शरद पवार गुट के BJP में जाने की अटकलें, शिवसेना (UBT) बोली — MVA पर कोई असर नहीं
सारांश
मुख्य बातें
शिवसेना (यूबीटी) के प्रवक्ता अवधेश शुक्ला ने 6 नवंबर 2026 को मुंबई में स्पष्ट किया कि राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (NCP) के शरद पवार गुट के भारतीय जनता पार्टी (BJP) के साथ जाने की राजनीतिक गलियारों में चर्चा ज़रूर है, लेकिन इससे विपक्षी गठबंधन महाविकास आघाड़ी (MVA) और इंडिया गठबंधन पर कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। उन्होंने यह भी कहा कि शरद पवार महाराष्ट्र के वरिष्ठ और प्रभावशाली नेता हैं, और इस समय सभी को उनके स्वास्थ्य सुधार की प्रतीक्षा करनी चाहिए।
NCP विभाजन की पृष्ठभूमि
गौरतलब है कि NCP पहले ही दो धड़ों में विभाजित हो चुकी है — एक गुट शरद पवार के नेतृत्व में है और दूसरा अजित पवार के। अजित पवार का धड़ा पहले ही BJP के साथ महायुति सरकार में शामिल हो चुका है। अब राजनीतिक संभावनाओं को देखते हुए अटकलें चल रही हैं कि शरद पवार का गुट भी BJP के निकट आ सकता है।
शुक्ला ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा शरद पवार के स्वास्थ्य और उनकी पुत्री सुप्रिया सुले को लेकर दिए गए बयान ने भी इन विलय की अटकलों को हवा दी है। हालाँकि, उन्होंने स्वीकार किया कि अभी इस बारे में कुछ भी निश्चित तौर पर नहीं कहा जा सकता।
सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल की भूमिका
शुक्ला के अनुसार, NCP के अजित गुट के नेता सुनील तटकरे और प्रफुल्ल पटेल चाहते हैं कि शरद पवार भी उनके साथ आएं। उन्होंने कहा कि शरद पवार के स्वास्थ्य में सुधार के बाद ही राजनीतिक स्थिति स्पष्ट होगी। शुक्ला ने यह भी संकेत दिया कि फिलहाल BJP की ओर से ही ऐसी बातें अधिक सामने आ रही हैं।
MVA की मज़बूती पर दावा
शिवसेना (यूबीटी) प्रवक्ता ने दृढ़ता से कहा कि महाविकास आघाड़ी न अभी कमज़ोर है और न भविष्य में कमज़ोर होगी। उद्धव ठाकरे के नेतृत्व में उनकी पार्टी महाराष्ट्र के किसानों, युवाओं और रोज़गार के मुद्दों को लगातार उठा रही है। उन्होंने आदित्य ठाकरे के अहिल्यानगर दौरे का उल्लेख करते हुए कहा कि पार्टी के नेता ज़मीनी स्तर पर सक्रिय हैं। शुक्ला ने साफ़ कहा कि यदि कोई नेता या दल गठबंधन छोड़ना चाहता है तो वह स्वतंत्र है।
UCC, SIR और अमित शाह के बयानों पर प्रतिक्रिया
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह द्वारा BJP-शासित राज्यों में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू करने के बयान पर शुक्ला ने कहा कि जब भी देशहित का प्रश्न होगा, शिवसेना (यूबीटी) सरकार का साथ देगी। लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि कोई कानून देशहित में नहीं होगा, तो पार्टी उसका विरोध करेगी। उन्होंने UGC कानून का उदाहरण दिया, यह कहते हुए कि उनकी पार्टी इस कानून का समर्थन नहीं करती क्योंकि इससे जातिगत भेदभाव को बढ़ावा मिल सकता है।
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के मुद्दे पर शुक्ला ने गृह मंत्री शाह के उन आरोपों पर पलटवार किया जिनमें कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर अराजकता फैलाने और बांग्लादेशी घुसपैठियों को बचाने के इल्ज़ाम लगाए गए थे। शुक्ला ने माँग की कि सरकार अपने दावों के आँकड़े सार्वजनिक करे। उनके अनुसार, 2014 से अब तक लगभग दो से ढाई हज़ार लोगों को ही देश से बाहर निकाले जाने की जानकारी सामने आती है, जबकि अमित शाह तीन करोड़ घुसपैठियों का आँकड़ा बता रहे हैं।
मुख्य चुनाव आयुक्त और जवाबदेही का सवाल
शुक्ला ने आरोप लगाया कि सरकार SIR के मुद्दे का उपयोग मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को बचाने के लिए कर रही है। उन्होंने कहा कि SIR की प्रक्रिया होनी चाहिए, लेकिन इसके नाम पर जिन भारतीय नागरिकों के वोट काटे गए हैं, उसका जवाब देना होगा। शुक्ला ने यह भी दावा किया कि जब ज्ञानेश कुमार अपने पद से हटेंगे, तब प्रधानमंत्री मोदी और गृह मंत्री शाह की राजनीतिक जवाबदेही भी तय होगी। उनका कहना था कि सरकार को आरोप-प्रत्यारोप के बजाय जनता के सवालों का जवाब देना चाहिए।