राम मंदिर चढ़ावा प्रकरण: इमरान मसूद ने SIT जांच में पारदर्शिता की मांग की, योगी के बयान को भी नकारा
सारांश
मुख्य बातें
कांग्रेस सांसद इमरान मसूद ने 15 जुलाई 2026 को राम मंदिर चढ़ावा चोरी प्रकरण में चल रही SIT जांच पर गंभीर सवाल उठाए और जांच प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता की मांग की। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि समाजवादी पार्टी (सपा)-कांग्रेस गठबंधन का अंतिम निर्णय दोनों दलों के शीर्ष नेतृत्व का अधिकार है।
राम मंदिर चढ़ावा मामले में SIT पर सवाल
इमरान मसूद ने कहा कि इस प्रकरण में एफआईआर स्वयं ट्रस्ट की ओर से दर्ज कराई गई थी, जबकि चोरी के आरोप भी ट्रस्ट से जुड़े व्यक्तियों पर ही लगाए जा रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया, "अगर आरोप गंभीर हैं तो SIT ने अब तक अलग से एफआईआर क्यों दर्ज नहीं की।" उनके अनुसार, किसी भी संस्था से जुड़े मामले में कानून के अनुसार निष्पक्ष कार्रवाई होनी चाहिए और जांच में पारदर्शिता अनिवार्य है।
योगी के रामलीला-कांवड़ बयान पर प्रतिक्रिया
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा था कि जिन लोगों ने कभी रामलीला और कांवड़ यात्रा पर रोक लगाई, वे अब आस्था की बात कर रहे हैं। इस पर इमरान मसूद ने कहा कि उन्हें ऐसी किसी रोक की जानकारी नहीं है। उन्होंने कहा, "रामलीला हमेशा समाज के सभी वर्गों के लिए रही है और इसके मंचन में कभी कलाकारों या दर्शकों को धर्म के आधार पर नहीं देखा गया।" उनके अनुसार धार्मिक आयोजनों को राजनीतिक विवाद का विषय नहीं बनाया जाना चाहिए।
भोजशाला मामले पर संयमित रुख
धार भोजशाला विवाद में सर्वोच्च न्यायालय द्वारा नोटिस जारी किए जाने और उच्च न्यायालय के आदेश को बरकरार रखे जाने पर इमरान मसूद ने न्यायालय के फैसले पर सीधी टिप्पणी से परहेज किया। हालांकि, उन्होंने कहा कि 800 वर्षों से चली आ रही एक परंपरा समाप्त कर दी गई है। उन्होंने जोर दिया कि भारत में सभी नागरिकों को समान अधिकार प्राप्त हैं और हर समुदाय की भावनाओं का सम्मान होना चाहिए।
सपा-कांग्रेस गठबंधन पर स्पष्टीकरण
गठबंधन को लेकर चल रही बयानबाजी पर इमरान मसूद ने कहा कि गठबंधन का अंतिम निर्णय कांग्रेस नेतृत्व और समाजवादी पार्टी के नेतृत्व को लेना है, न कि उन्हें। उन्होंने कहा, "अगर गठबंधन की बात हो रही है तो उसे जमीन पर भी दिखाई देना चाहिए — केवल टीवी बहस और बयानों तक सीमित रहने वाले गठबंधन का कोई मतलब नहीं है।"
चुनावी आंकड़ों से दिया तर्क
इमरान मसूद ने सीट बंटवारे पर तर्क देते हुए बताया कि 2014 में सपा ने अकेले चुनाव लड़कर 5 सीटें जीती थीं। 2019 में सपा-बसपा गठबंधन के बावजूद सीटों की संख्या 5 ही रही, जबकि 2024 में कांग्रेस-सपा गठबंधन ने मिलकर 37 सीटें हासिल कीं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि कांग्रेस को केवल 17 सीटें दी गई थीं, तो मुख्यमंत्री पद की आकांक्षा रखने वालों को भी उसी तरह सहयोग और समझदारी दिखानी चाहिए। आगे की राजनीतिक दिशा इस बात पर निर्भर करेगी कि दोनों दल जमीनी स्तर पर किस हद तक एकजुट दिखते हैं।