11 अगस्त 2026
LIVE
Get it on Google Play Download on the App Store

शशि थरूर का वंदे मातरम संशोधन पर सवाल: '12 मिनट खड़े रहना व्यावहारिक है?'

शेयर करें:
ऑडियो वॉइस लोड हो रही है…
शशि थरूर का वंदे मातरम संशोधन पर सवाल: '12 मिनट खड़े रहना व्यावहारिक है?'

सारांश

वंदे मातरम को जन गण मन के बराबर कानूनी दर्जा मिलने के बाद कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने व्यावहारिक सवाल उठाया — क्या हर सरकारी कार्यक्रम में दर्शक कुल 12 मिनट बिना हिले खड़े रह सकते हैं? संसद में बिना बहस पास हुए इस संशोधन पर बहस तेज हो गई है।

मुख्य बातें

संसद ने 'राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026' पारित किया; राष्ट्रपति की मंजूरी मिल चुकी है।
अब हर सरकारी कार्यक्रम की शुरुआत और अंत में जन गण मन के साथ पूरे वंदे मातरम का गायन अनिवार्य होगा।
पूरे वंदे मातरम के गायन में 3 मिनट 10 सेकंड लगते हैं; तमिलनाडु में राज्य गीत के 2 अतिरिक्त मिनट भी जुड़ेंगे।
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने एक्स पर पोस्ट कर 12 मिनट तक खड़े रहने की व्यावहारिकता पर सवाल उठाया।
थरूर ने आशंका जताई कि यह कानून राष्ट्रगीत के प्रति सम्मान बढ़ाने की बजाय उलटा असर डाल सकता है।

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने 11 अगस्त 2026 को 'वंदे मातरम संशोधन' पर तीखे सवाल उठाए, जिसे राष्ट्रपति की मंजूरी मिल चुकी है। इस संशोधन के तहत अब हर सरकारी समारोह की शुरुआत और समापन पर राष्ट्रगान 'जन गण मन' के साथ-साथ पूरे राष्ट्रीय गीत 'वंदे मातरम' का गायन अनिवार्य होगा।

क्या है नया कानून

संसद ने 'राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026' पारित किया है। यह संशोधन 'राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम अधिनियम, 1971' के तहत 'वंदे मातरम' को 'जन गण मन' के बराबर कानूनी दर्जा और सुरक्षा प्रदान करता है। नए प्रावधान के अनुसार, किसी भी सरकारी कार्यक्रम में दोनों गीतों का पूर्ण गायन अनिवार्य होगा।

थरूर की एक्स पर आपत्ति

थरूर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा, 'राष्ट्रपति ने संसद में बिना किसी चर्चा के पास हुए वंदे मातरम संशोधन को मंजूरी दे दी है। इस संशोधन के तहत, किसी भी सरकारी कार्यक्रम की शुरुआत और समापन पर राष्ट्रगान के साथ-साथ राष्ट्रगीत को भी पूरा गाना जरूरी होगा।'

उन्होंने स्पष्ट किया कि वह दोनों गीतों का गहरा सम्मान करते हैं और 'वंदे मातरम' के पहले दो पद गाने में उन्हें कोई आपत्ति नहीं है। हालाँकि, उन्होंने कहा कि शेष चार पद अब तक कभी अनिवार्य नहीं थे।

व्यावहारिक दिक्कत का हवाला

थरूर ने समय की गणना सामने रखी। उनके अनुसार, 'जन गण मन' के दौरान दर्शकों से 52 सेकंड तक सावधान मुद्रा में खड़े रहने की अपेक्षा होती है। पूरे 'वंदे मातरम' के गायन में 3 मिनट 10 सेकंड लगते हैं। इसके अतिरिक्त, तमिलनाडु ने पहले ही निर्णय लिया है कि इन दोनों से पहले तमिल भाषा में राज्य गीत गाया जाएगा, जिसमें 2 मिनट और जुड़ेंगे।

उन्होंने लिखा, 'क्या हम सच में उम्मीद करते हैं कि दर्शक हर कार्यक्रम से पहले और बाद में छह मिनट तक — यानी कुल 12 अतिरिक्त मिनट — सम्मान के साथ और बिना हिले-डुले खड़े रहेंगे? क्या सम्मान और धैर्य को कानून के जरिए लागू किया जा सकता है?'

उलटे असर की आशंका

थरूर ने चेतावनी दी कि इस विधेयक का मूल उद्देश्य — राष्ट्रीय गीत के प्रति सम्मान बढ़ाना — पूरा नहीं होगा, बल्कि इसका विपरीत प्रभाव पड़ सकता है। यह ऐसे समय में आया है जब संसद में विधेयक पर बहस न होने को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं।

आगे क्या होगा

राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद यह संशोधन कानून बन चुका है। अब सरकारी विभागों को अपने समारोहों की संरचना इसके अनुरूप बदलनी होगी। तमिलनाडु जैसे राज्यों में, जहाँ राज्य गीत भी अनिवार्य है, कार्यक्रमों की अवधि पर इसका सीधा असर पड़ेगा। विशेषज्ञों का कहना है कि क्रियान्वयन की व्यावहारिकता और अनुपालन तंत्र पर स्पष्टता अभी बाकी है।

संपादकीय दृष्टिकोण

बल्कि संवैधानिक भी है — संसद में बिना चर्चा के पारित एक विधेयक जो नागरिकों के आचरण को विनियमित करता है, वह लोकतांत्रिक प्रक्रिया पर भी सवाल खड़ा करता है। गौरतलब है कि 2016 में सर्वोच्च न्यायालय ने सिनेमाघरों में राष्ट्रगान अनिवार्य किया था, जिसे बाद में संशोधित करना पड़ा — यह इतिहास बताता है कि देशभक्ति को कानून से थोपना अक्सर उलटा पड़ता है। असली बहस यह है कि क्या राष्ट्रीय प्रतीकों के प्रति आदर भाव विधायी बाध्यता से उत्पन्न होता है, या सांस्कृतिक जुड़ाव से — और इस पर संसद में खुली चर्चा क्यों नहीं हुई।
RashtraPress
11 अगस्त 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

वंदे मातरम संशोधन 2026 क्या है?
'राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026' के तहत 'वंदे मातरम' को 'जन गण मन' के बराबर कानूनी दर्जा दिया गया है। इसके अनुसार, हर सरकारी कार्यक्रम की शुरुआत और समापन पर दोनों गीतों का पूर्ण गायन अनिवार्य होगा।
शशि थरूर ने इस संशोधन पर क्या आपत्ति जताई?
थरूर ने एक्स पर पोस्ट कर कहा कि वंदे मातरम के पूर्ण गायन में 3 मिनट 10 सेकंड लगते हैं और तमिलनाडु में राज्य गीत के 2 मिनट और जुड़ेंगे, जिससे हर कार्यक्रम में कुल 12 अतिरिक्त मिनट तक खड़े रहना होगा। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सम्मान को कानून से लागू किया जा सकता है।
क्या यह विधेयक संसद में बहस के बाद पारित हुआ?
थरूर के अनुसार यह विधेयक संसद में बिना किसी चर्चा के पारित हुआ। राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने के बाद यह कानून बन चुका है।
तमिलनाडु पर इस संशोधन का क्या असर होगा?
तमिलनाडु ने पहले ही तय किया है कि सरकारी कार्यक्रमों में जन गण मन और वंदे मातरम से पहले 2 मिनट का तमिल राज्य गीत भी गाया जाएगा। इससे तमिलनाडु के सरकारी समारोहों में कुल गायन अवधि और भी अधिक हो जाएगी।
वंदे मातरम को पहले कितने पद गाना जरूरी था?
इस संशोधन से पहले 'वंदे मातरम' के केवल पहले दो पद गाने की परंपरा थी और शेष चार पद कभी अनिवार्य नहीं थे। नए कानून के तहत अब पूरे छह पदों का गायन अनिवार्य होगा।
राष्ट्र प्रेस
सिलसिला

जुड़े बिंदु

इस ख़बर के पीछे की कड़ियाँ — सबसे नई पहले।

8 बिंदु
  1. नवीनतम कल
  2. 2 सप्ताह पहले
  3. 2 सप्ताह पहले
  4. 2 सप्ताह पहले
  5. 3 सप्ताह पहले
  6. 3 सप्ताह पहले
  7. 3 सप्ताह पहले
  8. 8 महीने पहले