राम मंदिर ट्रस्ट में नई नियुक्ति पर सपा का हमला: 'चंपत राय पर FIR क्यों नहीं?' — आशुतोष वर्मा
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) के नेता आशुतोष वर्मा ने 30 जुलाई को लखनऊ में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में हुई नई नियुक्ति पर कड़ा सवाल उठाते हुए कहा कि महज़ एक सचिव की नियुक्ति से ट्रस्ट में कथित अनियमितताएँ नहीं रुकेंगी। उन्होंने पूछा कि जब तक चंपत राय पर कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती, तब तक यह माना जाता रहेगा कि 'बड़ी मछलियों' को बचाया जा रहा है। इसी प्रेस वार्ता में उन्होंने भदोही का नाम बदलने, 'वंदे मातरम' विधेयक और पेपर लीक कानून सहित कई मुद्दों पर भारतीय जनता पार्टी (BJP) और उत्तर प्रदेश सरकार पर निशाना साधा।
राम मंदिर ट्रस्ट नियुक्ति पर सवाल
श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में आईआईटी बॉम्बे के पूर्व छात्र और राम मंदिर परियोजना प्रबंधक जगदीश आफले को पहला सचिव नियुक्त किया गया है। इस पर सपा नेता ने कहा कि नियुक्ति होना अलग बात है, लेकिन असली प्रश्न ट्रस्ट में कथित अनियमितताओं पर कार्रवाई का है। उन्होंने कहा, 'इस व्यवस्था परिवर्तन के बाद क्या चोरी रुक जाएगी? चोरी रोकने के लिए क्या कदम उठाए जाएंगे, यह सरकार और ट्रस्ट को बताना चाहिए।' वर्मा ने यह भी पूछा कि कथित चोरी के मामले में चंपत राय पर अब तक एफआईआर क्यों नहीं हुई।
भदोही नाम परिवर्तन और राजनीतिक व्यंग्य
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ द्वारा भदोही का नाम पुनः संत रविदास नगर किए जाने की घोषणा पर सपा नेता ने व्यंग्यात्मक लहजे में कहा, 'हम इस फैसले का स्वागत करते हैं — वे नाम बदलते रहें, हम सरकार बदलने जा रहे हैं।' आलोचकों का कहना है कि इस तरह के नाम परिवर्तन के फैसले प्रायः तात्कालिक राजनीतिक एजेंडे को ध्यान में रखकर किए जाते हैं।
'वंदे मातरम' विधेयक और सामाजिक सहमति की माँग
'वंदे मातरम' विधेयक और जमीयत उलेमा-ए-हिंद के बयान पर वर्मा ने कहा कि ऐसे संवेदनशील विषयों पर बहुमत के आधार पर निर्णय थोपने के बजाय व्यापक सहमति बनाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा, 'जिस तरह संविधान सभा में राष्ट्रगान और राष्ट्रगीत पर आम सहमति बनी थी, उसी तरह इस विषय पर भी दोनों सदनों में सहमति के बाद ही आगे बढ़ा जाए।' उन्होंने BJP पर 'चुनावी बहुमत के आधार पर हिटलरशाही' करने का आरोप लगाया।
पेपर लीक कानून पर सवाल
पेपर लीक कानून पर सपा नेता ने कहा कि केवल कानून बना देने से समस्या समाप्त नहीं होती। उन्होंने नीट-2024 पेपर लीक मामले का हवाला देते हुए कहा कि मुख्य आरोपी संजीव मुखिया को सीबीआई जाँच के बाद 'पर्याप्त सबूत नहीं' कहकर बरी कर दिया गया। उन्होंने पूछा, 'क्या पेपर लीक हुआ ही नहीं, या फिर बड़ी मछलियों को बचा लिया गया? असली सवाल आज भी वही है कि पेपर लीक के पीछे कौन लोग थे और इसका फायदा किसे मिला।'
अन्य मुद्दे: हॉकी जर्सी, राज्यपाल का बयान और ओपी राजभर विवाद
भारतीय हॉकी टीम की जर्सी में भगवा रंग के विवाद पर वर्मा ने कहा कि यह BJP की व्यापक 'अधिनायकवादी सोच' का हिस्सा है और सपा 'भारतीय हॉकी टीम के पूर्व कप्तान के साथ खड़ी है।' जंतर-मंतर घटना पर उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल के बयान पर उन्होंने कहा कि संविधान पुरुष और महिला में कोई भेद नहीं करता और राज्यपाल को महिलाओं के लिए प्रेरणा बनना चाहिए। ओम प्रकाश राजभर के सोशल मीडिया पोस्ट पर उन्होंने BJP से पूछा कि क्या उसे यादव और कुर्मी समाज के एकजुट होने से परेशानी है। आगे देखना होगा कि BJP और ट्रस्ट प्रबंधन इन सवालों का जवाब देते हैं या नहीं।