान देना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय जनता पार्टी (BJP) का इस मामले से कोई संबंध नहीं है।
धर्मपाल प्रजापति — 'नेता प्रतिपक्ष में गंभीरता ज़रूरी'
मंत्री धर्मपाल प्रजापति ने कहा कि विपक्ष के नेता के पद पर बैठे व्यक्ति में गंभीरता और जिम्मेदारी का भाव होना अनिवार्य है। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी के बयानों में वह परिपक्वता दिखाई नहीं देती जो इस संवैधानिक पद की गरिमा के अनुरूप होनी चाहिए।
आगे क्या
हल्द्वानी में दर्ज एफआईआर पर कानूनी प्रक्रिया जारी है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब जाति-आधारित जनगणना और आरक्षण के मुद्दे राष्ट्रीय राजनीतिक विमर्श के केंद्र में हैं। आलोचकों का कहना है कि सत्तारूढ़ दल और विपक्ष दोनों जाति की राजनीति को अपने-अपने तरीके से भुनाने में लगे हैं।