मध्य प्रदेश: श्योपुर बाढ़ राहत घोटाले में तहसीलदार अमिता सिंह तोमर की गिरफ्तारी
सारांश
Key Takeaways
- मध्य प्रदेश में बाढ़ राहत घोटाला
- अमिता सिंह तोमर की गिरफ्तारी
- फर्जी खातों में 2.57 करोड़ का गबन
- विशेष टीम द्वारा जांच की गई
- भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज
श्योपुर, 27 मार्च (राष्ट्र प्रेस)। मध्य प्रदेश के श्योपुर जिले में साल 2021 के चर्चित बाढ़ राहत घोटाले के सिलसिले में एक महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए विजयपुर तहसील की तहसीलदार अमिता सिंह तोमर को पुलिस ने गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
सूत्रों के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट द्वारा उनकी अग्रिम जमानत याचिका खारिज होने के बाद पुलिस ने यह कार्रवाई की। बड़ौदा एसडीओपी अविनीत शर्मा के नेतृत्व में बनी विशेष टीम ने गुरुवार को ग्वालियर स्थित उनके निवास पर छापेमारी कर उन्हें हिरासत में लिया और श्योपुर न्यायालय में पेश किया, जहाँ से उन्हें जेल भेज दिया गया।
यह मामला वर्ष 2021 में श्योपुर जिले में आई भीषण बाढ़ के बाद राहत वितरण में हुई अनियमितताओं से संबंधित है। बाढ़ के बाद बड़ौदा तहसील में 794 प्रभावित हितग्राहियों के नुकसान का आकलन किया गया था, लेकिन जांच में यह खुलासा हुआ कि 127 फर्जी खातों में लगभग 2.57 करोड़ रुपए की राशि स्थानांतरित कर गबन किया गया।
इस घोटाले का खुलासा ऑडिट के दौरान हुआ, जिसके बाद डिप्टी कलेक्टर स्तर पर जांच शुरू की गई। जांच में कई अधिकारियों और कर्मचारियों की संलिप्तता सामने आई, जिनमें तहसीलदार अमिता सिंह तोमर भी शामिल थीं। पूर्व एसडीओपी प्रवीण कुमार अष्ठाना ने विस्तृत जांच करते हुए 25 पटवारियों समेत कुल 110 लोगों को आरोपी बनाया था। जांच के दौरान कुछ आरोपियों ने गबन की गई राशि का आंशिक भुगतान भी किया।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि घोटाले में कुछ भुगतान आरोपियों के परिवार के खातों में भी किए गए थे। बड़ौदा थाना पुलिस ने अमिता सिंह तोमर के खिलाफ भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया था। उन पर आरोप है कि उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए राहत राशि वितरण प्रक्रिया में धांधली की।
हाई कोर्ट से राहत न मिलने पर अमिता सिंह तोमर ने सुप्रीम कोर्ट में विशेष अनुमति याचिका दायर की थी, लेकिन कोर्ट नंबर 13 में हुई सुनवाई के दौरान न्यायाधीशों ने मामले को गंभीर मानते हुए जमानत देने से इनकार कर दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि इस मामले में राहत देने का कोई ठोस आधार नहीं है और सभी लंबित आवेदनों को निरस्त कर दिया। इसके बाद पुलिस ने तुरंत कार्रवाई करते हुए उन्हें गिरफ्तार कर लिया।