संजय निषाद का अखिलेश यादव को जवाब: कांग्रेस ने मुसलमानों को आरक्षण से क्यों किया था बाहर?
सारांश
मुख्य बातें
चंदौली, १६ अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। महिला आरक्षण बिल पर चर्चा के लिए केंद्र सरकार द्वारा आयोजित तीन दिवसीय विशेष संसदीय सत्र के दौरान राजनीतिक बयानबाजी तेजी से बढ़ गई है। समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष और लोकसभा सांसद अखिलेश यादव द्वारा मुस्लिमों को आरक्षण देने की मांग के बाद उत्तर प्रदेश सरकार के कैबिनेट मंत्री संजय निषाद ने तीखी प्रतिक्रिया दी है।
संजय निषाद ने राष्ट्र प्रेस से बातचीत करते हुए कहा, "जब देश स्वतंत्र हुआ था, तब कांग्रेस ने एक नोटिफिकेशन जारी किया था, जिसमें स्पष्ट रूप से कहा गया था कि आरक्षण केवल भारत में रहने वाले हिंदू, बौद्ध और सिखों को मिलेगा। ईसाई और मुसलमान इस आरक्षण से बाहर थे, क्योंकि इन्हें विदेशी धर्म के रूप में देखा गया था।"
निषाद ने आगे कहा, "विपक्षी नेताओं को पिछड़ों की आवाज उठाने की आवश्यकता है। देश में ५७८ पिछड़ी जातियां हैं, जिनमें से ६० प्रतिशत भूमिहीन हैं। इन गरीब और वंचित लोगों की आवाज बननी चाहिए। जिनके पास कुछ भी नहीं है, उनके घर के लोग चुनाव लड़कर संसद पहुंचें। सबसे ज्यादा प्रभावित लोग वे हैं जो अंग्रेजों के कानूनों से प्रभावित हुए हैं। इनमें सबसे अधिक निषाद समुदाय, फिर राजभर, तेली, बढ़ई और लोहार जैसे पिछड़े वर्ग शामिल हैं। इन्हीं पिछड़ी जातियों को आरक्षण मिलना चाहिए।"
उनका कहना था, "कांग्रेस ने मुसलमानों और ईसाइयों को आरक्षण से बाहर रखा क्योंकि उन्हें विदेशी धर्म माना गया। इस देश का मूल धर्म बौद्ध, सिख और हिंदू है। जिन मुगलों और अंग्रेजों के खिलाफ हमारे पूर्वज लड़े और देश को आजाद कराया, उनके धर्म के लोगों को आरक्षण क्यों मिलेगा? वे पहले अपने मूल धर्म में लौटें।"
निषाद ने समाजवादी पार्टी पर भी सवाल उठाते हुए कहा, "जब सपा मुस्लिम आबादी की आवाज उठा रही है, तो पिछड़ों की आवाज कौन उठाएगा? आज मुसलमान अंधे की तरह झंडा उठाए हुए हैं और डंडे खा रहे हैं। सपा को पहले कांग्रेस से पूछना चाहिए कि उन्होंने मुसलमानों को आरक्षण से क्यों दूर रखा था?"
उन्होंने स्पष्ट किया कि महिला आरक्षण बिल पर चर्चा हो रही है, लेकिन विपक्ष को केवल मुस्लिम आरक्षण की बात करके पिछड़े वर्गों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। सच्चा सामाजिक न्याय तभी संभव है, जब वास्तविक पिछड़ों और भूमिहीन वर्गों को उनका हक मिले।