मुरादाबाद पीडीए सम्मेलन विवाद: सपा सांसद रुचि वीरा को न बुलाया, यूपी चुनाव 2027 से पहले पार्टी में गुटबाजी उजागर
सारांश
मुख्य बातें
समाजवादी पार्टी (सपा) की मुरादाबाद सांसद रुचि वीरा ने 15 जून 2025 को पार्टी के स्थानीय नेतृत्व पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि मुरादाबाद में आयोजित पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) सम्मेलन में उन्हें जानबूझकर आमंत्रित नहीं किया गया, जबकि वे उस दिन शहर में ही मौजूद थीं। यह घटना उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2027 से पहले सपा के भीतर उभरती आंतरिक दरारों को उजागर करती है।
मुख्य घटनाक्रम
वीरा के अनुसार, उन्हें पीडीए सम्मेलन की कोई पूर्व सूचना नहीं दी गई। वे उस दिन हज से लौटे लोगों से मुलाकात करने, उन्हें मुबारकबाद देने तथा कुछ शोक और विवाह कार्यक्रमों में भाग लेने में व्यस्त थीं। उन्होंने यह भी कहा कि कार्यक्रम के बैनर पर उनकी तस्वीर तक शामिल नहीं की गई।
वीरा ने कहा, 'मुझे इस पीडीए कार्यक्रम की कोई जानकारी नहीं थी, जबकि मैं उसी दिन शहर में ही थी।' उन्होंने जोड़ा, 'यदि मेरा फोटो बैनर पर नहीं लगाया गया, तो मेरी गैर-मौजूदगी में भी वह लगाया जा सकता था।'
सांसद की पार्टी नेतृत्व से शिकायत
वीरा ने स्पष्ट किया कि वे इस मामले की शिकायत सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव से करेंगी। उनका आरोप है कि कुछ स्थानीय नेता पार्टी में गुटबाजी को बढ़ावा दे रहे हैं और संगठन को जानबूझकर कमज़ोर करने की कोशिश कर रहे हैं।
उन्होंने कहा, 'यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि हमें आपस में लड़ना पड़ रहा है, जबकि हमें भारतीय जनता पार्टी (BJP) से मुकाबला करना चाहिए। मैं एक सांसद हूं और यदि मेरे ही फोटो को बैनर में शामिल नहीं किया गया, तो यह सवाल उठता है कि आम जनता के साथ कैसा व्यवहार किया जाएगा।'
पार्टी एकता पर असर
वीरा ने चेतावनी दी कि इस तरह की गुटबाजी से न केवल मुरादाबाद में पार्टी संगठन को नुकसान होगा, बल्कि सपा की चुनावी तैयारियों पर भी प्रतिकूल असर पड़ेगा। उनका कहना है कि कुछ लोग जानबूझकर पार्टी में वैमनस्य और विभाजन की राजनीति कर रहे हैं।
गौरतलब है कि पीडीए — यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक — गठजोड़ सपा की चुनावी रणनीति का केंद्रबिंदु है। ऐसे में इसी सम्मेलन से एक सांसद का बाहर रखा जाना पार्टी के लिए राजनीतिक रूप से संवेदनशील मुद्दा बन गया है।
विशेषज्ञ क्या कहते हैं
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, यूपी चुनाव 2027 से पहले सपा के भीतर इस तरह की खींचतान अखिलेश यादव के लिए संगठनात्मक चुनौती पेश कर सकती है। यह ऐसे समय में आया है जब पार्टी भाजपा के खिलाफ एकजुट मोर्चा बनाने की कोशिश में है। आलोचकों का कहना है कि स्थानीय स्तर पर इस तरह के विवाद पीडीए रणनीति की विश्वसनीयता को कमज़ोर कर सकते हैं।
क्या होगा आगे
वीरा ने संकेत दिया है कि वे अखिलेश यादव से मिलकर इस मामले को उनके संज्ञान में लाएंगी और दोषी नेताओं पर कार्रवाई की माँग करेंगी। पार्टी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि सपा नेतृत्व इस विवाद को किस तरह सुलझाता है और क्या आंतरिक अनुशासन की कोई कार्रवाई होती है।