31 अगस्त 2026
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शरीयत की रोशनी में जीएं मुस्लिम महिलाएं: रजवी बरेलवी ने किया केरल ग्रैंड मुफ्ती के बयान का समर्थन

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शरीयत की रोशनी में जीएं मुस्लिम महिलाएं: रजवी बरेलवी ने किया केरल ग्रैंड मुफ्ती के बयान का समर्थन

सारांश

केरल के ग्रैंड मुफ्ती के विवादित बयान को बरेली में मौलाना शहाबुद्दीन रजवी का खुला समर्थन मिला। रजवी ने कहा — शरीयत की रोशनी में जीना ही मुस्लिम महिलाओं की असली इज्जत है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब महिला स्वायत्तता और धार्मिक मान्यताओं के बीच की बहस देश भर में तेज है।

मुख्य बातें

मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने 31 अगस्त को बरेली में केरल के ग्रैंड मुफ्ती शेख अबूबकर अहमद के बयान का समर्थन किया।
रजवी ने कहा कि मुस्लिम महिलाओं को सार्वजनिक स्थानों पर हिजाब के साथ जाना चाहिए और शरीयत के अनुसार जीवन जीना चाहिए।
उन्होंने स्पष्ट किया कि ऑफिस, स्कूल या कॉलेज जाने वाली महिलाएं हिजाब के साथ अपना काम जारी रख सकती हैं।
PM नरेंद्र मोदी को उज्बेकिस्तान के सर्वोच्च पुरस्कार से सम्मानित किए जाने का उन्होंने स्वागत किया।
ग्रैंड मुफ्ती के बयान के बाद से मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों पर राष्ट्रीय बहस जारी है।

ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने 31 अगस्त को बरेली में कहा कि केरल के ग्रैंड मुफ्ती शेख अबूबकर अहमद ने मुस्लिम महिलाओं के सार्वजनिक आचरण पर जो बयान दिया है, वह पूरी तरह सही है। उनके इस समर्थन ने उस विवाद को और हवा दे दी है जो ग्रैंड मुफ्ती के मूल बयान के बाद से जारी है।

रजवी बरेलवी का पक्ष

मौलाना रजवी ने कहा कि इस्लाम में महिलाओं को पूरा सम्मान दिया गया है और शरीयत के अनुसार जीवन जीने में ही उनकी इज्जत है। उनके अनुसार, यदि मुस्लिम महिलाएं बाजार, पिकनिक स्थल या किसी सार्वजनिक जगह पर जाएं तो हिजाब के साथ जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि आमतौर पर देखा जा रहा है कि कुछ मुस्लिम महिलाएं बिना हिजाब के बाहर निकलती हैं, जिससे उनके और दूसरे समुदाय की महिलाओं के पहनावे में कोई अंतर नहीं रह जाता।

उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यदि कोई महिला ऑफिस, स्कूल या कॉलेज जाती है तो वह हिजाब के साथ अपनी पढ़ाई और काम जारी रख सकती है। उनके शब्दों में, 'शरीयत की रोशनी में अमल करने पर हर जगह इज्जत और सम्मान मिलेगा।'

ग्रैंड मुफ्ती के बयान पर उठा विवाद

केरल के ग्रैंड मुफ्ती शेख अबूबकर अहमद के मुस्लिम महिलाओं के सार्वजनिक स्थानों पर जाने से संबंधित बयान के बाद से देश भर में बहस छिड़ी हुई है। आलोचकों का कहना है कि इस तरह के बयान महिलाओं की स्वायत्तता और संवैधानिक अधिकारों पर सवाल खड़े करते हैं। वहीं, मौलाना रजवी जैसे धर्मगुरु इसे इस्लामी मान्यताओं की व्याख्या बताते हुए समर्थन दे रहे हैं।

PM मोदी के उज्बेकिस्तान सम्मान पर प्रतिक्रिया

मौलाना रजवी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को उज्बेकिस्तान के सर्वोच्च राजकीय पुरस्कार से सम्मानित किए जाने पर कहा कि प्रधानमंत्री के मुस्लिम देशों के साथ अच्छे संबंध हैं। उन्होंने कहा कि मोदी की सर्वाधिक विदेश यात्राएं मुस्लिम देशों में हुई हैं और भारत में भी मुस्लिम देशों के राष्ट्राध्यक्ष आते रहे हैं।

कर्नाटक उच्च शिक्षा मंत्री के बयान पर रुख

कर्नाटक के उच्च शिक्षा मंत्री के एक बयान पर मौलाना रजवी ने कहा कि किसी मुस्लिम कार्यक्रम में इस्लाम को श्रेष्ठ बताना गलत नहीं है। उनका तर्क था कि हर व्यक्ति अपनी आस्था के बारे में बात करता है और भारतीय संविधान इस आस्था को मान्यता देता है। उन्होंने कहा, 'मैं मुस्लिम धर्म का अनुयायी हूं और मेरे लिए इस्लाम धर्म श्रेष्ठ है।'

आगे क्या

यह विवाद ऐसे समय में सामने आया है जब देश में मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों, हिजाब और व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़े मुद्दे सामाजिक और राजनीतिक बहस के केंद्र में हैं। धर्मगुरुओं के इस तरह के बयान आने वाले दिनों में और अधिक प्रतिक्रियाएं उत्पन्न कर सकते हैं।

संपादकीय दृष्टिकोण

तीन तलाक या मुस्लिम पर्सनल लॉ से जुड़े मुद्दे न्यायिक या विधायी बहस में होते हैं। मुख्यधारा की कवरेज इस विवाद को 'धार्मिक बनाम आधुनिक' के सरल खाँचे में रखती है, लेकिन असली सवाल यह है कि क्या इन बयानों का सामुदायिक दबाव के रूप में व्यावहारिक असर महिलाओं की शिक्षा और रोज़गार भागीदारी पर पड़ता है — जिसका जवाब कोई नहीं माँग रहा।
RashtraPress
31 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने क्या बयान दिया है?
मौलाना रजवी ने कहा कि मुस्लिम महिलाओं को शरीयत की रोशनी में जीवन जीना चाहिए और सार्वजनिक स्थानों पर हिजाब के साथ जाना चाहिए। उन्होंने केरल के ग्रैंड मुफ्ती शेख अबूबकर अहमद के विवादित बयान का पूरा समर्थन किया।
केरल के ग्रैंड मुफ्ती का विवादित बयान क्या था?
केरल के ग्रैंड मुफ्ती शेख अबूबकर अहमद ने मुस्लिम महिलाओं के सार्वजनिक स्थानों पर जाने को लेकर एक बयान दिया था, जिसमें उन्होंने शरीयत के अनुसार आचरण पर जोर दिया। इस बयान के बाद देश भर में विवाद शुरू हो गया।
क्या मुस्लिम महिलाएं ऑफिस या स्कूल नहीं जा सकतीं?
मौलाना रजवी ने स्पष्ट किया कि मुस्लिम महिलाएं ऑफिस, स्कूल या कॉलेज जा सकती हैं, लेकिन हिजाब के साथ। उनके अनुसार शरीयत काम या शिक्षा पर रोक नहीं लगाती, बल्कि पहनावे का निर्देश देती है।
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात क्या है?
ऑल इंडिया मुस्लिम जमात एक राष्ट्रीय मुस्लिम धार्मिक संगठन है जिसके राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना मुफ्ती शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी हैं। यह संगठन इस्लामी मामलों पर अपनी राय और फतवे जारी करता है।
इस विवाद का मुस्लिम महिलाओं पर क्या असर पड़ सकता है?
आलोचकों का कहना है कि इस तरह के बयान सामाजिक दबाव बना सकते हैं और महिलाओं की शिक्षा व रोज़गार भागीदारी को प्रभावित कर सकते हैं। वहीं, समर्थकों का तर्क है कि यह धार्मिक मान्यता की अभिव्यक्ति है जिसकी अनुमति भारतीय संविधान देता है।
राष्ट्र प्रेस
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