14 जुलाई 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

राजभर का अखिलेश पर प्रहार: 'सपा आतंकराज' में दलितों पर जुल्म का जिलेवार हिसाब देने की चेतावनी

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
राजभर का अखिलेश पर प्रहार: 'सपा आतंकराज' में दलितों पर जुल्म का जिलेवार हिसाब देने की चेतावनी

सारांश

सुभासपा प्रमुख ओमप्रकाश राजभर ने 'सपा आतंकराज — पार्ट 1' पोस्ट से अखिलेश यादव पर सीधा हमला बोला — सीतापुर में दलित बस्तियाँ जलाने के पुराने आरोपों को हथियार बनाकर। यह महज एक पोस्ट नहीं, बल्कि 2027 चुनाव से पहले दलित-पिछड़ा वोट बैंक को साधने की सुनियोजित रणनीति की शुरुआत है।

मुख्य बातें

ओमप्रकाश राजभर ने 14 जुलाई को एक्स पर 'सपा का आतंकराज — पार्ट 1' शीर्षक पोस्ट जारी कर अखिलेश यादव पर निशाना साधा।
राजभर के अनुसार, 8 मार्च 2016 को सीतापुर के बिंबिया गाँव में दलितों के 13 घर जलाए गए — कथित तौर पर वोट न देने की सजा के रूप में।
21 दिसंबर 2015 को पट्टी देहलिया गाँव में दलित बस्ती के 35 घर जलाए गए और कथित तौर पर दो मासूम बच्चे जिंदा जला दिए गए।
राजभर ने घोषणा की कि वे रोज़ एक जिले की घटना उठाकर सपा शासनकाल का हिसाब जनता के सामने रखेंगे।
यह अभियान 2027 विधानसभा चुनाव से पहले दलित-पिछड़े मतदाताओं को प्रभावित करने की रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है।

उत्तर प्रदेश के कैबिनेट मंत्री और सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी (सुभासपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष ओमप्रकाश राजभर ने 14 जुलाई को समाजवादी पार्टी (सपा) के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव पर तीखा राजनीतिक हमला बोला। राजभर ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर 'सपा का आतंकराज — पार्ट 1' शीर्षक से पोस्ट जारी करते हुए आरोप लगाया कि सपा शासनकाल में दलितों और पिछड़े वर्गों पर व्यवस्थित अत्याचार हुए। उन्होंने चेतावनी दी कि वे एक-एक जिले का हिसाब जनता के सामने रखेंगे।

मुख्य आरोप: सीतापुर की दो घटनाएँ

राजभर ने अपनी पोस्ट में सीतापुर की दो अलग-अलग घटनाओं का उल्लेख किया। उनके अनुसार, 8 मार्च 2016 को सीतापुर के रेवसा क्षेत्र के बिंबिया गाँव में दलितों के 13 घर जला दिए गए — कथित तौर पर इसलिए क्योंकि उस बस्ती के लोगों ने सपा को वोट नहीं दिया था। राजभर के अनुसार, यह घटना 6 मार्च 2012 को सपा को सत्ता का जनादेश मिलने के महज दो दिन बाद हुई थी।

दूसरी घटना का संदर्भ देते हुए राजभर ने लिखा कि 21 दिसंबर 2015 को लहरपुर थाने के पट्टी देहलिया गाँव में दलित बस्ती के 35 घर जलाए गए। उनका आरोप है कि यह घटना प्रधानी चुनाव में सपा प्रत्याशी को वोट न देने की 'सजा' के रूप में की गई, जिसमें दो मासूम दलित बच्चे कथित तौर पर जिंदा जला दिए गए।

राजभर की भाषा और राजनीतिक संदेश

राजभर ने अपनी पोस्ट में लिखा — 'याद कीजिए, जनादेश मिलते ही आप लोगों का दलितों-पिछड़ों के खिलाफ नंगा नाच शुरू हो गया था।' उन्होंने सपा शासन को 'मुगलिया बर्बरता' और 'जंगलराज' की संज्ञा दी। राजभर ने कहा कि ये घटनाएँ याद आते ही अति पिछड़ों का खून खौल उठता है और दलित भाइयों की आत्मा काँप जाती है।

उन्होंने सीधे अखिलेश यादव को संबोधित करते हुए कहा — 'तैयार रहिए, एक-एक जिले का बराबर हिसाब लूंगा आपसे।' यह पोस्ट उनकी घोषित श्रृंखला का पहला भाग है, जिसमें वे रोज़ एक जनपद की घटना उठाने का इरादा रखते हैं।

राजनीतिक पृष्ठभूमि

यह हमला ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश में 2027 के विधानसभा चुनावों की तैयारियाँ प्रारंभिक चरण में हैं और दलित-पिछड़ा वोट बैंक सभी दलों की प्राथमिकता बना हुआ है। गौरतलब है कि सुभासपा वर्तमान में भारतीय जनता पार्टी (BJP) के नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा है, जबकि सपा मुख्य विपक्षी दल की भूमिका में है।

राजभर पहले भी सपा के शासनकाल पर इसी तरह के आरोप लगाते रहे हैं। इससे पहले उन्होंने बुलंदशहर की एक घटना का भी उल्लेख किया था, जिसे उन्होंने 'निंदनीय' बताया था। यह क्रमबद्ध अभियान स्पष्ट रूप से दलित और पिछड़े मतदाताओं को सपा से दूर करने की रणनीति का हिस्सा प्रतीत होता है।

सपा की प्रतिक्रिया

राजभर के आरोपों पर समाजवादी पार्टी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राष्ट्र प्रेस ने सपा प्रवक्ता से टिप्पणी माँगी है।

आगे क्या

राजभर ने स्पष्ट किया है कि यह अभियान जारी रहेगा और वे प्रत्येक जिले की घटनाओं को क्रमशः सार्वजनिक करेंगे। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि क्या सपा इन आरोपों का खंडन करती है या चुप्पी साधे रहती है — दोनों ही स्थितियाँ राजनीतिक रूप से निर्णायक साबित हो सकती हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि 2027 के लिए दलित-पिछड़ा वोट बैंक को पुनर्गठित करने की सुनियोजित रणनीति है — जो BJP गठबंधन को उस जमीन पर मज़बूत करना चाहती है जहाँ सपा की पकड़ रही है। विडंबना यह है कि जिन घटनाओं का हवाला दिया जा रहा है, वे एक दशक पुरानी हैं — सवाल उठता है कि इतने वर्षों में इनका राजनीतिक उपयोग क्यों नहीं हुआ। सपा की चुप्पी भी उतनी ही राजनीतिक है — खंडन करने पर घटनाएँ फिर चर्चा में आएँगी, न करने पर आरोप स्थापित होते दिखेंगे। मुख्यधारा की कवरेज जो अक्सर चूकती है वह यह है कि राजभर का यह 'जिलेवार हिसाब' अभियान दरअसल सुभासपा की अपनी प्रासंगिकता बनाए रखने की कोशिश भी है।
RashtraPress
14 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

ओमप्रकाश राजभर ने अखिलेश यादव पर क्या आरोप लगाए हैं?
राजभर ने आरोप लगाया है कि सपा शासनकाल में दलितों और पिछड़ों पर व्यवस्थित अत्याचार हुए — विशेष रूप से वोट न देने पर दलित बस्तियाँ जलाई गईं। उन्होंने सीतापुर की दो घटनाओं — 2016 में 13 घर और 2015 में 35 घर जलाने — का हवाला दिया।
'सपा आतंकराज — पार्ट 1' पोस्ट में क्या है?
यह राजभर द्वारा एक्स पर शुरू की गई क्रमबद्ध श्रृंखला का पहला भाग है, जिसमें वे सपा शासनकाल की जिलेवार घटनाओं को सार्वजनिक करने का इरादा रखते हैं। इस पोस्ट में उन्होंने सीतापुर की दो अलग-अलग आगजनी की घटनाओं का विस्तृत विवरण दिया।
सीतापुर की किन घटनाओं का राजभर ने उल्लेख किया?
राजभर ने 8 मार्च 2016 को बिंबिया गाँव में 13 दलित घर जलाने और 21 दिसंबर 2015 को पट्टी देहलिया गाँव में 35 घर जलाने की घटनाओं का उल्लेख किया। दूसरी घटना में कथित तौर पर दो मासूम बच्चे भी जिंदा जला दिए गए थे।
इस राजनीतिक हमले का उद्देश्य क्या है?
राजभर स्पष्ट रूप से 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले दलित और अति पिछड़े मतदाताओं को सपा से दूर करने की कोशिश कर रहे हैं। सुभासपा वर्तमान में BJP नेतृत्व वाले गठबंधन का हिस्सा है।
सपा ने राजभर के आरोपों पर क्या कहा?
राजभर की पोस्ट के बाद समाजवादी पार्टी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। पार्टी की चुप्पी को भी राजनीतिक रूप से महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम 13 मिनट पहले
  2. कल
  3. 1 सप्ताह पहले
  4. 1 सप्ताह पहले
  5. 2 सप्ताह पहले
  6. 1 महीना पहले
  7. 1 महीना पहले
  8. 1 महीना पहले