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राम मंदिर CEO जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति पर कांग्रेस के सवाल, वीएचपी और किरण बेदी ने किया स्वागत

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राम मंदिर CEO जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति पर कांग्रेस के सवाल, वीएचपी और किरण बेदी ने किया स्वागत

सारांश

राम मंदिर ट्रस्ट में एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) जितेंद्र मिश्रा की CEO नियुक्ति ने सियासी बहस छेड़ दी है। वीएचपी और किरण बेदी ने इसे प्रशासनिक सुधार बताया, जबकि कांग्रेस ने पारदर्शिता और धार्मिक प्रतिनिधित्व को लेकर सवाल उठाए।

मुख्य बातें

एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) जितेंद्र मिश्रा को राम मंदिर ट्रस्ट का नया CEO नियुक्त किया गया है।
कांग्रेस नेता राजेश ठाकुर ने मंदिर में कथित चंदा गबन के पुराने आरोपों और PMO की भूमिका का हवाला देते हुए नियुक्ति पर सवाल उठाए।
वीएचपी महासचिव बजरंग लाल बांगड़ा ने नियुक्ति को मंदिर प्रशासन के व्यावसायीकरण की दिशा में ज़रूरी कदम बताया।
पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी ने कहा कि सैन्य अनुभव मंदिर में अनुशासन, ईमानदारी और संगठन को मजबूत करेगा।
चंपत राय की ट्रस्ट में संभावित वापसी पर बांगड़ा ने कहा — 'जब समय आएगा, फैसला होगा।'

अयोध्या राम मंदिर ट्रस्ट में एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) जितेंद्र मिश्रा की मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के रूप में नियुक्ति ने राजनीतिक और सामाजिक हलकों में तीखी बहस छेड़ दी है। जहाँ विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) और पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी ने इस फैसले को मंदिर प्रशासन के व्यावसायीकरण की दिशा में सकारात्मक कदम बताया, वहीं कांग्रेस ने पुराने आरोपों और नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल खड़े किए हैं।

कांग्रेस की आपत्तियाँ और सवाल

रांची में कांग्रेस नेता राजेश ठाकुर ने कहा कि राम मंदिर में पहले चंदे की कथित चोरी और गबन के आरोप सामने आए थे। उन्होंने प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की भूमिका को लेकर भी पहले उठे सवालों का हवाला दिया और कहा कि ऐसे समय में जब मंदिर और धार्मिक क्षेत्र से सीधे तौर पर न जुड़े लोगों की नियुक्ति हो रही है, तो स्वाभाविक रूप से संदेह उत्पन्न होता है।

हालाँकि ठाकुर ने जितेंद्र मिश्रा के एयर मार्शल के रूप में अर्जित सम्मान को स्वीकार करते हुए कहा कि उन्हें अपनी प्रतिष्ठा बनाए रखनी चाहिए। कांग्रेस नेता ने यह भी कहा कि मंदिर प्रबंधन में धार्मिक क्षेत्र से जुड़े लोगों को उचित प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) से जुड़े व्यक्तियों को ट्रस्ट में स्थान दिए जाने का उन्होंने विरोध किया।

वीएचपी का स्वागत और तर्क

अयोध्या में वीएचपी के महासचिव बजरंग लाल बांगड़ा ने नियुक्ति को मंदिर प्रशासन को अधिक सशक्त और व्यवस्थित बनाने की दिशा में उठाया गया ज़रूरी कदम बताया। उन्होंने कहा कि मंदिर का आकार और उससे जुड़ी प्रबंधन की जटिलताएँ काफी बढ़ गई हैं, जिसके चलते प्रशासन को पेशेवर बनाने की आवश्यकता महसूस हुई।

बांगड़ा ने बताया कि नए अधिकारी, ट्रस्टी, कोषाध्यक्ष और महासचिव अपनी-अपनी जिम्मेदारियाँ संभाल रहे हैं और मंदिर से जुड़े विभिन्न कार्यों की प्राथमिकताओं पर चर्चा शुरू हो गई है। उन्होंने स्पष्ट किया कि ये कोई औपचारिक बैठकें नहीं हैं, बल्कि मंदिर के नियमित कामकाज से जुड़ी बैठकें हैं जो निरंतर चलती रहेंगी।

चंपत राय और भविष्य की नियुक्तियों पर बांगड़ा का जवाब

जब बांगड़ा से महंत कमल नयन दास के उस बयान के बारे में पूछा गया जिसमें कहा गया था कि चंपत राय को समय आने पर ट्रस्ट में शामिल किया जाएगा, तो उन्होंने कहा कि यह सब प्रभु राम की इच्छा और उनकी लीला के अनुसार हो रहा है। उन्होंने कहा, 'जब समय आएगा, तब इस बारे में फैसला होगा।'

विपक्ष के विरोध पर बांगड़ा ने कहा कि विपक्ष अपना कर्तव्य निभा रहा है और हर काम का विरोध करना उसकी आदत बन गई है। उन्होंने कहा कि अभी केवल नियुक्ति हुई है — सीईओ काम शुरू करेंगे और फिर उनके कार्यों का आकलन होगा।

किरण बेदी ने बताया 'अच्छा निर्णय'

नई दिल्ली में पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी ने नियुक्ति का खुलकर स्वागत किया। उन्होंने कहा कि वायुसेना जैसे वरिष्ठ पद से आए एक वर्दीधारी अधिकारी को मंदिर प्रबंधन की जिम्मेदारी मिलने से सकारात्मक बदलाव की उम्मीद है। बेदी के अनुसार, सैन्य सेवा का अनुभव मंदिर प्रशासन में ईमानदारी, अनुशासन, निगरानी, टीमवर्क और निर्धारित प्रक्रियाओं को मजबूत करने में सहायक होगा।

उन्होंने कहा कि जितेंद्र मिश्रा अपने साथ व्यापक अनुभव लेकर आ रहे हैं और ठीक इसी तरह के अनुभव की मंदिर को आवश्यकता थी। किरण बेदी ने इसे 'अच्छा निर्णय' बताते हुए अपना समर्थन जताया।

आगे क्या होगा

जितेंद्र मिश्रा के कार्यभार संभालने के बाद मंदिर प्रशासन की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर सभी की नज़रें टिकी रहेंगी। राजनीतिक विवाद के बीच यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि नया नेतृत्व पुराने आरोपों की छाया से बाहर निकलकर मंदिर प्रबंधन को किस दिशा में ले जाता है।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन असली सवाल यह है कि क्या यह कदम पारदर्शिता की उस माँग को पूरा करता है जो कथित चंदा अनियमितताओं के बाद उठी थी। कांग्रेस की आपत्ति महज राजनीतिक विरोध नहीं है — धार्मिक संस्थाओं के प्रबंधन में धार्मिक प्रतिनिधित्व बनाम तकनीकी दक्षता का यह तनाव एक वैध बहस है। वीएचपी और किरण बेदी का उत्साह स्वाभाविक है, किंतु मंदिर की विश्वसनीयता तभी मजबूत होगी जब नया नेतृत्व वित्तीय जवाबदेही का स्पष्ट ढाँचा स्थापित करे — न कि केवल अनुशासन और संगठन की भाषा बोले।
RashtraPress
3 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम मंदिर ट्रस्ट के नए CEO कौन हैं?
एयर मार्शल (सेवानिवृत्त) जितेंद्र मिश्रा को राम मंदिर ट्रस्ट का नया मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) नियुक्त किया गया है। वे वायुसेना में वरिष्ठ पद से सेवानिवृत्त हुए हैं।
कांग्रेस ने राम मंदिर CEO नियुक्ति पर क्यों सवाल उठाए?
कांग्रेस नेता राजेश ठाकुर ने मंदिर में पहले हुई कथित चंदा चोरी और गबन के आरोपों का हवाला देते हुए नियुक्ति प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठाए। उन्होंने यह भी कहा कि मंदिर और धार्मिक क्षेत्र से सीधे न जुड़े लोगों की नियुक्ति पर स्वाभाविक रूप से संदेह उत्पन्न होता है।
वीएचपी ने जितेंद्र मिश्रा की नियुक्ति का स्वागत क्यों किया?
वीएचपी महासचिव बजरंग लाल बांगड़ा ने कहा कि मंदिर का आकार और प्रबंधन की जटिलताएँ बढ़ने के कारण प्रशासन को पेशेवर बनाना ज़रूरी था। उनके अनुसार, यह नियुक्ति मंदिर को अधिक सशक्त और व्यवस्थित बनाने की दिशा में उठाया गया सही कदम है।
किरण बेदी ने नई नियुक्ति के बारे में क्या कहा?
पूर्व आईपीएस अधिकारी किरण बेदी ने नियुक्ति को 'अच्छा निर्णय' बताया। उनका कहना था कि सैन्य सेवा का अनुभव मंदिर प्रशासन में ईमानदारी, अनुशासन, निगरानी और टीमवर्क को मजबूत करने में सहायक होगा।
क्या चंपत राय राम मंदिर ट्रस्ट में वापस आएँगे?
वीएचपी महासचिव बजरंग लाल बांगड़ा ने महंत कमल नयन दास के उस बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यह सब प्रभु राम की इच्छा के अनुसार होगा और जब समय आएगा तब फैसला होगा। अभी इस पर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है।
राष्ट्र प्रेस
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