राम मंदिर चंदा विवाद पर विपक्ष की राजनीति निंदनीय: भाजपा सांसद सुब्रत पाठक
सारांश
मुख्य बातें
भाजपा के पूर्व सांसद सुब्रत पाठक ने 15 जुलाई 2026 को नई दिल्ली में कई अहम मुद्दों पर अपनी स्पष्ट राय रखी — जिनमें 131वाँ संविधान संशोधन विधेयक, परिसीमन, राम मंदिर चंदा विवाद पर विपक्ष के आरोप और भोजशाला मामले में सर्वोच्च न्यायालय का हालिया आदेश शामिल हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि केंद्र सरकार का एकमात्र उद्देश्य लोकतंत्र और समाज को सुदृढ़ करना है, जबकि विपक्ष बिना आधार के राजनीतिक विवाद उत्पन्न करने में लगा है।
131वाँ संविधान संशोधन विधेयक और परिसीमन
सुब्रत पाठक ने कहा कि सरकार देश और समाज के हित में जो भी आवश्यक होगा, वह करेगी। उन्होंने याद दिलाया कि महिला आरक्षण से जुड़े विधेयक पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही अपना संकल्प सार्वजनिक कर चुके हैं। पाठक के अनुसार, पिछली बार विपक्ष की बाधाओं के कारण यह विधेयक संसद में पारित नहीं हो सका था, लेकिन सरकार इसे पुनः लाने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
राम मंदिर चंदा विवाद: सरकार की कार्रवाई
राम मंदिर में चंदे की कथित चोरी पर विपक्ष के आरोपों को खारिज करते हुए पाठक ने कहा कि यह घटना निंदनीय अवश्य है, किंतु भाजपा सरकार ने मामले को गंभीरता से लेते हुए एसआईटी का गठन किया, आरोपियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज की, उन्हें जेल भेजा और वसूली की कार्रवाई भी जारी है। उन्होंने यह भी कहा कि यदि जाँच में किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता उजागर होती है, तो उसके विरुद्ध भी समान कार्रवाई की जाएगी।
इस क्रम में उन्होंने कांग्रेस और समाजवादी पार्टी पर सीधा हमला बोला। उनका कहना था कि जो राजनीतिक दल कभी भगवान राम के अस्तित्व पर ही प्रश्नचिह्न लगाते थे, आज वही दल राम मंदिर के नाम पर राजनीतिक रोटियाँ सेंक रहे हैं। उन्होंने कांग्रेस के पुराने हलफनामे और समाजवादी पार्टी के नेताओं के बयानों का उल्लेख करते हुए माँग की कि विपक्ष पहले यह स्पष्ट करे कि वह अयोध्या में राम मंदिर के अस्तित्व को स्वीकार करता है या नहीं।
भोजशाला और सर्वोच्च न्यायालय का आदेश
भोजशाला मामले में सर्वोच्च न्यायालय के हालिया आदेश पर पाठक ने कहा कि यदि किसी अन्य समुदाय को नमाज के लिए स्थान की आवश्यकता है, तो भोजशाला परिसर के बाहर उचित व्यवस्था की जा सकती है। उनका तर्क था कि भोजशाला के भीतर मंदिर स्थित है और यदि वहाँ नमाज की अनुमति दी जाती है, तो यही नियम अन्य धार्मिक स्थलों पर भी समान रूप से लागू होना चाहिए।
यह ऐसे समय में आया है जब भोजशाला को लेकर हिंदू और मुस्लिम पक्षों के बीच लंबे समय से कानूनी विवाद चला आ रहा है और सर्वोच्च न्यायालय का यह आदेश नई बहस का केंद्र बन गया है।
केजीएमयू मांसाहार विवाद और संस्थागत स्वायत्तता
किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के छात्रावासों में मांसाहारी भोजन पर रोक के निर्णय पर पाठक ने कहा कि यह विश्वविद्यालय प्रशासन और राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के अधिकार क्षेत्र का विषय है। उनके अनुसार, यह निर्णय विश्वविद्यालय के वैधानिक प्रशासनिक अधिकारों के दायरे में लिया गया है और इस पर अनावश्यक विवाद उचित नहीं है।
महाराष्ट्र की राजनीतिक हलचल और विपक्ष की कमज़ोरी
महाराष्ट्र में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के नेताओं जयंत पाटिल और सुनील तटकरे की मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस से मुलाकात के बाद उठ रहे राजनीतिक कयासों को पाठक ने बेबुनियाद करार दिया। उन्होंने कहा कि विपक्ष की लगातार राजनीतिक विफलताओं और कांग्रेस नेतृत्व की कमज़ोरी के कारण ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं। उनके अनुसार, राहुल गांधी को कई बार राष्ट्रीय नेता के रूप में स्थापित करने का प्रयास हुआ, लेकिन वे सफल नहीं हो सके। पाठक ने कहा कि न केवल भारत बल्कि पूरा विश्व प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व पर भरोसा करता है, और उनकी बढ़ती लोकप्रियता के कारण विपक्ष निरंतर कमज़ोर होता जा रहा है।
गौरतलब है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब संसद का मानसून सत्र निकट है और कई विधायी मुद्दों पर सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव तेज़ होने की संभावना है।