ब्रिक्स में मानसरोवर मुद्दा न उठाने पर सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा का केंद्र पर हमला
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) विधायक रविदास मेहरोत्रा ने 13 सितंबर 2026 को लखनऊ में केंद्र सरकार पर कड़ा प्रहार करते हुए सवाल उठाया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ब्रिक्स सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति की उपस्थिति के बावजूद मानसरोवर का मुद्दा क्यों नहीं उठाया। मेहरोत्रा ने यह भी कहा कि ऑपरेशन सिंदूर, उत्तर प्रदेश की स्वास्थ्य सेवाओं और बहुजन समाज पार्टी (बसपा) की भूमिका पर उनकी सरकार की स्थिति कमज़ोर रही है।
मानसरोवर और ब्रिक्स: चूका हुआ मौका
मेहरोत्रा ने कहा कि जब बारह देशों का ब्रिक्स सम्मेलन हो रहा था और उसमें चीन के राष्ट्रपति भी शामिल थे, तो यह भारत के लिए एक सुनहरा अवसर था। उनके अनुसार, 'भारत सरकार और प्रधानमंत्री के पास करोड़ों हिंदुओं की आस्था के पवित्र केंद्र मानसरोवर को वापस पाने का मुद्दा उठाने का मौका था, लेकिन उन्होंने चीन के राष्ट्रपति से इस पर कोई बात नहीं की।' विधायक ने कहा कि मानसरोवर आज भी चीन के नियंत्रण में है और सरकार की चुप्पी समझ से परे है।
गौरतलब है कि भारत-चीन सीमा विवाद और मानसरोवर यात्रा का मुद्दा दशकों से भारतीय कूटनीति का अटूट हिस्सा रहा है। यह ऐसे समय में और अधिक संवेदनशील हो जाता है जब कोई बहुपक्षीय मंच पर दोनों देशों के नेता आमने-सामने हों।
ऑपरेशन सिंदूर पर तीखा पलटवार
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के ऑपरेशन सिंदूर संबंधी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए मेहरोत्रा ने कहा कि जब पहलगाम हमले में 26 लोग मारे गए, तो भारतीय सेना ने पाकिस्तानी इलाके में घुसकर नौ आतंकवादी ठिकानों को नष्ट किया। उन्होंने कहा, 'बाद में भारत सरकार ने युद्धविराम की घोषणा की, जिसके बारे में कहा जाता है कि ऐसा अमेरिका के दबाव में किया गया था।' मेहरोत्रा ने दावा किया कि यदि युद्धविराम न होता, तो सेना पीओके पर कब्जा करने की स्थिति में हो सकती थी। उन्होंने स्पष्ट किया कि सेना बहादुर और सक्षम है, लेकिन उनकी राय में सरकार, गृह मंत्री और रक्षा मंत्री ने पाकिस्तान से निपटने में कमज़ोरी दिखाई।
उत्तर प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं की दुर्दशा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के स्वास्थ्य सेवा संबंधी दावों को खारिज करते हुए मेहरोत्रा ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश के अस्पतालों में पर्याप्त डॉक्टर, फार्मासिस्ट, नर्स और बेड नहीं हैं। उनका कहना था कि सरकार नामी दवा कंपनियों की जगह 'सस्ती और घटिया क्वालिटी की दवाइयाँ' खरीद रही है, जिससे मरीज़ों की जान जोखिम में है। उन्होंने यह भी कहा कि मुख्यमंत्री ने उसी दिन डॉ. राम मनोहर लोहिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज का दौरा किया और रोज़गार देने की बात की, लेकिन ज़मीनी हकीकत इससे उलट है।
बसपा पर निशाना और ब्रिक्स मेन्यू विवाद
मेहरोत्रा ने बहुजन समाज पार्टी (बसपा) और उनकी प्रमुख मायावती पर आरोप लगाया कि पार्टी अब भारतीय जनता पार्टी (BJP) की 'बी-टीम' बन चुकी है। उनका दावा था कि CBI, ED और आयकर विभाग जैसी केंद्रीय एजेंसियों के डर से मायावती को चुप करा दिया गया है और बसपा का एकमात्र मकसद अब गैर-भाजपा वोटों को बाँटना रह गया है।
ब्रिक्स मेन्यू विवाद पर मेहरोत्रा ने कहा कि किसी के खान-पान पर बहस बेकार है — असली मुद्दे महंगाई, बेरोज़गारी, भ्रष्टाचार और बिगड़ती स्वास्थ्य सेवाएँ हैं। उन्होंने कहा कि युवा नौकरी के लिए संघर्ष कर रहे हैं और गरीबी बढ़ रही है, लेकिन इन विषयों पर कोई सार्थक चर्चा नहीं हो रही।
आगे क्या होगा
मेहरोत्रा के इन बयानों से स्पष्ट है कि सपा ब्रिक्स कूटनीति, सैन्य ऑपरेशन के बाद के निर्णयों और राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार को आगामी दिनों में भी घेरती रहेगी। यह विधानसभा और सड़क — दोनों स्तरों पर विपक्षी रणनीति का हिस्सा दिख रहा है।