31 जुलाई 2026
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री-नीट पेपर लीक के नाम पर 1,000 से अधिक छात्रों से करोड़ों की ठगी, अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने राजस्थान के दो आरोपी दबोचे

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री-नीट पेपर लीक के नाम पर 1,000 से अधिक छात्रों से करोड़ों की ठगी, अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने राजस्थान के दो आरोपी दबोचे

सारांश

री-नीट का प्रश्नपत्र कभी लीक हुआ ही नहीं था — फिर भी 1,000 से अधिक छात्र ठगे गए। अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने राजस्थान के दो आरोपियों को दबोचा, जिनके खातों में ₹1.5 करोड़ से अधिक का लेनदेन मिला और 44 साइबर अपराध वेबसाइटों का संचालन सामने आया।

मुख्य बातें

अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने 15 जून 2026 को राजस्थान के सुमेर सिंह मीणा (जयपुर) और आकाश मीणा (कोटा) को गिरफ्तार किया।
आरोपियों ने टेलीग्राम चैनलों के ज़रिए री-नीट परीक्षा का फ़र्ज़ी पेपर बेचकर 1,000 से अधिक छात्रों से करोड़ों रुपये ठगे।
पिछले एक वर्ष में आरोपियों के खातों में ₹1.5 करोड़ से अधिक का लेनदेन; 6 बैंक खातों का संबंध 12 साइबर धोखाधड़ी शिकायतों से मिला।
आकाश मीणा लगभग 44 साइबर अपराध वेबसाइटें संचालित कर रहा था; मोबाइल और लैपटॉप से 8 टेलीग्राम ग्रुप बरामद।
संयुक्त पुलिस आयुक्त शरद सिंघल ने पुष्टि की कि री-नीट का कोई प्रश्नपत्र वास्तव में लीक नहीं हुआ था।
राजस्थान, बिहार और पश्चिम बंगाल में गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी।

अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने सोमवार, 15 जून 2026 को एक बड़े साइबर ठगी गिरोह का भंडाफोड़ करते हुए राजस्थान के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। आरोप है कि इन दोनों ने टेलीग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के ज़रिए री-नीट परीक्षा का प्रश्नपत्र उपलब्ध कराने का झाँसा देकर 1,000 से अधिक छात्रों और उनके अभिभावकों से करोड़ों रुपये हड़प लिए। अहमदाबाद के संयुक्त पुलिस आयुक्त (अपराध) शरद सिंघल ने स्पष्ट किया कि री-नीट का कोई प्रश्नपत्र वास्तव में लीक नहीं हुआ था — आरोपी पूरी तरह फ़र्ज़ी दावों के बल पर पैसे वसूल रहे थे।

मुख्य घटनाक्रम

पुलिस ने जाँच के दौरान सुमेर सिंह मीणा और आकाश मीणा को गिरफ्तार किया। सुमेर सिंह इलेक्ट्रॉनिक्स में आईटीआई उत्तीर्ण है और जयपुर में रहता है, जबकि आकाश मीणा अंग्रेज़ी और हिंदी में बीए स्नातक है और उसे कोटा से पकड़ा गया। आरोपियों ने कई टेलीग्राम चैनल और ग्रुप बनाकर 21 जून को होने वाली री-नीट परीक्षा का पेपर और गोपनीय जानकारी होने का दावा किया। भुगतान ऑनलाइन पेमेंट, क्यूआर कोड और बैंक खातों के ज़रिए अग्रिम रूप से वसूला जाता था और रकम मिलते ही आरोपी गायब हो जाते थे।

ठगी का तरीका

गिरोह ने टेलीग्राम चैनलों को विश्वसनीय दिखाने के लिए फ़र्ज़ी सदस्य और प्रीमियम सदस्य जोड़े। गिरोह के सदस्य खुद ही चैनलों में संदेश पोस्ट कर दावा करते थे कि पिछले वर्ष उनका पेपर 80 प्रतिशत तक सही निकला था। जाँच में यह भी सामने आया कि आकाश मीणा लगभग 44 साइबर अपराध से जुड़ी वेबसाइटें संचालित कर रहा था और उसके मोबाइल फोन तथा लैपटॉप से करीब 8 टेलीग्राम ग्रुप बरामद हुए। री-नीट पेपर लीक के अलावा दोनों आरोपी निवेश घोटाले में भी संलिप्त थे — टेलीग्राम ग्रुपों के ज़रिए अधिक मुनाफे का लालच देकर लोगों से पैसे निवेश कराते थे।

वित्तीय लेनदेन और मनी ट्रेल

आरोपियों से जुड़े 6 बैंक खातों का संबंध देश के विभिन्न राज्यों में दर्ज 12 साइबर धोखाधड़ी शिकायतों से मिला है। पुलिस के अनुसार पिछले एक वर्ष में आरोपियों के खातों में ₹1.5 करोड़ से अधिक का लेनदेन हुआ। ठगी की रकम पहले गेमिंग वेबसाइटों से जुड़े खातों में भेजी जाती थी और फिर अलग-अलग बैंक खातों के ज़रिए निकाल ली जाती थी, ताकि धन के स्रोत को छिपाया जा सके।

कानूनी कार्रवाई

साइबर क्राइम पुलिस स्टेशन में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 318(4), 319(2), 54 तथा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66(डी) के तहत मामला दर्ज किया गया है। जाँच में करीब 1,000 मोबाइल नंबरों और टेलीग्राम चैनलों की पड़ताल की गई। राजस्थान, बिहार और पश्चिम बंगाल समेत अन्य राज्यों में पुलिस की टीमें गिरोह के शेष सदस्यों, धन हस्तांतरण करने वालों और तकनीकी सहयोगियों की तलाश में जुटी हैं।

पुलिस की अपील

अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने छात्रों, अभिभावकों और आम नागरिकों से अपील की है कि वे सोशल मीडिया या टेलीग्राम पर परीक्षा का प्रश्नपत्र, परिणाम बदलने या प्रवेश की गारंटी देने वाले किसी भी दावे पर भरोसा न करें। ऐसे किसी भी संदिग्ध संदेश की सूचना तुरंत पुलिस को देने का आग्रह किया गया है। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब नीट परीक्षा प्रणाली पहले से ही जाँच के दायरे में है और छात्रों की बेचैनी का फायदा उठाने वाले गिरोह सक्रिय हो रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

तो ऐसे गिरोह उसी बेचैनी को हथियार बना लेते हैं। असली सवाल यह है कि 1,000 से अधिक छात्र एक ऐसे दावे पर भरोसा करने को तैयार हो गए जो सत्यापन की किसी भी कसौटी पर खरा नहीं उतरता — यह डिजिटल साक्षरता की कमी और परीक्षा-तंत्र में भरोसे के संकट, दोनों को एक साथ उजागर करता है। जब तक नीट जैसी परीक्षाओं में पारदर्शिता और जवाबदेही नहीं बढ़ती, ऐसे गिरोहों के लिए उपजाऊ ज़मीन बनती रहेगी।
RashtraPress
31 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

री-नीट पेपर लीक ठगी क्या है और इसमें क्या हुआ?
अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने 15 जून 2026 को राजस्थान के दो आरोपियों को गिरफ्तार किया, जिन्होंने टेलीग्राम चैनलों के ज़रिए री-नीट परीक्षा का फ़र्ज़ी प्रश्नपत्र बेचकर 1,000 से अधिक छात्रों और अभिभावकों से करोड़ों रुपये ठगे। पुलिस ने स्पष्ट किया कि री-नीट का कोई पेपर वास्तव में लीक नहीं हुआ था।
गिरफ्तार आरोपी कौन हैं और उन्हें कहाँ से पकड़ा गया?
गिरफ्तार आरोपियों के नाम सुमेर सिंह मीणा और आकाश मीणा हैं, दोनों राजस्थान के हैं। सुमेर सिंह को जयपुर से और आकाश मीणा को कोटा से गिरफ्तार किया गया।
आरोपियों ने ठगी के लिए किस तरीके का इस्तेमाल किया?
आरोपियों ने टेलीग्राम चैनलों में फ़र्ज़ी सदस्य जोड़कर उन्हें विश्वसनीय बनाया और दावा किया कि पिछले वर्ष उनका पेपर 80 प्रतिशत तक सही निकला था। ऑनलाइन पेमेंट, क्यूआर कोड और बैंक खातों के ज़रिए अग्रिम रकम वसूली जाती थी और भुगतान के बाद आरोपी संपर्क तोड़ लेते थे।
इस मामले में कितनी रकम का लेनदेन सामने आया है?
पुलिस जाँच के अनुसार पिछले एक वर्ष में आरोपियों के खातों में ₹1.5 करोड़ से अधिक का लेनदेन हुआ। उनसे जुड़े 6 बैंक खातों का संबंध देश के विभिन्न राज्यों में दर्ज 12 साइबर धोखाधड़ी शिकायतों से मिला है।
साइबर ठगी से बचने के लिए पुलिस ने क्या सलाह दी है?
अहमदाबाद साइबर क्राइम ब्रांच ने छात्रों और अभिभावकों से अपील की है कि सोशल मीडिया या टेलीग्राम पर परीक्षा पेपर, परिणाम बदलने या प्रवेश की गारंटी देने वाले किसी भी दावे पर भरोसा न करें। ऐसे किसी भी संदिग्ध संदेश की सूचना तुरंत पुलिस को दें।
राष्ट्र प्रेस
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