शिया बोर्ड ने जनसांख्यिकीय समिति का स्वागत किया, मौलाना यासूब अब्बास बोले — आबादी में अचानक बदलाव की जांच जरूरी
सारांश
मुख्य बातें
ऑल इंडिया शिया पर्सनल लॉ बोर्ड ने केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा जनसांख्यिकीय बदलावों की निगरानी के लिए गठित उच्चस्तरीय समिति का स्वागत किया है। बोर्ड के महासचिव मौलाना यासूब अब्बास ने इस कदम को सराहनीय बताते हुए कहा कि देश में जनसंख्या के पैटर्न पर नजर रखना सरकार की बुनियादी जिम्मेदारी है। यह प्रतिक्रिया 27 मई 2026 को लखनऊ में एक विशेष बातचीत के दौरान सामने आई।
समिति पर बोर्ड का रुख
मौलाना यासूब अब्बास ने कहा, 'गृह मंत्री द्वारा गठित उच्च-स्तरीय समिति एक बहुत ही सराहनीय पहल है। जनसांख्यिकीय बदलावों पर नजर रखी जानी चाहिए। आबादी कहां घट रही है, कहां बढ़ रही है और लोग किन व्यवसायों में लगे हुए हैं, इसे ट्रैक करते हुए सरकार को आबादी पर पूरी निगरानी रखनी चाहिए।' उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि परिवार धीरे-धीरे बढ़ते हैं, इसलिए किसी भी क्षेत्र में जनसंख्या में अचानक उछाल या असामान्य कमी दिखे तो उसकी जांच अवश्य होनी चाहिए।
शिया समुदाय के हक की मांग
मौलाना अब्बास ने गृह मंत्री अमित शाह से विनम्र अपील करते हुए कहा कि वे अल्पसंख्यक शिया समुदाय से आते हैं और इस समुदाय को वर्तमान में उसका उचित हिस्सा नहीं दिया जा रहा है। उन्होंने जोर दिया कि यह समिति देश के हित में काम करेगी और सभी समुदायों के बीच संतुलन बनाए रखने में सहायक सिद्ध होगी। गौरतलब है कि शिया समुदाय मुस्लिम आबादी का एक अल्पसंख्यक वर्ग है, जो अपनी अलग प्रतिनिधित्व की मांग लंबे समय से उठाता रहा है।
ईद-उल-अजहा पर शांति की अपील
ईद-उल-अजहा (बकरीद) के अवसर पर मौलाना यासूब अब्बास ने सभी मुसलमानों से अपील की कि वे त्योहार शांति और संयम के साथ मनाएं। उन्होंने कहा, 'इस्लाम धर्म का आदेश है कि किसी की भावनाओं को ठेस नहीं पहुंचनी चाहिए।' उन्होंने स्पष्ट किया कि कुर्बानी की रस्में इस प्रकार न निभाई जाएं कि खून खुले में बहे, जानवरों के अवशेष सार्वजनिक स्थानों पर पड़े रहें या कचरा सड़कों पर फेंका जाए, जिससे अन्य समुदायों को असुविधा हो। उन्होंने हिंदू-मुस्लिम भाईचारे पर विशेष जोर देते हुए कहा कि भारत में हिंदू भाई भी पड़ोसी और बंधु हैं।
SIR मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर प्रतिक्रिया
विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सर्वोच्च न्यायालय के फैसले पर मौलाना अब्बास ने कहा कि देश की सर्वोच्च अदालत के निर्णय पर किसी को सवाल नहीं उठाना चाहिए। उन्होंने कहा, 'जब यह मामला विवादित हो गया तो यह सुप्रीम कोर्ट में गया। अदालत ने इसकी वैधता को बरकरार रखा है। अदालत का फैसला जो भी हो, वह हमें स्वीकार्य होगा।' यह बयान ऐसे समय में आया है जब SIR पर विभिन्न राजनीतिक दलों में मतभेद बने हुए हैं।
आगे की दिशा
शिया बोर्ड के इस रुख को व्यापक संदर्भ में देखें तो यह पहली बार है जब किसी मुस्लिम संगठन ने जनसांख्यिकीय निगरानी समिति का खुलकर स्वागत किया है। विशेषज्ञों के अनुसार, इस प्रकार की बहुसमुदायिक सहमति समिति की विश्वसनीयता और कार्यक्षमता दोनों के लिए महत्वपूर्ण होगी। समिति के कार्यक्षेत्र और रिपोर्टिंग ढांचे पर विस्तृत दिशानिर्देश अभी सार्वजनिक नहीं किए गए हैं।