थूथुकुडी कस्टोडियल डेथ: स्टालिन ने CM विजय को घेरा, पुलिस हिरासत में अरुणाचलम की मौत पर जवाब माँगा
सारांश
मुख्य बातें
द्रविड़ मुनेत्र कषगम (DMK) के अध्यक्ष एम.के. स्टालिन ने थूथुकुडी जिले के 24 वर्षीय अरुणाचलम की कथित हिरासत में मौत को लेकर तमिलनाडु सरकार पर तीखा हमला बोला है। स्टालिन ने मुख्यमंत्री सी. जोसेफ विजय से सार्वजनिक जवाबदेही की माँग की और आरोप लगाया कि यह घटना राज्य में पुलिस हिरासत में होने वाली मौतों के एक चिंताजनक और बार-बार दोहराए जाने वाले पैटर्न की ओर इशारा करती है।
घटनाक्रम: 17 जुलाई से 25 जुलाई तक
थूथुकुडी जिले के अमुधा नगर निवासी अरुणाचलम को 17 जुलाई को स्थानीय पुलिस ने कथित तौर पर काला बाज़ार में अवैध शराब बेचने के आरोप में गिरफ्तार किया था। पुलिस के अनुसार, उसी दिन हिरासत में उनकी तबीयत बिगड़ गई, जिसके बाद उन्हें जमानत पर रिहा कर परिजनों के साथ घर भेज दिया गया। बाद में हालत गंभीर होने पर उन्हें थूथुकुडी सरकारी मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहाँ कई दिनों तक उपचार के बावजूद बुधवार, 23 जुलाई को उनकी मृत्यु हो गई।
परिवार के सदस्यों ने आरोप लगाया है कि हिरासत के दौरान पुलिसकर्मियों ने अरुणाचलम के साथ मारपीट की और दावा किया कि उन्हीं चोटों के कारण उनकी जान गई। इन आरोपों के बाद स्थानीय लोगों और रिश्तेदारों ने विरोध-प्रदर्शन कर निष्पक्ष जाँच और दोषियों पर कार्रवाई की माँग की।
स्टालिन का एक्स पर हमला, CM विजय को घेरा
स्टालिन ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एक पोस्ट में तमिलनाडु में हिरासत में होने वाली मौतों के लगातार बढ़ते सिलसिले की कड़ी निंदा की। उन्होंने सवाल किया कि मुख्यमंत्री विजय आखिर कब इस तरह की बार-बार होने वाली घटनाओं पर सार्वजनिक रूप से बोलेंगे।
स्टालिन ने मुख्यमंत्री विजय के विपक्ष में रहने के दिनों की बातों का हवाला देते हुए कहा कि तत्कालीन विपक्षी नेता ने स्वयं पूर्व सरकार से ऐसे मामलों में जवाब माँगा था और पूछा था कि क्या महज माफी माँग लेना पर्याप्त है। स्टालिन ने आरोप लगाया कि सत्ता में आने के बाद मुख्यमंत्री ने न तो पीड़ित परिवार से माफी माँगी और न ही सार्वजनिक रूप से सहानुभूति व्यक्त की।
राजनीतिक प्रतिक्रिया और विपक्ष की माँग
इस घटना की कई राजनीतिक दलों ने आलोचना की है। विपक्षी नेताओं ने जाँच में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने की माँग की है। स्टालिन ने आरोप लगाया कि सत्ताधारी तमिलगा वेट्री कषगम (TVK) प्रशासन कस्टोडियल मौतों के पीड़ित परिवारों के प्रति बेहद कम संवेदनशीलता दिखा रहा है।
यह ऐसे समय में आया है जब तमिलनाडु में पुलिस हिरासत में मौतों के मामले पहले से ही राजनीतिक और सामाजिक बहस के केंद्र में हैं। गौरतलब है कि राज्य में इससे पहले भी कई कस्टोडियल डेथ के मामले सामने आ चुके हैं, जिन्होंने पुलिसिंग के तरीकों पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं।
आम जनता और परिवार पर असर
अरुणाचलम के परिजन और स्थानीय निवासी न्याय की माँग को लेकर सड़कों पर उतरे। परिवार ने स्वतंत्र और निष्पक्ष जाँच की अपील की है। मानवाधिकार संगठनों ने भी इस मामले में त्वरित कार्रवाई की माँग की है।
आगे क्या होगा
अरुणाचलम की मौत के हालात की जाँच की माँग तेज होती जा रही है। विपक्ष के दबाव और सार्वजनिक आक्रोश के बीच यह देखना महत्त्वपूर्ण होगा कि मुख्यमंत्री विजय और TVK सरकार इस मामले में क्या कदम उठाती है — क्या वह स्वतंत्र जाँच का आदेश देती है या राजनीतिक दबाव के बावजूद चुप्पी बनाए रखती है।