राजभर का अखिलेश पर प्रहार: 'सपा आतंकराज' में दलितों पर जुल्म का जिलेवार हिसाब देने की चेतावनी
सारांश
मुख्य बातें
उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने 14 जुलाई को समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। राजभर ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर 'सपा का आतंकराज — पार्ट 1' शीर्षक से पोस्ट जारी करते हुए आरोप लगाया कि सपा शासनकाल में दलितों और पिछड़े वर्गों पर व्यवस्थित अत्याचार हुए। उन्होंने चेतावनी दी कि वे एक-एक जिले का हिसाब जनता के सामने रखेंगे।
मुख्य आरोप: सीतापुर की दो घटनाएँ
राजभर ने अपनी पोस्ट में सीतापुर की दो अलग-अलग घटनाओं का उल्लेख किया। उनके अनुसार, 8 मार्च 2016 को सीतापुर के रेवसा क्षेत्र के बिंबिया गाँव में दलितों के 13 घर जला दिए गए — कथित तौर पर इसलिए क्योंकि उस बस्ती के लोगों ने सपा को वोट नहीं दिया था। राजभर के अनुसार, यह घटना 6 मार्च 2012 को सपा को सत्ता का जनादेश मिलने के महज दो दिन बाद हुई थी।
दूसरी घटना का संदर्भ देते हुए राजभर ने लिखा कि 21 दिसंबर 2015 को लहरपुर थाने के पट्टी देहलिया गाँव में दलित बस्ती के 35 घर जलाए गए। उनका आरोप है कि यह घटना प्रधानी चुनाव में सपा प्रत्याशी को वोट न देने की 'सजा' के रूप में की गई, जिसमें दो मासूम दलित बच्चे कथित तौर पर जिंदा जला दिए गए।
राजभर की भाषा और राजनीतिक संदेश
राजभर ने अपनी पोस्ट में लिखा — 'याद कीजिए, जनादेश मिलते ही आप लोगों का दलितों-पिछड़ों के खिलाफ नंगा नाच शुरू हो गया था।' उन्होंने सपा शासन को 'मुगलिया बर्बरता' और 'जंगलराज' की संज्ञा दी। राजभर ने कहा कि ये घटनाएँ याद आते ही अति पिछड़ों का खून खौल उठता है और दलित भाइयों की आत्मा काँप जाती है।
उन्होंने सीधे अखिलेश यादव को संबोधित करते हुए कहा — 'तैयार रहिए, एक-एक जिले का बराबर हिसाब लूंगा आपसे।' यह पोस्ट उनकी घोषित श्रृंखला का पहला भाग है, जिसमें वे रोज़ एक जनपद की घटना उठाने का इरादा रखते हैं।
राजनीतिक पृष्ठभूमि
यह हमला ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारियाँ प्रारंभिक चरण में हैं और दलित-पिछड़ा वोट बैंक सभी दलों की प्राथमिकता बना हुआ है। गौरतलब है कि सुभासपा वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा है, जबकि सपा मुख्य विपक्षी दल की भूमिका में है।
राजभर पहले भी सपा के शासनकाल पर इसी तरह के आरोप लगाते रहे हैं। इससे पहले उन्होंने बुलंदशहर की एक घटना का भी उल्लेख किया था, जिसे उन्होंने 'निंदनीय' बताया था। यह क्रमबद्ध अभियान स्पष्ट रूप से दलित और पिछड़े मतदाताओं को सपा से दूर करने की रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है।
सपा की प्रतिक्रिया
राजभर के आरोपों पर समाजवादी पार्टी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राष्ट्र प्रेस ने सपा प्रवक्ता से टिप्पणी माँगी है।
आगे क्या
राजभर ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान जारी रहेगा और वे प्रत्येक जिले की घटनाओं को क्रमशः सार्वजनिक करेंगे। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या सपा इन आरोपों का खंडन करती है या चुप्पी साधे रहती है — दोनों ही स्थितियाँ राजनीतिक रूप से निर्णायक साबित हो सकती हैं।