13 सितंबर 2026
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ब्रिक्स में मानसरोवर मुद्दा न उठाने पर सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा का केंद्र पर हमला

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ब्रिक्स में मानसरोवर मुद्दा न उठाने पर सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा का केंद्र पर हमला

सारांश

सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा ने एक साथ कई मोर्चों पर केंद्र और प्रदेश सरकार को घेरा — मानसरोवर पर चुप्पी से लेकर ऑपरेशन सिंदूर के बाद युद्धविराम तक, और UP के अस्पतालों की बदहाली तक। यह एकाधिक मुद्दों पर एक ही दिन की सपा की आक्रामक राजनीतिक रणनीति को दर्शाता है।

मुख्य बातें

सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा ने 13 सितंबर 2026 को लखनऊ में केंद्र सरकार पर कई मोर्चों पर हमला बोला।
मेहरोत्रा ने सवाल उठाया कि ब्रिक्स सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति की उपस्थिति के बावजूद मानसरोवर का मुद्दा क्यों नहीं उठाया गया।
ऑपरेशन सिंदूर के तहत नौ आतंकवादी ठिकानों को नष्ट करने के बाद युद्धविराम पर उन्होंने कहा यह 'अमेरिकी दबाव' में हुआ।
UP की स्वास्थ्य सेवाओं पर आरोप — अस्पतालों में डॉक्टर, नर्स, बेड की कमी और 'घटिया दवाइयाँ' खरीदने का दावा।
बसपा को BJP की 'बी-टीम' बताते हुए मायावती पर केंद्रीय एजेंसियों के डर से चुप रहने का आरोप लगाया।

समाजवादी पार्टी (सपा) विधायक रविदास मेहरोत्रा ने 13 सितंबर 2026 को लखनऊ में केंद्र सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति की उपस्थिति के बावजूद मानसरोवर का मुद्दा क्यों नहीं उठाया। मेहरोत्रा ने यह भी कहा कि ऑपरेशन सिंदूर, उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की भूमिका पर उनकी सरकार की स्थिति कमज़ोर रही है।

मानसरोवर और ब्रिक्स: चूका हुआ मौका

मेहरोत्रा ने कहा कि जब बारह देशों का ब्रिक्स सम्मेलन हो रहा था और उसमें चीन के राष्ट्रपति भी शामिल थे, तो यह भारत के लिए एक सुनहरा अवसर था। उनके अनुसार, 'भारत सरकार और प्रधानमंत्री के पास करोड़ों हिंदुओं की आस्था के पवित्र केंद्र मानसरोवर को वापस पाने का मुद्दा उठाने का मौका था, लेकिन उन्होंने चीन के राष्ट्रपति से इस पर कोई बात नहीं की।' विधायक ने कहा कि मानसरोवर आज भी चीन के नियंत्रण में है और सरकार की चुप्पी समझ से परे है।

गौरतलब है कि भारत-चीन सीमा विवाद और मानसरोवर यात्रा का मुद्दा दशकों से भारतीय कूटनीति का अटूट हिस्सा रहा है। यह ऐसे समय में और अधिक संवेदनशील हो जाता है जब कोई बहुपक्षीय मंच पर दोनों देशों के नेता आमने-सामने हों।

ऑपरेशन सिंदूर पर तीखा पलटवार

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के ऑपरेशन सिंदूर संबंधी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए मेहरोत्रा ने कहा कि जब पहलगाम हमले में 26 लोग मारे गए, तो भारतीय सेना ने पाकिस्तानी इलाके में घुसकर नौ आतंकवादी ठिकानों को नष्ट किया। उन्होंने कहा, 'बाद में भारत सरकार ने युद्धविराम की घोषणा की, जिसके बारे में कहा जाता है कि ऐसा अमेरिका के दबाव में किया गया था।' मेहरोत्रा ने दावा किया कि यदि युद्धविराम न होता, तो सेना पीओके पर कब्जा करने की स्थिति में हो सकती थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सेना बहादुर और सक्षम है, लेकिन उनकी राय में सरकार, गृह मंत्री और रक्षा मंत्री ने पाकिस्तान से निपटने में कमज़ोरी दिखाई।

उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की दुर्दशा

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्वास्थ्य सेवा संबंधी दावों को खारिज करते हुए मेहरोत्रा ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश के अस्पतालों में पर्याप्त डॉक्टर, फार्मासिस्ट, नर्स और बेड नहीं हैं। उनका कहना था कि सरकार नामी दवा कंपनियों की जगह 'सस्ती और घटिया क्वालिटी की दवाइयाँ' खरीद रही है, जिससे मरीज़ों की जान जोखिम में है। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री ने उसी दिन डॉ. राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज का दौरा किया और रोज़गार देने की बात की, लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे उलट है।

बसपा पर निशाना और ब्रिक्स मेन्यू विवाद

मेहरोत्रा ने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और उनकी प्रमुख मायावती पर आरोप लगाया कि पार्टी अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) की 'बी-टीम' बन चुकी है। उनका दावा था कि CBI, ED और आयकर विभाग जैसी केंद्रीय एजेंसियों के डर से मायावती को चुप करा दिया गया है और बसपा का एकमात्र मकसद अब गैर-भाजपा वोटों को बाँटना रह गया है।

ब्रिक्स मेन्यू विवाद पर मेहरोत्रा ने कहा कि किसी के खान-पान पर बहस बेकार है — असली मुद्दे महंगाई, बेरोज़गारी, भ्रष्टाचार और बिगड़ती स्वास्थ्य सेवाएँ हैं। उन्होंने कहा कि युवा नौकरी के लिए संघर्ष कर रहे हैं और गरीबी बढ़ रही है, लेकिन इन विषयों पर कोई सार्थक चर्चा नहीं हो रही।

आगे क्या होगा

मेहरोत्रा के इन बयानों से स्पष्ट है कि सपा ब्रिक्स कूटनीति, सैन्य ऑपरेशन के बाद के निर्णयों और राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार को आगामी दिनों में भी घेरती रहेगी। यह विधानसभा और सड़क — दोनों स्तरों पर विपक्षी रणनीति का हिस्सा दिख रहा है।

संपादकीय दृष्टिकोण

जो सार्वजनिक रूप से उपलब्ध नहीं हैं। ऑपरेशन सिंदूर पर 'अमेरिकी दबाव' वाला बयान एक गंभीर दावा है जिसकी स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। UP स्वास्थ्य सेवाओं पर आरोप राज्य की पुरानी समस्याओं को उजागर करते हैं, पर इन्हें विपक्षी राजनीतिक संदर्भ में भी देखा जाना चाहिए। मुख्यधारा की कवरेज अक्सर इन बयानों के पीछे की रणनीतिक टाइमिंग — ब्रिक्स और ऑपरेशन सिंदूर की चर्चा के बीच सपा की एकाधिक मुद्दों पर एक साथ सक्रियता — को नज़रअंदाज़ कर देती है।
RashtraPress
13 सितंबर 2026

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा ने मानसरोवर पर क्या सवाल उठाया?
मेहरोत्रा ने कहा कि ब्रिक्स सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति की उपस्थिति के बावजूद प्रधानमंत्री मोदी ने मानसरोवर का मुद्दा नहीं उठाया, जो करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है और फिलहाल चीन के नियंत्रण में है। उन्होंने इसे एक चूका हुआ कूटनीतिक अवसर बताया।
ऑपरेशन सिंदूर पर सपा विधायक की क्या आपत्ति है?
मेहरोत्रा ने कहा कि भारतीय सेना ने पाकिस्तान के नौ आतंकवादी ठिकानों को नष्ट किया, लेकिन बाद में सरकार ने युद्धविराम की घोषणा कर दी, जिसके बारे में उनका दावा है कि यह अमेरिकी दबाव में हुआ। उनके अनुसार इस निर्णय में सरकार ने कमज़ोरी दिखाई।
मेहरोत्रा ने उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं पर क्या आरोप लगाए?
उन्होंने आरोप लगाया कि UP के अस्पतालों में पर्याप्त डॉक्टर, नर्स, फार्मासिस्ट और बेड नहीं हैं, और सरकार घटिया दवाइयाँ खरीद रही है। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री योगी के दावे और ज़मीनी हकीकत में बड़ा अंतर है।
सपा विधायक ने बसपा और मायावती पर क्या कहा?
मेहरोत्रा ने दावा किया कि बसपा अब BJP की 'बी-टीम' बन चुकी है और CBI, ED तथा आयकर विभाग जैसी केंद्रीय एजेंसियों के डर से मायावती को चुप करा दिया गया है। उन्होंने कहा कि बसपा का मकसद अब केवल गैर-भाजपा वोट बाँटना रह गया है।
ब्रिक्स मेन्यू विवाद पर मेहरोत्रा का क्या रुख था?
उन्होंने कहा कि किसी के खान-पान पर बहस नहीं होनी चाहिए और असली मुद्दे महंगाई, बेरोज़गारी, भ्रष्टाचार और स्वास्थ्य सेवाओं की बदहाली हैं, जिन पर सार्थक चर्चा होनी चाहिए।
राष्ट्र प्रेस
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