गिग और असंगठित श्रमिकों के लिए राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्डों का गठन, केंद्र ने जारी की अधिसूचना
सारांश
मुख्य बातें
केंद्र सरकार ने 30 अक्टूबर 2026 को असंगठित क्षेत्र, गिग वर्कर्स और प्लेटफॉर्म वर्कर्स के लिए राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्डों के गठन की आधिकारिक अधिसूचना जारी की। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने शुक्रवार को बताया कि ये बोर्ड सामाजिक सुरक्षा संहिता के तहत गठित किए गए हैं और इनका उद्देश्य करोड़ों असंगठित श्रमिकों के लिए कल्याणकारी योजनाओं की सिफारिश व निगरानी करना होगा। यह कदम देश में तेज़ी से विस्तार पा रही गिग अर्थव्यवस्था में काम करने वाले लाखों श्रमिकों को औपचारिक सामाजिक सुरक्षा ढाँचे से जोड़ने की दिशा में एक निर्णायक पहल है।
बोर्डों की संरचना और नेतृत्व
इन राष्ट्रीय सामाजिक सुरक्षा बोर्डों की अध्यक्षता केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री करेंगे। बोर्डों में केंद्र और राज्य सरकारों के प्रतिनिधियों के साथ-साथ एग्रीगेटर कंपनियों, उद्योग जगत, नागरिक समाज संगठनों, श्रमिक संगठनों और गिग व प्लेटफॉर्म वर्कर्स के प्रतिनिधि भी शामिल होंगे। यह बहु-हितधारक संरचना यह सुनिश्चित करने के लिए तैयार की गई है कि नीति-निर्माण में उन्हीं लोगों की आवाज़ हो जो इससे सबसे अधिक प्रभावित होते हैं।
बोर्डों की भूमिका और जिम्मेदारियाँ
सरकार के अनुसार, ये बोर्ड विभिन्न श्रमिक वर्गों के लिए उपयुक्त सामाजिक सुरक्षा योजनाओं की सिफारिश करेंगे और सामाजिक सुरक्षा संहिता के क्रियान्वयन से जुड़े मामलों पर केंद्र सरकार को सलाह देंगे। इसके अतिरिक्त, वे केंद्र द्वारा संचालित कल्याणकारी योजनाओं की निगरानी करेंगे, राज्यों में रिकॉर्ड प्रबंधन व्यवस्था की समीक्षा करेंगे और सामाजिक सुरक्षा कोष से होने वाले व्यय का परीक्षण भी करेंगे। बोर्डों की बैठक वर्ष में कम से कम तीन बार आयोजित की जाएगी और बैठकों की कार्यप्रणाली केंद्र सरकार द्वारा निर्धारित की जाएगी।
गिग अर्थव्यवस्था का बढ़ता दायरा
श्रम मंत्रालय का मानना है कि ऑनलाइन डिलीवरी, राइड-हेलिंग, लॉजिस्टिक्स और डिजिटल प्लेटफॉर्म आधारित सेवाओं से जुड़े लाखों श्रमिक इस समय बिना किसी औपचारिक सामाजिक सुरक्षा के कार्यरत हैं। गौरतलब है कि भारत में गिग अर्थव्यवस्था का विस्तार पिछले पाँच वर्षों में बेहद तेज़ रहा है, फिर भी इन श्रमिकों के लिए स्वास्थ्य बीमा, पेंशन या दुर्घटना कवर जैसी बुनियादी सुविधाओं का अभाव बना रहा। यह ऐसे समय में आया है जब वैश्विक स्तर पर भी गिग वर्कर्स के अधिकारों को लेकर नीतिगत बहस तेज़ हो रही है।
श्रम सुधारों का व्यापक संदर्भ
श्रम मंत्रालय के सचिव चंद्र भूषण कुमार ने सितंबर में आयोजित एक चर्चा के दौरान कहा था कि नए श्रम सुधारों के तहत विभिन्न कानूनों को एकीकृत किया गया है, अनुपालन प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया है, डिजिटल पोर्टल शुरू किए गए हैं, रिटर्न फाइलिंग को एकरूप बनाया गया है और वेतन की परिभाषा में अधिक समानता लाई गई है। उस चर्चा में उद्योग जगत, श्रमिक संगठनों, विशेषज्ञों और वरिष्ठ सरकारी अधिकारियों ने एकमत से कहा था कि नए श्रम कोड नियंत्रण-आधारित नियामक व्यवस्था से सहयोग-आधारित श्रम व्यवस्था की ओर एक महत्वपूर्ण बदलाव का प्रतिनिधित्व करते हैं।
आगे क्या होगा
सरकार का कहना है कि इन बोर्डों का गठन असंगठित क्षेत्र और गिग अर्थव्यवस्था से जुड़े श्रमिकों को औपचारिक सामाजिक सुरक्षा ढाँचे से जोड़ने की दिशा में एक ऐतिहासिक मील का पत्थर साबित होगा। अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि बोर्ड कितनी तेज़ी से कल्याणकारी योजनाओं की सिफारिश करते हैं और उन्हें ज़मीनी स्तर पर लागू करने की समयसीमा क्या होगी।