राम मंदिर चढ़ावा चोरी: RSS के बयान पर कांग्रेस का पलटवार, खेड़ा बोले — 'मुंह में राम, बगल में छुरी'
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद पवन खेड़ा ने 3 जुलाई को अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के मामले में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले के बयान पर तीखा पलटवार किया। खेड़ा ने आरोप लगाया कि संघ का यह बयान सच्चाई उजागर करने की कोशिश नहीं, बल्कि अपनी छवि बचाने का प्रयास है।
कांग्रेस का आरोप: छवि बचाने की कोशिश
खेड़ा ने कहा कि RSS 'भेड़ की खाल ओढ़े भेड़िया' है। उनके अनुसार, होसबाले का बयान करोड़ों श्रद्धालुओं के दान की लूट का सच सामने लाने के लिए नहीं, बल्कि 'सच्चाई पर पर्दा डालकर संघ की छवि बचाने का कुत्सित प्रयास' है।
खेड़ा ने यह भी कहा कि इस बयान का असली मकसद उत्तर प्रदेश सरकार की उस विशेष जांच दल (SIT) को वैध ठहराना है, जिसका गठन कथित तौर पर FIR दर्ज होने से पहले ही कर दिया गया था।
SIT की कार्यप्रणाली पर सवाल
कांग्रेस सांसद ने आरोप लगाया कि SIT ने जांच रिपोर्ट सार्वजनिक किए बगैर अत्यंत गोपनीय तरीके से काम किया है। उन्होंने कहा कि इससे ऐसा प्रतीत होता है कि 'बड़े मगरमच्छों को बचाकर छोटी मछलियों की बलि' दी जाएगी।
गौरतलब है कि यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब राम मंदिर के प्रशासन और पारदर्शिता को लेकर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं। खेड़ा ने तर्क दिया कि यदि संघ वास्तव में ईमानदार होता, तो जिस मंदिर की व्यवस्था उसके लोग देखते हैं, वहां इतनी बड़ी चोरी नहीं होती।
होसबाले का मूल बयान
इससे पहले RSS सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने कहा था कि अयोध्या में श्री रामलला मंदिर के दान पात्रों में जमा राशि की चोरी की 'दुर्भाग्यपूर्ण घटना' से समूचे समाज और रामभक्तों की भावना को गहरा आघात पहुंचा है।
होसबाले ने कहा कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र न्यास के आग्रह पर उत्तर प्रदेश सरकार ने SIT का गठन कर कानूनी प्रक्रिया शुरू की है। उन्होंने कहा कि 'जो भी दोषी पाए जाएंगे उन्हें कठोर दंड मिलना चाहिए।'
संघ ने हिंदू समाज से 'धैर्य और संयम' बनाए रखने तथा इस घटना का लाभ उठाकर 'हिंदू विरोधी शक्तियों के षड्यंत्रों को विफल करने' का आह्वान भी किया।
राजनीतिक टकराव की पृष्ठभूमि
यह विवाद ऐसे समय में तेज हुआ है जब राम मंदिर से जुड़े प्रशासनिक मामले राजनीतिक रूप से संवेदनशील बने हुए हैं। कांग्रेस लगातार मंदिर प्रशासन में पारदर्शिता की मांग करती रही है, जबकि BJP और RSS इसे हिंदू आस्था का प्रतीक मानते हैं।
आगे क्या होगा
SIT की जांच अभी जारी है और रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। इस मामले में राजनीतिक तनाव आने वाले दिनों में और बढ़ने की संभावना है, खासकर तब जब विपक्ष जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठा रहा है।