10 जुलाई 2026
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पीसीएमसी स्कूल किट घोटाला: संजय राउत ने ₹400 करोड़ की अनियमितता का आरोप लगाया, CM फडणवीस को पत्र

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पीसीएमसी स्कूल किट घोटाला: संजय राउत ने ₹400 करोड़ की अनियमितता का आरोप लगाया, CM फडणवीस को पत्र

सारांश

शिवसेना (यूबीटी) के राउत ने पीसीएमसी में स्कूल किट खरीद में ₹400 करोड़ के कथित घोटाले का आरोप लगाया है — जहाँ सर्वोच्च न्यायालय की तय ₹239 दर की जगह ₹814 प्रति यूनिट का ठेका दिया गया। ई-टेंडरिंग नियमों और सुप्रीम कोर्ट के दिशानिर्देशों की अनदेखी का यह मामला महाराष्ट्र की राजनीति में नया भूचाल ला सकता है।

मुख्य बातें

संजय राउत ने 9 जुलाई 2026 को मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर पीसीएमसी में स्कूल किट खरीद में कथित ₹400 करोड़ के घोटाले का आरोप लगाया।
सर्वोच्च न्यायालय द्वारा निर्धारित ₹239 प्रति यूनिट की दर के बजाय कथित तौर पर ₹814 प्रति यूनिट की दर पर ठेका दिया गया — प्रति किट ₹575 का अतिरिक्त भुगतान।
सोलापुर स्थित जगदंबा रेडीमेड ड्रेसेस सहकारी संस्था को कथित तौर पर बिना अनिवार्य ई-टेंडरिंग प्रक्रिया के सीधे ठेका दिया गया।
राउत ने एक वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री पर नगर आयुक्त पर दबाव बनाने और ₹50–₹55 करोड़ की रकम प्राप्त करने का आरोप लगाया।
राउत ने दावा किया कि सभी दस्तावेजी साक्ष्य मुख्यमंत्री कार्यालय को सौंपे जा चुके हैं।

शिवसेना (यूबीटी) नेता और राज्यसभा सदस्य संजय राउत ने 10 जुलाई 2026 को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को पत्र लिखकर पिंपरी-चिंचवड नगर निगम (पीसीएमसी) में स्कूल किट खरीद में कथित तौर पर ₹400 करोड़ के भ्रष्टाचार का आरोप लगाया है। राउत ने इस मामले में एक वरिष्ठ कैबिनेट मंत्री और निगम अधिकारियों के खिलाफ तत्काल जांच और कार्रवाई की माँग की है।

मुख्य आरोप और घटनाक्रम

राउत के अनुसार, पिंपरी-चिंचवड के कई स्थानीय पार्षदों ने उनसे मुलाकात कर प्राथमिक और माध्यमिक स्कूलों के छात्रों के लिए यूनिफॉर्म, स्वेटर, मोजे, रेनकोट और स्कूल बैग की खरीद में कथित अनियमितताओं की जानकारी दी। राउत ने अपने पत्र में आरोप लगाया कि सोलापुर स्थित जगदंबा रेडीमेड ड्रेसेस सहकारी संस्था को बिना किसी प्रतिस्पर्धी बोली के सीधे करोड़ों रुपए का ठेका दे दिया गया।

राज्य के नियमों के अनुसार, ₹3 लाख से अधिक की किसी भी सरकारी खरीद के लिए अनिवार्य ई-टेंडरिंग प्रक्रिया का पालन करना होता है। राउत का आरोप है कि इस प्रक्रिया का उल्लंघन किया गया और सर्वोच्च न्यायालय के दिशानिर्देशों की भी अनदेखी की गई।

दर में अंतर और करदाताओं का नुकसान

राउत ने बताया कि यह मामला पहले सर्वोच्च न्यायालय तक पहुँचा था, जिसने स्कूल किट की खरीद के लिए ₹239 प्रति यूनिट की दर तय की थी। हालाँकि, कथित तौर पर पीसीएमसी प्रशासन ने यह ठेका ₹814 प्रति यूनिट की दर पर दिया — यानी प्रति किट ₹575 का अतिरिक्त भुगतान। राउत के दावे के अनुसार, इस कथित घोटाले की कुल राशि करीब ₹400 करोड़ है।

मंत्री पर सीधा आरोप

राउत ने राज्य मंत्रिमंडल के एक वरिष्ठ मंत्री पर इस सौदे को आगे बढ़ाने के लिए नगर आयुक्त पर राजनीतिक दबाव बनाने का आरोप लगाया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के भ्रष्टाचार विरोधी नारे 'न खाऊंगा, न खाने दूंगा' का संदर्भ देते हुए उन्होंने अपने पत्र में लिखा, 'आपके मंत्रिमंडल के एक वरिष्ठ मंत्री ने नगर आयुक्त पर बिना किसी निविदा प्रक्रिया के अवैध रूप से इस फर्म को ठेका देने का दबाव डाला।' राउत ने यह भी दावा किया कि इस कथित भ्रष्टाचार से ₹50 से ₹55 करोड़ की रकम संबंधित मंत्रियों तक पहुँची।

सबूत और जांच की माँग

राउत ने अपने पत्र के अंत में मुख्यमंत्री फडणवीस से मामले की तत्काल जांच कराने और कथित रूप से शामिल मंत्री तथा पीसीएमसी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की माँग की। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार से जुड़े सभी दस्तावेजी साक्ष्य मुख्यमंत्री कार्यालय को जांच के लिए सौंप दिए गए हैं। बच्चों की शिक्षा सामग्री की खरीद में कथित अनियमितता को राउत ने 'बेहद शर्मनाक' करार दिया।

आगे क्या होगा

फिलहाल मुख्यमंत्री कार्यालय या पीसीएमसी की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह मामला महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ महायुति गठबंधन और विपक्षी महा विकास अघाड़ी के बीच राजनीतिक तनाव को और बढ़ा सकता है। गौरतलब है कि राउत पहले भी पीसीएमसी प्रशासन से जुड़े मुद्दे उठाते रहे हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

लेकिन यह भी उतना ही सच है कि ये आरोप एक ऐसे नेता की ओर से आए हैं जिनकी पार्टी महाराष्ट्र में सत्तारूढ़ गठबंधन की कट्टर विरोधी है — इसलिए राजनीतिक संदर्भ को नज़रअंदाज़ नहीं किया जा सकता। असली परीक्षा यह है कि क्या मुख्यमंत्री फडणवीस अपने ही मंत्रिमंडल के एक सदस्य के खिलाफ स्वतंत्र जांच का आदेश देंगे, या यह मामला राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप तक सिमट जाएगा। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा पहले से तय दर और ई-टेंडरिंग की अनिवार्यता जैसे ठोस प्रक्रियागत बिंदु इस मामले को महज़ राजनीतिक बयानबाज़ी से अलग करते हैं और जांच को अपरिहार्य बनाते हैं।
RashtraPress
10 जुलाई 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

पीसीएमसी स्कूल किट घोटाला क्या है?
यह पिंपरी-चिंचवड नगर निगम में प्राथमिक व माध्यमिक स्कूली छात्रों के लिए यूनिफॉर्म, बैग और अन्य सामग्री की खरीद में कथित अनियमितता का मामला है। संजय राउत के अनुसार, सर्वोच्च न्यायालय की तय ₹239 प्रति यूनिट दर की जगह ₹814 प्रति यूनिट पर ठेका दिया गया, जिससे कथित तौर पर ₹400 करोड़ का नुकसान हुआ।
संजय राउत ने यह आरोप कब और कैसे लगाए?
राउत ने 9 जुलाई 2026 को महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को एक आधिकारिक पत्र लिखकर ये आरोप लगाए। उन्होंने पत्र में दावा किया कि स्थानीय पार्षदों ने उन्हें अनियमितताओं की जानकारी दी और सभी दस्तावेजी साक्ष्य मुख्यमंत्री कार्यालय को सौंपे गए हैं।
ई-टेंडरिंग नियम का उल्लंघन कैसे हुआ?
महाराष्ट्र के नियमों के तहत ₹3 लाख से अधिक की किसी भी सरकारी खरीद के लिए ई-टेंडरिंग अनिवार्य है। राउत का आरोप है कि सोलापुर की जगदंबा रेडीमेड ड्रेसेस सहकारी संस्था को बिना किसी प्रतिस्पर्धी बोली के सीधे ठेका दिया गया, जो इस नियम का सीधा उल्लंघन है।
इस मामले में किस मंत्री पर आरोप लगाए गए हैं?
राउत ने राज्य मंत्रिमंडल के एक वरिष्ठ मंत्री का नाम सीधे नहीं लिया, लेकिन आरोप लगाया कि उस मंत्री ने नगर आयुक्त पर बिना निविदा के ठेका देने का दबाव बनाया। उन्होंने यह भी दावा किया कि ₹50 से ₹55 करोड़ की रकम संबंधित मंत्रियों तक पहुँची।
मुख्यमंत्री फडणवीस ने इस पर क्या प्रतिक्रिया दी है?
अभी तक मुख्यमंत्री कार्यालय या पीसीएमसी की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। राउत ने मामले की तत्काल जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की माँग की है।
राष्ट्र प्रेस
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