राजेंद्र भारती को कोऑपरेटिव बैंक घोटाले में 3 साल की सजा, सह आरोपी भी दोषी
सारांश
Key Takeaways
- राजेंद्र भारती को तीन साल की सजा मिली।
- सह आरोपी रघुवीर शरण प्रजापति को भी सजा हुई।
- उन्हें 50 हजार रुपये के निजी बॉंड पर जमानत मिली।
- सुप्रीम कोर्ट ने मामले को दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट में स्थानांतरित किया।
- राजेंद्र भारती ने राजनीतिक दबाव का आरोप लगाया।
भोपाल, 2 अप्रैल (राष्ट्र प्रेस)। दिल्ली स्थित राऊज एवेन्यू कोर्ट ने कोऑपरेटिव बैंक घोटाले के मामले में दतिया (मध्य प्रदेश) से कांग्रेस के विधायक राजेंद्र भारती को तीन साल की सजा सुनाई है। साथ ही, उनके सह-आरोपी रघुवीर शरण प्रजापति को भी इतनी ही सजा दी गई है। सजा के बाद, अदालत ने दोनों दोषियों को 50 हजार रुपये के निजी बॉंड पर जमानत प्रदान की है। उन्हें उच्च न्यायालय में अपील करने के लिए 30 दिन का समय भी दिया गया है।
एक दिन पहले, अदालत ने राजेंद्र भारती को दोषी ठहराया था, जिसके बाद उन्हें जेल भेजा गया। अदालत ने कहा कि राजेंद्र भारती भारतीय दंड संहिता की धारा 120 बी (आपराधिक साजिश) और धारा 420, 467, 468 और 471 (धोखाधड़ी और जालसाजी) के तहत अपराधों का दोषी पाए गए हैं।
यह मामला लंबे समय से चर्चा में था और इसकी सुनवाई को लेकर विवाद भी हुआ। दरअसल, राजेंद्र भारती ने अपने खिलाफ चल रहे मामले को ग्वालियर की एमपी-एमएलए कोर्ट से दिल्ली में स्थानांतरित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था। उन्होंने आरोप लगाया था कि मध्य प्रदेश के वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व गृहमंत्री नरोत्तम मिश्रा तथा उनके परिवार के लोग इस मामले को प्रभावित करने का प्रयास कर रहे हैं।
राजेंद्र भारती ने यह भी कहा था कि अभियोजन पक्ष के अधिकारी भी राजनीतिक दबाव में काम कर रहे हैं, जिससे उन्हें निष्पक्ष सुनवाई नहीं मिल रही। इन आरोपों के आधार पर उन्होंने मामले की सुनवाई ग्वालियर के बजाय किसी अन्य स्थान पर कराने की मांग की थी। सुप्रीम कोर्ट ने उनकी याचिका पर सुनवाई करते हुए इस मामले को दिल्ली की राऊज एवेन्यू कोर्ट में स्थानांतरित कर दिया था।