'वंदे मातरम' पर रोक के आरोप: बीदर के शाहीन पीयू कॉलेज प्रिंसिपल अब्दुल हकीम पर एफआईआर दर्ज
सारांश
मुख्य बातें
कर्नाटक के बीदर जिले के चिटगुप्पा स्थित शाहीन पीयू कॉलेज के प्रिंसिपल अब्दुल हकीम के खिलाफ गुरुवार, 20 अगस्त को पुलिस ने एफआईआर दर्ज की। छात्रों के अभिभावकों का आरोप है कि स्वतंत्रता दिवस समारोह के बाद हकीम ने छात्रों को 'भारत माता की जय' और 'वंदे मातरम' के नारे लगाने से यह कहते हुए रोका कि ये नारे एक विशेष धर्म से जुड़े हैं। मामला दर्ज होते ही कई हिंदू संगठनों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।
शिकायत में क्या है
शिकायत चिटगुप्पा की तालाब गली निवासी हिरोबा गौली ने दर्ज कराई, जिनका बेटा शाहीन कॉलेज में पीयूसी द्वितीय वर्ष का छात्र है। शिकायत के अनुसार, 15 अगस्त को कॉलेज में राष्ट्रीय ध्वज फहराकर और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के साथ स्वतंत्रता दिवस मनाया गया।
कार्यक्रम के बाद सुबह लगभग 10 बजे जब गौली का बेटा और अन्य छात्र कॉलेज परिसर से निकल रहे थे, तो उन्होंने कथित तौर पर 'भारत माता की जय' और 'वंदे मातरम' के नारे लगाए। शिकायत में आरोप है कि प्रिंसिपल हकीम ने छात्रों को तत्काल रोका और चेतावनी दी कि ये नारे एक खास धर्म से जुड़े हैं, इसलिए कॉलेज परिसर में इन्हें दोबारा नहीं लगाया जाना चाहिए।
एक छात्र को कमरे में बंद करने का आरोप
शिकायतकर्ता गौली ने यह भी आरोप लगाया कि इस घटना के दौरान एक छात्र को एक कमरे में ले जाकर लगभग एक घंटे तक रखा गया और कथित तौर पर उसे मानसिक रूप से प्रताड़ित किया गया। शिकायत में प्रिंसिपल पर हिंदू और मुस्लिम छात्रों के बीच भेदभाव करने और दोनों समुदायों के बीच शत्रुता को बढ़ावा देने का भी आरोप लगाया गया है।
एफआईआर में कौन-सी धाराएँ लगाई गईं
चिटगुप्पा पुलिस ने प्रिंसिपल हकीम के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 126(2), 352 और 353(2) के तहत एफआईआर दर्ज की है। ये धाराएँ क्रमशः अनुचित रूप से प्रतिबंधित करने, सार्वजनिक शांति भंग करने के उद्देश्य से जानबूझकर अपमान करने और विभिन्न समुदायों के बीच दुश्मनी या घृणा को बढ़ावा देने से संबंधित हैं।
गौरतलब है कि यह शाहीन स्कूल-कॉलेज समूह का वही संस्थान है जो इससे पहले भी विवादों में रहा है। यह घटना ऐसे समय में सामने आई है जब राष्ट्रीय प्रतीकों और शैक्षणिक संस्थानों में उनके उपयोग को लेकर देशभर में बहस तेज है।
हिंदू संगठनों का विरोध प्रदर्शन
एफआईआर दर्ज होने के बाद कई हिंदू संगठनों ने चिटगुप्पा में विरोध प्रदर्शन किया और प्रिंसिपल हकीम के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की माँग की। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि राष्ट्रीय नारों पर रोक लगाना देशभक्ति की भावना के खिलाफ है।
जाँच की स्थिति
पुलिस ने जाँच शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार, छात्रों और कॉलेज कर्मचारियों के बयान दर्ज किए जाएँगे और उपलब्ध साक्ष्यों की जाँच की जाएगी। प्रिंसिपल हकीम की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। जाँच के निष्कर्षों के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी।