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राम मंदिर चढ़ावा विवाद: SIT जांच निष्पक्ष, ओवैसी का बयान भड़काऊ — महामंडलेश्वर करौली शंकर महाराज

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राम मंदिर चढ़ावा विवाद: SIT जांच निष्पक्ष, ओवैसी का बयान भड़काऊ — महामंडलेश्वर करौली शंकर महाराज

सारांश

राम मंदिर ट्रस्ट के कथित चढ़ावा विवाद पर ओवैसी की टिप्पणी को महामंडलेश्वर करौली शंकर महाराज ने सामाजिक सौहार्द के लिए खतरनाक बताया। उन्होंने SIT जांच को संवैधानिक और निष्पक्ष करार देते हुए कहा कि मंदिर को राजनीतिक हथियार बनाना अस्वीकार्य है।

मुख्य बातें

महामंडलेश्वर करौली शंकर महाराज ने 30 जून को हरिद्वार में AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी के बयान की कड़ी निंदा की।
ओवैसी ने कथित तौर पर कहा था कि ट्रस्ट में मुस्लिम होता तो एनकाउंटर होता; महाराज ने इसे भड़काऊ और राजनीति-प्रेरित बताया।
SIT का गठन हो चुका है, जांच के दौरान कई रिकवरी हुई हैं और प्रक्रिया पूरी तरह संवैधानिक है।
महाराज ने कहा कि बैंक रिकॉर्ड और वित्तीय दस्तावेजों की गहन जांच स्वाभाविक है और दोषी पाए जाने पर कानूनी कार्रवाई होगी।
उन्होंने श्रीराम मंदिर के भविष्य के प्रबंधन में अधिक पारदर्शिता और कड़ी निगरानी की अपेक्षा जताई।

हरिद्वार में 30 जून को महामंडलेश्वर करौली शंकर महाराज ने राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कथित चढ़ावा गड़बड़ी मामले में ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी की हालिया टिप्पणी को सामाजिक सौहार्द के लिए हानिकारक बताते हुए कड़ी आपत्ति जताई। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस प्रकरण में गठित विशेष जांच दल (SIT) पूरी तरह संवैधानिक प्रक्रिया के अंतर्गत निष्पक्ष जांच कर रहा है और कई रिकवरी भी हो चुकी हैं।

ओवैसी के बयान पर तीखी प्रतिक्रिया

ओवैसी ने कथित तौर पर कहा था कि यदि ट्रस्ट में कोई मुस्लिम होता तो उसका एनकाउंटर कर दिया जाता। इस पर करौली शंकर महाराज ने कहा कि ओवैसी की भाषा में 'गोली मार दो', 'लूट लो', 'फांसी पर चढ़ा दो' जैसे शब्द रहे हैं, जो किसी सभ्य समाज की सोच नहीं हो सकती। उन्होंने कहा, 'देशभर में लाखों मुस्लिम विभिन्न सरकारी और निजी संस्थानों में सेवाएं दे रहे हैं। यदि कहीं वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो कानून के अनुसार कार्रवाई होती है, न कि किसी का एनकाउंटर किया जाता है।'

महामंडलेश्वर ने यह भी कहा कि ऐसा कोई दृष्टांत नहीं है जिसमें केवल मुस्लिम होने के कारण किसी व्यक्ति को गोली मारी गई हो। उनके अनुसार, इस तरह के बयान हिंदुओं को भड़काने और राजनीतिक लाभ उठाने का प्रयास मात्र हैं।

व्यंग्यात्मक टिप्पणी और संभावित मंशा पर सवाल

करौली शंकर महाराज ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा कि संभव है ओवैसी अपने संगठन के अनुभव के आधार पर ऐसी बातें कह रहे हों — यदि उनके यहाँ कोई हिंदू सदस्य होता और गड़बड़ी होती, तो शायद वे उसी तरह की कार्रवाई की कल्पना करते। उन्होंने इस बयान को 'केवल मामले को उकसाने और विवाद पैदा करने वाला' करार दिया।

SIT जांच और संवैधानिक प्रक्रिया

महामंडलेश्वर ने स्पष्ट किया कि राम मंदिर प्रकरण में चल रही कार्रवाई पूर्णतः संवैधानिक है। उन्होंने कहा कि SIT का गठन हो चुका है, जांच के दौरान कई रिकवरी भी हुई हैं और प्रशासन अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है। यह एक आर्थिक लेन-देन का मामला है, इसलिए बैंक रिकॉर्ड और वित्तीय दस्तावेजों की गहन जांच स्वाभाविक है। उन्होंने कहा कि जिन लोगों से व्यवस्था ठीक से नहीं संभली, उन्हें हटाना प्रशासनिक प्रक्रिया का हिस्सा है।

राजनीतिक दलों पर आरोप

महामंडलेश्वर ने कहा कि कुछ राजनीतिक दलों और नेताओं के पास सरकार को घेरने के लिए कोई ठोस मुद्दा नहीं है, इसलिए वे राम मंदिर से जुड़े कथित वित्तीय विवाद को आधार बनाकर मंदिर और उससे जुड़े संस्थानों की छवि खराब करने का प्रयास कर रहे हैं। उनके अनुसार, सनातन परंपरा का समर्थन करने वाली सरकार के आने के बाद हिंदू संस्थानों का संचालन अधिक व्यवस्थित हुआ है।

भविष्य में पारदर्शिता की अपेक्षा

करौली शंकर महाराज ने कहा कि किसी भी बड़े संस्थान में समय-समय पर व्यवस्थागत कमियाँ सामने आ सकती हैं, लेकिन उनसे सीख लेकर भविष्य में पुनरावृत्ति न होने देना ही सबसे महत्वपूर्ण है। उन्होंने आशा व्यक्त की कि श्रीराम मंदिर के कोष और प्रबंधन में भविष्य में और अधिक पारदर्शिता तथा कड़ी निगरानी सुनिश्चित की जाएगी — यही इस पूरे प्रकरण की सबसे बड़ी सीख होगी।

संपादकीय दृष्टिकोण

जहाँ SIT जांच चल रही है, और दूसरा राजनीतिक, जहाँ हर पक्ष इसे अपने आख्यान के अनुकूल ढाल रहा है। ओवैसी का 'एनकाउंटर' वाला बयान और महामंडलेश्वर की पलटवार — दोनों ही इस प्रकरण को धार्मिक-सांप्रदायिक रंग देने में योगदान करते हैं, जबकि मूल प्रश्न वित्तीय जवाबदेही का है। SIT की जांच की विश्वसनीयता तभी साबित होगी जब उसके निष्कर्ष सार्वजनिक और स्वतंत्र रूप से सत्यापन-योग्य हों — अन्यथा यह मामला न्यायिक प्रक्रिया से अधिक राजनीतिक प्रतीकवाद का हिस्सा बनकर रह जाएगा।
RashtraPress
1 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

राम मंदिर चढ़ावा विवाद क्या है और SIT की जांच क्यों हो रही है?
राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े कथित चढ़ावा गड़बड़ी के मामले में वित्तीय अनियमितताओं की आशंका के चलते एक विशेष जांच दल (SIT) गठित किया गया है। जांच के दौरान कई रिकवरी भी हुई हैं और बैंक रिकॉर्ड सहित वित्तीय दस्तावेजों की गहन जांच की जा रही है।
असदुद्दीन ओवैसी ने राम मंदिर ट्रस्ट पर क्या कहा था?
AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने कथित तौर पर कहा था कि यदि ट्रस्ट में कोई मुस्लिम होता तो उसका एनकाउंटर कर दिया जाता। इस बयान को महामंडलेश्वर करौली शंकर महाराज ने भड़काऊ, राजनीति-प्रेरित और सामाजिक सौहार्द के लिए हानिकारक बताया।
महामंडलेश्वर करौली शंकर महाराज ने SIT जांच पर क्या कहा?
उन्होंने कहा कि SIT जांच पूरी तरह संवैधानिक प्रक्रिया के तहत हो रही है और प्रशासन अपनी जिम्मेदारी निभा रहा है। उनके अनुसार, जांच के माध्यम से सच सामने आएगा और दोषियों के विरुद्ध कानूनी कार्रवाई होगी।
क्या राम मंदिर ट्रस्ट में केवल हिंदू ही नियुक्त हो सकते हैं?
महामंडलेश्वर करौली शंकर महाराज ने स्पष्ट किया कि देशभर में लाखों मुस्लिम सरकारी और निजी संस्थानों में सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि वित्तीय अनियमितता पर कानून के अनुसार कार्रवाई होती है, धर्म के आधार पर नहीं।
राम मंदिर प्रबंधन में भविष्य में क्या बदलाव अपेक्षित हैं?
महामंडलेश्वर ने आशा व्यक्त की कि श्रीराम मंदिर के कोष और प्रबंधन में भविष्य में अधिक पारदर्शिता और कड़ी निगरानी सुनिश्चित की जाएगी। उन्होंने इसे इस पूरे प्रकरण से मिलने वाली सबसे बड़ी सीख बताया।
राष्ट्र प्रेस
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