राजेंद्र भारती की सजा पर रोक से सुप्रीम कोर्ट का इनकार, 1998 बैंक धोखाधड़ी मामले में अयोग्यता जारी
सारांश
मुख्य बातें
सर्वोच्च न्यायालय ने बुधवार, 29 जुलाई 2026 को कांग्रेस के पूर्व विधायक राजेंद्र भारती की याचिका पर नोटिस जारी किया, लेकिन फिलहाल उनकी दोषसिद्धि पर रोक लगाने से इनकार कर दिया। भारती ने 1998 के दतिया जिला सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक धोखाधड़ी मामले में मिली सजा को लेकर दिल्ली उच्च न्यायालय के 10 जुलाई के आदेश को चुनौती दी थी। सुप्रीम कोर्ट के इस निर्णय के फलस्वरूप मध्य प्रदेश विधानसभा की सदस्यता के लिए उनकी अयोग्यता अभी भी बनी रहेगी।
मुख्य घटनाक्रम
जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की खंडपीठ ने अभियोजन पक्ष और जिला सहकारी कृषि ग्रामीण विकास बैंक (उसके महाप्रबंधक के माध्यम से) से जवाब माँगा है। अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद निर्धारित की गई है।
इससे पहले दिल्ली उच्च न्यायालय ने जस्टिस मनोज जैन की एकल पीठ के माध्यम से स्पष्ट किया था कि सजा पर रोक एक 'असाधारण अधिकार' है और इसका उपयोग केवल 'विशेष परिस्थितियों' में किया जाना चाहिए। न्यायालय ने नई दिल्ली की विशेष सांसद/विधायक अदालत के फैसले में कोई 'स्पष्ट या बुनियादी गलती' नहीं पाई।
मामले की पृष्ठभूमि
यह मामला 1998 में दतिया स्थित जिला सहकारी कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक में सावधि जमा (फिक्स्ड डिपॉजिट) से जुड़ी कथित वित्तीय अनियमितताओं से संबंधित है। अभियोजन पक्ष के अनुसार, कथित तौर पर सावधि जमा की अवधि को चरणबद्ध तरीके से तीन वर्ष से बढ़ाकर पहले 10 वर्ष और फिर 15 वर्ष कर दिया गया। इससे भारती से जुड़े एक पारिवारिक ट्रस्ट को मूल परिपक्वता अवधि समाप्त होने के बाद भी 13.5 प्रतिशत की ब्याज दर का लाभ मिलता रहा।
विशेष अदालत ने भारती और उनके सह-आरोपी रघुवीर शरण प्रजापति को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धाराओं 120बी, 420, 467, 468, 471 और 409 के तहत दोषी ठहराया। भारती को तीन वर्ष की सजा और ₹1 लाख का जुर्माना सुनाया गया।
अयोग्यता और उपचुनाव
दोषसिद्धि बरकरार रहने के कारण जन प्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 की धारा 8, संविधान के अनुच्छेद 191(1)(ई) और लिली थॉमस बनाम भारत संघ (2013) में सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के तहत भारती को तत्काल प्रभाव से अयोग्य घोषित कर दिया गया। इसके बाद विधानसभा सचिवालय ने दतिया विधानसभा सीट को रिक्त घोषित किया और भारत निर्वाचन आयोग ने उपचुनाव की अधिसूचना जारी की।
भारती ने दतिया उपचुनाव को 'अपूरणीय क्षति' बताते हुए रोक की माँग की थी, किंतु उच्च न्यायालय ने इस तर्क को अस्वीकार करते हुए स्पष्ट किया कि किसी व्यक्ति का विधायक या सांसद होना और उसकी राजनीतिक स्थिति प्रभावित होना, सजा पर रोक का आधार नहीं बन सकता।
कानूनी स्थिति और आगे की राह
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने सजा पर रोक तो नहीं लगाई, लेकिन नोटिस जारी कर मामले को विचाराधीन रखा है। यह ऐसे समय में आया है जब जन प्रतिनिधियों की अयोग्यता से जुड़े मामलों में न्यायपालिका की भूमिका पर व्यापक बहस जारी है। अगली सुनवाई में अभियोजन पक्ष और बैंक का जवाब आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी।