रमेश चेन्निथला की मांग: केरल के सीएम और मंत्री को कोऑपरेटिव सॉफ्टवेयर डील पर माफी चाहिए
सारांश
Key Takeaways
- रमेश चेन्निथला की माफी की मांग केरल के मुख्यमंत्री और राज्य मंत्री से है।
- भ्रष्टाचार के आरोपों को अदालत ने गंभीरता से लिया है।
- टेंडर प्रक्रिया में दिनेश कंसोर्टियम की बोली महंगी थी।
- राज्य को संभवतः 550 करोड़ रुपये का नुकसान हो सकता था।
- मलाबार आईटी ने 231.7 करोड़ रुपये की बोली लगाई।
कोच्चि, 31 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। कांग्रेस के प्रमुख विधायक रमेश चेन्निथला ने मंगलवार को केरल के मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और राज्य के सहकारिता मंत्री वी. एन. वासावन से माफी की मांग की है। यह मांग केरल उच्च न्यायालय द्वारा सहकारी क्षेत्र में प्रस्तावित सॉफ्टवेयर डील से संबंधित कार्यवाही पर रोक लगाए जाने के बाद उठी है।
चेन्निथला ने कहा कि अदालत का यह हस्तक्षेप इस परियोजना में भ्रष्टाचार के आरोपों को सही ठहराता है। उन्होंने आरोप लगाया कि राज्य सरकार इस ठेके को दिनेश बीड़ी सहकारी समिति को देने का प्रयास कर रही थी, जबकि उसकी बोली बहुत महंगी थी।
उन्होंने कहा कि जब उन्होंने पहली बार इस मुद्दे को उठाया, तब मुख्यमंत्री विजयन ने उनका मजाक उड़ाया और इस डील को राज्य के लिए फायदेमंद बताया, जबकि मंत्री वासवन ने आरोपों को खारिज कर दिया था।
चेन्निथला ने कहा, “अब दोनों (विजयन और वासवन) को चुनाव के दौरान जनता को गुमराह करने के लिए केरल की जनता से माफी मांगनी चाहिए।”
टेंडर प्रक्रिया का विवरण साझा करते हुए उन्होंने बताया कि राज्य की 1,612 सहकारी समितियों की 4,415 शाखाओं में सॉफ्टवेयर लगाने के लिए निविदाएं आमंत्रित की गई थीं।
उन्होंने कहा कि मालाबार सूचना प्रौद्योगिकी सहकारी ने पूरे प्रोजेक्ट के लिए 231.7 करोड़ रुपये की बोली लगाई, जबकि दिनेश कंसोर्टियम ने केवल 280 शाखाओं के लिए 49.9 करोड़ रुपये का प्रस्ताव दिया।
इस आधार पर, चेन्निथला ने कहा कि दिनेश कंसोर्टियम की प्रति शाखा लागत 17.8 लाख रुपये बैठती है, जबकि मलाबार आईटी की लागत 5.24 लाख रुपये प्रति शाखा है।
उन्होंने आरोप लगाया कि अगर दिनेश कंसोर्टियम की दर को सभी शाखाओं पर लागू किया जाए, तो कुल लागत करीब 785 करोड़ रुपये तक पहुंच जाएगी, जिससे राज्य को लगभग 550 करोड़ रुपये का नुकसान होगा।
चेन्निथला ने यह भी आरोप लगाया कि टेंडर की शर्तें इस तरह बनाई गई थीं कि टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज़ जैसी बड़ी कंपनियां और अंतरराष्ट्रीय फर्में इसमें भाग न ले सकें।
उन्होंने राज्य सरकार पर आरोप लगाया कि उसने मानक निविदा प्रक्रिया को दरकिनार करते हुए चुनाव के दौरान विशेष अनुमति लेकर इस डील को आगे बढ़ाने की कोशिश की।
उन्होंने बताया कि इस मामले में मलाबार इंफॉर्मेशन टेक्नोलॉजी कोऑपरेटिव ने राज्य सरकार के फैसले के खिलाफ हाई कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
फरवरी 2026 के मध्य में इस परियोजना के लिए रिवर्स ऑक्शन कराया गया था, जिसमें तकनीकी चरण में केवल दो बोलीदाता ही योग्य पाए गए थे।
चेन्निथला ने कहा, “सरकार के कार्यकाल के अंतिम दिनों में एक बड़े घोटाले को अंजाम देने की कोशिश उजागर हो गई है। अगर इसे लागू किया जाता, तो राज्य को भारी वित्तीय नुकसान होता।”