राम मंदिर चढ़ावा विवाद: इकबाल अंसारी बोले — 'भगवान राम में सबकी आस्था, गलत करने वाले सलाखों के पीछे'
सारांश
मुख्य बातें
बाबरी मस्जिद मामले के पूर्व पक्षकार इकबाल अंसारी ने 18 जुलाई को अयोध्या के राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर अपनी प्रतिक्रिया दी और कहा कि भगवान राम में हर किसी की श्रद्धा है और आस्था के साथ कोई खिलवाड़ नहीं किया जा सकता। उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की सराहना करते हुए कहा कि इस मामले में दोषियों को सलाखों के पीछे पहुँचाना सरकार की सक्रियता का प्रमाण है।
अयोध्या की आस्था और परंपरा
इकबाल अंसारी ने कहा कि अयोध्या का इतिहास और यहाँ की श्रद्धा अत्यंत महत्वपूर्ण है। सदियों से लोग सरयू नदी में स्नान करते आए हैं। सावन के महीने में भगवान झूला झूलते हैं और श्रद्धालु दर्शन-पूजन के लिए उमड़ते हैं। उन्होंने कहा, 'जहाँ भगवान खेला करते थे, वहाँ भंडारा चल रहा है।' यह टिप्पणी अयोध्या की उस सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत को रेखांकित करती है जो इस विवाद के बावजूद अक्षुण्ण बनी हुई है।
चढ़ावा विवाद और सरकार की कार्रवाई
राम मंदिर चढ़ावा मामले में टिन्नू यादव और उसके भतीजे को पुलिस रिमांड पर लिए जाने के सवाल पर अंसारी ने कहा कि सरकार और कानून अपना काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा, 'भगवान स्वयं देख रहे हैं, जिसने गलत किया है।' उन्होंने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के उस बयान का भी उल्लेख किया जिसमें उन्होंने कहा था कि 'दूध का दूध और पानी का पानी किया जाएगा।' अंसारी ने इसे सरकार की जवाबदेही का प्रतीक बताया।
चंपत राय पर रामादल ट्रस्ट का आरोप
इस मामले में रामादल ट्रस्ट के अध्यक्ष कल्कि राम ने कहा कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र में जो कुछ हुआ, उसकी पूरी जिम्मेदारी तत्कालीन महासचिव चंपत राय की है। उन्होंने कहा, 'अनुशासन बनाए रखना उनकी जिम्मेदारी थी। यह कहना कि उनके साथ धोखा हुआ — तो आप महासचिव किस लिए थे? धोती-कुर्ता पहनकर घूमने के लिए?' कल्कि राम ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि आज जो भी आलोचना हो रही है, उसके कर्ताधर्ता चंपत राय हैं।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
यह विवाद ऐसे समय में उभरा है जब राम मंदिर के उद्घाटन के बाद से अयोध्या में श्रद्धालुओं की संख्या और चढ़ावे में भारी वृद्धि दर्ज की गई है। आलोचकों का कहना है कि इतने बड़े धार्मिक संस्थान में पारदर्शी वित्तीय प्रबंधन और जवाबदेही तंत्र की कमी इस तरह के विवादों की जड़ है। गौरतलब है कि यह पहला मौका नहीं है जब किसी प्रमुख धार्मिक न्यास पर प्रशासनिक लापरवाही के आरोप लगे हों।
आगे क्या होगा
फिलहाल पुलिस मामले की जाँच जारी है और टिन्नू यादव व उसके भतीजे पुलिस रिमांड पर हैं। मामले की आगे की कार्रवाई पर सभी की नज़र बनी हुई है। इकबाल अंसारी जैसे सर्वधर्म समभाव के प्रतीक व्यक्ति का यह बयान इस विवाद में सांप्रदायिक सौहार्द की एक महत्वपूर्ण आवाज़ के रूप में देखा जा रहा है।